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कुमार विश्वास ने गाया और लगा मां सरस्वती विराज गयी मंच पर

कुमार विश्वास ने गाया और लगा मां सरस्वती विराज गयी मंच पर

  • अटल की कविताओं को विश्वास ने दिया स्वर
  • केजीएमयू के कन्वेंशन सेंटर में अटल स्मृति काव्य संध्या आयोजित
  • सीएम योगी ने कानून मंत्री बृजेश पाठक की जमकर की सराहना
  • बृजेश पाठक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई अतिथियों का किया कार्यक्रम में सम्मान
4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। केजीएमयू कन्वेंशन सेंटर में देश के विख्यात कवि कुमार विश्वास ने जब गीत नया गाता हूं, गाया तो ऐसा लगा मंच पर मां सरस्वती विराज गयी हो। बेनकाब चेहरे है, दाग बड़े गहरे हैं... यही नहीं अटलजी की पंक्तियां हार नहीं मानूंगा...जब पढ़ी तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। मौका था देश के पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर राजधानी लखनऊ के केजीएमयू में अटल स्मृति काव्य संध्या कार्यक्रम का। केजीएमयू में अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, कानून मंत्री व अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष बृजेश पाठक, भाजपा के संगठन महामंत्री सुनील बंसल, महापौर संयुक्ता भाटिया, पद्ïमश्री मालिनी अवस्थी मौजूद थीं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अटलजी ने कहा था कि राजनीति मूल्यों और आदर्शों की होनी चाहिए और उन्होंने इसे अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रचारित भी किया। सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ उनकी स्मृतियां और संस्मरण लोगों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन आत्मप्रकाश मिश्र ने किया। कार्यक्रम में भारत रत्न अटलजी के साथ ही लालजी टंडन और कल्बे सादिक को भी याद किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सीएम योगी ने कानून मंत्री बृजेश पाठक की जमकर सराहना की।



कविता तो हजारों साल जिंदा रहेगी

कार्यक्रम के दौरान कुमार विश्वास ने कलेजे में जलन, आंखों में पानी छोड़ जाती हो... अगर उम्मीद की चुनर को धानी छोड़ जाती हो प्रस्तुत किया। फिर विश्वास ने एक के बाद एक कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है। इस अधूरी जवानी का क्या फायदा, बिन कथानक कहानी का क्या फायदा, प्रस्तुत कर लोगों को खूब गुदगुदाया। साथ ही मुझे वो मारकर खुश है, की सारा राज उसका है। यकीनन कल है मेरा, आज बेशक आज उसका है प्रस्तुत कर राजनीति पर तंज भी कसा। विश्वास बोले, राजनीति पांच-दस साल रहेगी लेकिन कविता तो हजारों साल जिंदा रहेगी। वहीं एशिया के हम परिंदे, आसमां है हद हमारी... हम हैं देशी पर पूरी दुनिया में छाए हम, प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। कुमार ने कहा कि मेरा दावा है कि अगले साल भारत चांद तक पहुंचेगा।
राजनीति के अजातशत्रु थे भारत रत्न अटलजी
कुमार विश्वास ने कहा कि अटलजी अपने विरोधयों में भी प्रिय थे। वे राजनीति के अजातशत्रु थे। वो अकेले विपक्ष थे। कुमार विश्वास ने राजनेताओं पर खूब तीर छोड़े। भाजपा अध्यक्ष को कहा कि वो तो भूल गए कि कार्यक्रम पार्टी का नहीं है। पीएम और गृहमंत्री पर कहा कि इनको आराम नहीं, बिहार निपटा नहीं कि बंगाल की घोषणा कर दी। बोले गुजरात वाले गृहमंत्री के पहले दिल्ली में आजादी के काफी नारे लगते थे, अब नहीं लगते। पता है कि ये वाला होम डिलीवरी करवा देगा। कार्यक्रम के बीच में खड़े लोगों से परेशान कुमार विश्वास ने उनकी भी खूब खिंचाई की।
अटलजी के आदर्शों को अपनाना चाहिए : बृजेश पाठक
काव्य संध्या में विचार रखते हुए कानून मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि अटलजी ने जो सपना देखा था वह साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सबके लिए प्रेरणास्रोत हंै उनके आदर्शों को अपनाना चाहिए। विधि मंत्री व अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष बृजेश पाठक ने इस मौके पर अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि कुमार विश्वास के साथ छात्र जीवन से साथ रहा हूं। काफी संघर्ष का समय था। इससे पहले उन्होंने अतिथियों को शाल, स्मृति चिन्ह व पुस्तकें देकर सम्मानित किया। बता दें कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउंडेशन का गठन प्रदेश के विधि मंत्री बृजेश पाठक ने ही किया है। यह इस फाउंडेशन का पहला कार्यक्रम था।
इनका हुआ सम्मान
अटलजी के साथ रहे विद्यासागर गुप्त, विधायक सुरेश श्रीवास्तव, रामकुमार शुक्ल, डॉॅॅ. राजीव लोचन, सुरेश तिवारी, मनोहर सिंह, हृदय नारायण दीक्षित, विनोद वाजपेयी, राम आसरे, राम नारायण साहू, रमेश तूफानी, रंजना द्विवेदी, विजय कुमार श्रीवास्तव, रमा शंकर शुक्ल का बृजेश पाठक के सानिध्य में सम्मान किया गया।
कुमार विश्वास ने लखनऊ के नाम पढ़ी ये कविता
गोमती का मचलता ये पानी भी है
हिंद के उस गदर की निशानी भी है
इसमें नागर की अमृत कहानी भी है
कुछ अटलजी की वाजिब जवानी भी है
पान शिवनाथ का, तान नौशाद की
लफ्ज मिनाई के हैं, असर लखनवी
हजरतगंज, चिकनचौक की आबरू
है ये शामें अवध तरजुमा रूबरू
लखनऊ लखनऊ लखनऊ...

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