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मोदी के करीबी एके शर्मा को योगी नहीं देना चाहते कैबिनेट में अहम पद

मोदी के करीबी एके शर्मा को योगी नहीं देना चाहते कैबिनेट में अहम पद

  • 4पीएम की परिचर्चा में सामने आया- अरविंद शर्मा चतुर राजनीतिक खिलाड़ी इन्हें शांत करना ही पड़ेगा
  • बीजेपी के अंदर विधायकों व मंत्रियों में बगावत

4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। यूपी में हफ्तेभर से भारतीय जनता पार्टी में राजनीतिक घमासान जारी है। अंदर ही अंदर विधायकों व मंत्रियों में बगावत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, एके शर्मा में वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एमएलसी एके शर्मा को अहम पद नहीं देना चाहते जबकि बीजेपी व मोदी चाहते हैं कि एके शर्मा यूपी के उपमुख्यमंत्री का पद संभालें। विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी संगठन को मजबूत कर फिर से सत्ता में वापसी चाहती है इसे लेकर वह केशव मौर्य का कद भी बढ़ाना चाहती है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी उनके लिए बड़ी चुनौती है। योगी भी जानते हैं कि अरविंद शर्मा चतुर राजनीतिक खिलाड़ी है। इन्हें शांत करना ही पड़ेगा। पीएम के सबसे करीबी अरविंद शर्मा को एक खास भूमिका को लेकर बात नहीं बन पा रही। यही सबसे बड़ी वजह है। यह बात निकलकर आई अमर उजाला समूह के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री, चर्चित पत्रकार अरविंद सिंह, ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के सचिव रहे एनके सिंह व 4पीएम के संपादक सजंय शर्मा के साथ एक लंबी परिचर्चा में। वरिष्ठï पत्रकार एनके सिंह ने कहा, पूरे देश की पॉलिटिक्स में यूपी एक नया मकाम लेने जा रहा है। यूपी में अगर अरविंद शर्मा पॉवर सेंटर बनते हैं तो आईएएस की लॉबी चालाक होती है तो वो एक्टिव हो जाएगी और दूसरी लॉबी योगी को भी मैनेज करेगी। ऐसे में दो धड़े हो जाएंगे। बंगाल में चीफ सेक्रेटरी इसका उदाहरण है। यूपी में अगर दो पॉवर सेंटर बनेंगे तो यूपी का भला नहीं होगा। अब छह महीने रह गए है चुनाव में तो बीजेपी अभी ऐसी कोई गलती नहीं करेगी। यूपी में बीजेपी का वोट 18 फीसदी है। पंचायत चुनाव में बीजेपी को वोट कम मिले ये बीजेपी अच्छी तरह से जानती है। एके शर्मा अचानक अवतरित हुए हैं। योगी पहले भी काम नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में अगर एके शर्मा आ जाते हैं तो उनके लिए काम करना और मुश्किल हो जाएगा।

चर्चित पत्रकार अरविंद सिंह कहते हैं कि योगी रणनीतिक है। ये जो लगातार भाजपा की बैठकें हो रही हैं उससे योगी चिंतित भी है। अब देखना होगा कि इन बैठकों का राजनीतिक निचोड़ क्या निकलेगा क्योंकि वर्तमान में गोविंद वल्लभ पंत नहीं बैठे हैं। अरविंद कहते हैं कि भारत सरकार में एक आदमी जो चीफ सेके्रटरी का पद छोड़ वीआरएस लेकर उत्तर प्रदेश आया है। आते ही वो व्यक्ति विधानमंडल का सदस्य बन गया तो इसके पीछे कहानी कई है। योगी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि अपनी ही पार्टी के विधायकों को वो साध नहीं पा रहे हैं। यहीं उनके लिए चुनौती बन गया है। इसी के वजह बीजेपी अंदरखाने नाराज है। इसी वर्चस्व को लेकर लड़ाई चल रही है।

परिचर्चा में विनोद अग्निहोत्री कहते हैं कि जो पावर सीधा मुख्यमंत्री के पास है वो अपने पास ही रखना चाहते हैं क्योंकि अगर वो पॉवर बंट जाए तो इसका असर काम पर भी पड़ता है। बीजेपी योगी को भी कतई नाराज नहीं करेगी। ये जो बैठकें चल रही है, इसमें यही उपाय ढूढ़ा जा रहा है कि किस तरह संगठन व सरकार को खुश रखा जाए। एके शर्मा अगर योगीजी की सहमति से कैबिनेट में कुछ बनते हैं तो ये आने वाले वक्त में अच्छा ही होगा। उत्तर प्रदेश में हर राजनीतिक दल की यही स्थिति रही है कि जातीय समीकरण साधा जाए। कल्याण सिंह जब सीएम बने तो तब भी विधायक एकजुट होकर अटलजी से मिलने जाते थे और अब भी वहीं हो रहा है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ।




लेनदेन मामले में एसटीएफ अफसर ने बर्बरता से पीटा

  • पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने की जांच की मांग
  • इंस्पेक्टर प्रमोद वर्मा पर कार्रवाई की मांग

4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने एसटीएफ लखनऊ के इंस्पेक्टर प्रमोद वर्मा द्वारा एचडीएफसी के वरुण श्रीवास्तव से गैरकानूनी ढंग से मारपीट करने की शिकायत की जांच की मांग की है। डीजीपी यूपी तथा अन्य को भेजे अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि वरुण श्रीवास्तव के अनुसार उनका आरएमएल अस्पताल, गोमतीनगर के डॉ सुव्रत चंद्रा से पैसे के लेनदेन का विवाद है। इस मामले में एसटीएफ के अफसर पिछले एक माह से उन्हें आये दिन एसटीएफ कार्यालय में बुला कर धमकी और मारपीट की है। जान से मारने की भी धमकी दी। तीन दिन पहले भी उन्हें शरीर के पिछले भाग पर मारा पीटा गया था। वरूण श्रीवास्तव इससे बहुत डरे हुए हैं तथा अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं। अमिताभ ने कहा कि यदि श्री श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं तो एसटीएफ के अफसरों का यह कृत्य पूरी तरह गैर-कानूनी व अधिकारों का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि एसटीएफ के अफसरों द्वारा इसी प्रकार से तमाम निजी मामलों में भी किसी एक पार्टी से शिकायत लेकर मामले में हस्तक्षेप करने की शिकायतें आती रहती हैं। अत: उन्होंने वरुण श्रीवास्तव की शिकायत की जांच एसटीएफ से बाहर के किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराए जाने तथा एसटीएफ द्वारा निजी मामलों में अनधिकृत हस्तक्षेप नहीं करने की मांग की है।

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