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पहले जाति-मजहब देखकर दी जाती थीं नौकरियां, अब होती है पारदर्शी नियुक्ति

पहले जाति-मजहब देखकर दी जाती थीं नौकरियां, अब होती है पारदर्शी नियुक्ति

  • सीएम योगी ने साधा पिछली सरकारों पर निशाना
  • चार साल में दीं चार लाख नौकरियां, पक्षपात और भ्रष्टïाचार की शिकायत पर होती है कड़ी कार्रवाई
  • मुख्यमंत्री ने खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए नियुक्तिपत्र
4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज बेसिक शिक्षा परिषद के नव नियुक्तखंड शिक्षा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने पिछली सरकारों पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि आज से चार वर्ष पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की गरिमा दांव पर लगी थी। जाति, क्षेत्र, मत और मजहब देखकर नियुक्तियां दी जाती थीं। धनबल और बाहुबल का भरपूर दुरुपयोग होता था। उन स्थियों में पारदर्शिता और सुचिता कपोल कल्पना मात्र थी लेकिन आज सभी चयन आयोगों से पारदर्शी तरीके से अभ्यर्थियों का चयन हो रहा है। लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि चार वर्ष के इस कार्यकाल के दौरान हम प्रदेश में चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने में सफल हुए हैं। युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा का लाभ प्रदेश के विकास के लिए ले पाने में सरकार सफल हो रही है। सरकार ने आयोगों और बोर्डों को पहले ही कह दिया था कि कहीं भी पक्षपात या भ्रष्टाचार की शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई होगी। इसका परिणाम है कि आज कोई भी युवा भ्रष्टाचार की शिकायत नहीं करता है।
बेसिक शिक्षामंत्री ने सीएम की शान में पढ़े कसीदे
बेसिक शिक्षामंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि पिछले चार साल में बेसिक शिक्षा विभाग में जो काम हुए है उसको गिनाने में बहुत समय लग जायेगा। सीएम योगी के रहते हुए गांव गरीब के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ, सड़क, अस्पताल आदि के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। सीएम का बच्चों को लेकर बहुत अधिक लगाव है। जिसके चलते ऑपरेशन कायकल्प की शुरुआत की गई। पहली बार स्कूल में टाइल्स लगाए गए। बच्चों को यूनिफॉर्म दी गई, बच्चे यूनिफॉर्म में चप्पल में अच्छे नहीं लगते हैं इसलिए जूते दिए गए। ठंड से बचाव के लिए स्वेटर दिए गए।
व्यापक पैमाने पर की गई पुलिसकर्मियों की भर्ती
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश में हर दूसरे-तीसरे दिन बड़ा दंगा होता था, जिसमें काफी संपत्ति की हानि होती थी। इन दंगों के कारण प्रदेश की छवि प्रभावित होती थी। आम आदमी परेशान होता था। इस दौरान नियंत्रण के लिए पुलिस बल की आवश्यकता थी लेकिन पुलिस कर्मियों की संख्या कम थी। तीन लाख की बजाए सवा लाख बल ही मौजूद था। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पीएसी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन उसकी 54 कंपनियां समाप्त कर दी गई थीं। तब प्रदेश सरकार ने कहा कि पूरी पारदर्शी तरीके से भर्ती की प्रक्रिया होनी है, जिसमें महिलाओं को प्राथमिकता दी गई। इसी का परिणाम है कि चार वर्षों के दौरान डेढ़ लाख से अधिक पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई।


किसानों को बर्बाद कर देंगे नए कृषि कानून : अखिलेश
  • कासगंज में आयोजित किसान महापंचायत में सपा प्रमुख ने सरकार पर साधा निशाना
  • किसानों के हाथ में कुछ नहीं बचेगा, एमएसपी से नहीं हुई धान की खरीद
4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि देश के किसान कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं लेकिन देश की सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। आंदोलन के दौरान ढाई सौ किसानों की मौत हो गई है। ये नौजवानों की भी पंचायत है। जय जवान और जय किसान का नारा फिर सुनाई देगा, सरकार बचेगी नहीं। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी में सभी ने नाक और मुंह बंद कर लिया लेकिन सरकार को किसानों की आवाज सुनाई नहीं पड़ रही है क्योंकि वह आंख और कान बंद किए हुए है। किसानों को अपमानित किया गया। उन्हें आतंकी कहा गया। जब तक इन सरकारों को कुर्सी से नहीं उतारोगे ये कानून वापस नहीं होंगे। कुर्सी से उतार दोगे तो कानून अपने आप वापस हो जाएंगे। हम सपा के सदस्य हैं लेकिन किसान हैं। जो एमएसपी धान की है वह किसी किसान को नहीं मिली। दिल्ली में बैठी सरकार एमएसपी से धान की खरीद का झूठा दावा कर रही है। ये कानून किसानों को बर्बाद कर देंगे। ये कानून लागू होते ही किसानों के हाथ में कुछ नहीं बचेगा। इस मौके पर महान दल के राष्टï्रीय अध्यक्ष केशवदेव मौर्य ने भी किसान महापंचायत को संबोधित किया।

लंबी चलेगी किसानों की लड़ाई, बॉर्डर पर तैयार होने लगे पक्के आशियाने

  • कृषि कानूनों की वापसी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं किसान
4पीएम न्यूज नेटवर्क. नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन थमता नहीं दिख रहा है। किसान सरकार से लंबी लड़ाई के मूड में हैं। गर्मी के मौसम को देखते हुए दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों ने अब पक्के आशियाने बनाने शुरू कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार ये कृषि कानून वापस नहीं लेती तब तक वे यहां डटे रहे हैं। इसी सिलसिले में टिकरी बॉर्डर पर परमानेंट शेल्टर बनाए गए हैं। किसान सोशल आर्मी टिकरी बॉर्डर पर ईंट-सीमेंट से पक्के मकान की तरह अपने आशियाने को बना रहे हैं। उनका मानना है कि आंदोलन लंबा चलेगा इसलिए उन्होंने परमानेंट शेल्टर का निर्माण किया है। अभी तक 25 घर बनाए गए हैं और आने वाले दिनों में ऐसे 1000 से 2000 घरों का निर्माण किया जाएगा। इसमें कूलर और पंखे के साथ खिड़की की व्यवस्था भी की गई है। टीकरी के साथ सोनीपत स्थित जीटी रोड पर भी पक्का निर्माण कराया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले कई महीने से किसान बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं।

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