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मोदी की डिक्शनरी में झुकना शब्द नहीं, योगी को मानना ही पड़ेगा

मोदी की डिक्शनरी में झुकना शब्द नहीं, योगी को मानना ही पड़ेगा

  • अरविंद शर्मा को लेकर जो खटपट हुई है, उससे केन्द्रीय नेतृत्व में नाराजगी तो है
  • मोदी और योगी की मुलाकात के बाद देखना ये है कि क्या होगा बीजेपी में

4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी जब से दिल्ली गए है तब से पूरे देश में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या मोदी से लड़कर योगी की कुर्सी बची रह सकती है। मोदी और योगी की जंग में जीत मोदी की ही होगी। योगी को मोदी के सामने झुकना ही पड़ेगा। हो सकता है कि चुनाव के पहले तक किसी तरह का बदलाव न हो, लेकिन योगी-मोदी के बीच अरविंद शर्मा को लेकर जो खटपट हुई है, उससे नाराजगी तो है। चुनाव तो योगी के नाम पर ही लड़ा जाएगा लेकिन ऐसा संभव है कि असम की तरह अंत समय में कोई और कुर्सी बैठ जाए। मोदी का इकबाल हमेशा से ऐसा रहा है कि कोई उनकी बात नहीं काट सकता, लेकिन योगीजी ने एके शर्मा को लेकर जिस तरह का रिएक्शन दिया उससे मोदी नाराज तो है। ऐसे में यह समस्या सुलझने वाली तो नही है। ये बात निकलकर आई वरिष्ठï पत्रकार दीपक शर्मा, वरिष्ठï पत्रकार अशोक बानखेड़े, चर्चित पत्रकार सिद्घार्थ कलहंस व 4पीएम के संपादक संजय शर्मा के साथ एक लंबी परिचर्चा में।

परिचर्चा में दीपक शर्मा ने कहा मोदीजी की डिक्शनरी में झुकना शब्द नहीं है। उन्होंने हमेशा से ही लोगों को झुकाया है। इनमें आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी का नाम मुख्य है। अशोक बानखेड़े ने कहा दो मई के बाद जिस तरह एके शर्मा को एमएलसी बनाकर भेजा गया, उससे साफ था कि वे मंत्री बनाए जाएंगे, लेकिन अगर उन्हें जगह नहीं मिल पाई है तो इसका मतलब है कि मोदी जी बैकफुट पर गए हैं क्योंकि योगीजी के पास खोने को कुछ नहीं है। परिचर्चा में सिद्धार्थ कलहंस ने कहा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और योगीजी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मोदी-शाह को हमेशा से ही वे सीएम पसंद आए हैं जो केवल प्रदेश की राजनीति में ही हावी रहे हैं। वे मुख्यमंत्री कभी भी मोदी-शाह की गुडबुक्स में नहीं रहे, जिनका कद प्रदेश के साथ राष्टï्रीय स्तर पर हावी रहा हो। यूपी में बदलाव तो होगा इसका निर्णय दिल्ली का शीर्ष नेतृत्व करेगा।




यूपी में अब तक सवा पांच करोड़ लोगों का कोरोना टेस्ट: नवनीत सहगल

  • 28 जिले अब ऐसे हैं, जहां 100 से कम रोगी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क. लखनऊ। अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल ने बताया कि बीते 24 घंटे में तीन लाख से अधिक लोगों की कोरोना जांच की गई। अब तक कुल 5.25 करोड़ लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि शहरों के साथ गांवों में भी लोगों की कोरोना जांच बड़ी संख्या में की जा रही है। अब हर दिन जांचे गए कुल सैंपल में से करीब 65 प्रतिशत सैंपल ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के होते हैं। बीती पांच मई से निगरानी कमेटियां घर-घर जाकर लोगों का हालचाल ले रही हैं। अब तक 11 लाख लोगों को मेडिकल किट बांटी जा चुकी है। नवनीत सहगल ने कहा उत्तर प्रदेश में कोरोना से बचाव के लिए जांच पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। यहां एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए 31 लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। वहीं दिल्ली में एक संक्रमित के संपर्क में आए 14 लोगों की जांच हो रही है। इसी तरह तमिलनाडु में 12, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में 11-11, केरल में आठ और महाराष्टï्र में छह लोगों की कोरोना जांच की जा रही है। सहगल ने कहा यूपी में कोरोना वायरस का संक्रमण अब तेजी से घट रहा है। पिछले 24 घंटे में कोरोना से संक्रमित 642 नए रोगी मिले। अब सक्रिय केस घटकर 12,243 रह गए हैं। प्रदेश में 28 जिले अब ऐसे हैं, जहां अब कोरोना के 100 से कम रोगी हैं। अभी तक प्रदेश में कुल 17 लाख लोग संक्रमित हुए हैं और इसमें से 16.67 लाख रोगी ठीक हो चुके हैं। अब रिकवरी रेट 98 प्रतिशत है।

पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि को लेकर प्रदर्शन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क. लखनऊ। यूपी कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन किया। इस बीच पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को गिरफ्तार कर लिया। प्रदर्शन के दौरान जनहित से जुड़े मुद्दे जैसे रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी, महंगाई और बेरोजगारी आदि को कांग्रेस ने उठाया। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का कहना है कि भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण देश में महंगाई बढ़ी है। कोविड महामारी में भी बढ़ती महंगाई से देश की जनता का हाल बेहाल है। जनता भाजपा सरकार से त्रस्त हो चुकी है। ऐसे में अब कांग्रेस सड़कों पर उतर कर दोनों सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन करेगी। विधायक आराधना मिश्रा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक वक्त था जब देश में कांग्रेस की सरकार थी और तब भाजपा के तमाम नेता, जो आज केंद्र सरकार में मंत्री बने बैठे हैं। दिल्ली की सड़कों पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर जेल भरो आंदोलन करते थे। उन्होंने कहा आज वे तमाम नेता पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों पर चुप हैं वह भी तब, जब कच्चे तेल की कीमत कम है। ऐसे में आज दोनों सरकारें जनता को लूटने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई बेलगाम हो गई है। जबकि नागरिक कोविड-19 की दूसरी लहर और लॉकडाउन से जूझ रहे हैं।

प्रदूषण रोकने को लखनऊ में खर्च होंगे 18 करोड़

  • वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कसी कमर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क. लखनऊ। यूपी में प्रदूषण खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे। वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए यूपी सरकार ने कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना में लखनऊ, आगरा, प्रयागराज, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी व मेरठ शहर शामिल किए गए हैं। इनमें वायु प्रदूषण पर 24 घंटे नजर रखने के लिए ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें हर समय रियल-टाइम डाटा मिलेगा। मैनुअल स्टेशन की भी संख्या बढ़ाई जाएगी। प्रदूषण पर निगरानी व तत्काल कार्रवाई के लिए अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया जाएगा। बता दूं कि केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग से मिलियन प्लस शहरों के नगरीय निकायों के लिए पहली किस्त जारी कर दी है। इसके तहत प्रदेश के सात शहरों के लिए 357 करोड़ रुपये मिले हैं। इस धनराशि से शहरों के प्रदूषण नियंत्रण के लिए मूलभूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा सकता है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सात शहरों में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इन सात शहरों के लिए पांच साल की जो कार्ययोजना तैयार हुई उसके तहत करीब 143 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। लखनऊ में 18.72 करोड़, आगरा में 17.63 करोड़, प्रयागराज में 15.83 करोड़, गाजियाबाद में 21.86 करोड़, कानपुर में 24.17 करोड़, वाराणसी में 16.98 करोड़ व मेरठ में 27.64 रुपये की योजना शामिल है। नगरीय निकायों को उनकी परफारमेंस के आधार पर अगले वित्तीय वर्ष में धनराशि दी जाएगी।

नाबालिग से संबंध पर शादीशुदा शिक्षक को निकाह का फरमान!

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क. लखनऊ। गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पिपराइच थाना क्षेत्र के एक गांव में दसवीं की छात्रा से अवैध संबंध बनाने वाले शिक्षक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए पुलिस को सौंपने की जगह पंचों ने शिक्षक के पक्ष में छात्रा से शादी का फैसला सुना दिया। बेटी की उम्र की नाबालिग छात्रा से शिक्षक को निकाह करने का फरमान पंचों ने सुनाया। वह भी तब जब यह पता है कि नाबालिग से शादी करना और कराना जुर्म है। बेटी की संबंधों की चर्चा और गांव में बदनामी से पीड़ित परिवार ने पंचों का फैसला मान लिया पर शिक्षक के पिता ने प्रॉपर्टी में बंटवारे की आशंका पर अपनी आपत्ती दर्ज करा दी। उन्होंने कहा शिक्षक अगर अपनी पहली पत्नी के बच्चों के नाम आधी प्रॉपर्टी की रजिस्टर्ड वसीयत करता है तब ही वह शादी करने देंगे।

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