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जब लोगों ने निकालना शुरू किया गुस्सा तो ट्विटर बन गया सरकार का दुश्मन

जब लोगों ने निकालना शुरू किया गुस्सा तो ट्विटर बन गया सरकार का दुश्मन

  • 4पीएम की परिचर्चा में यह बात निकलकर आई कि सच सामने न आने पाए इसलिए ट्विटर को बैन करने की तैयारी में सरकार
4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। भारत सरकार और ट्विटर में जंग शुरू हो चुकी है। ट्विटर ने सरकार की नई गाइडलाइन पर सवाल उठाते हुए गोपनीयता के हनन का आरोप लगाया है। ट्विटर के बयान के बाद केंद्र सरकार ट्विटर पर लगातार हमलावर है। दिल्ली पुलिस ने ट्विटर कार्यालय पर छापा मार दिया। नोटिस दिया। इस पर ट्विटर ने कहा, भारत सरकार उसे लगातार परेशान कर रही है। बात इतनी सी है कि ट्विटर पर सच सामने आने लगा तो केंद्र सरकार को चुभने लगा। सरकार ट्विटर पर दबाव बनाना चाहती है जबकि ट्विटर पर सरकार कभी अपनी तारीफों के पुल बांधती थी। बदलते दौर में जब लोगों ने अपना ग़ुस्सा निकालना शुरू किया तो यही ट्विटर सरकार के लिए दुश्मन बन गया। इसी वजह से सरकार ट्विटर बैन करना चाहती है। मगर ट्विटर भी सरकार के आदेशों पर झुकने को तैयार नहीं है। यह बात निकलकर आई पूर्व निदेशक राज्यसभा टीवी राजेश बादल, वरिष्ठï पत्रकार अशोक बानखेड़े, चर्चित पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल, नौजवान स्वतंत्र पत्रकार रणविजय सिंह व 4पीएम के संपादक संजय शर्मा के साथ एक लंबी परिचर्चा में। परिचर्चा में पत्रकार और फिल्मकार राजेश बादल ने कहा ट्विटर बड़ा औजार है। खासकर बीजेपी ऐसे प्लेटफार्म तलाशती है, जिसपे अपनी छवि को चमका सके और जब दूसरे दलों ने यह बात समझ ली कि ट्विटर बड़ा हथियार है। तीर उलटने लगे तो ऐसे में केंद्र सरकार को परेशानी होनी लगी। हम भारतीयों की बड़ी आदत है जब कोई नया अवतार आता है तो उसमें दिलचस्पी बहुत होती है। रेडियो, दूरदर्शन उदाहरण है और अब जब सोशलमीडिया आया है तो इसके अपने दर्शक है। ट्विटर का अपना एक कल्चर है, जिसमें कम शब्दों में अपनी बात लोगों तक पहुंचाई जाए। ऐसे में जो शब्द दिमाग में आते हैं वह ही इस्तेमाल किए जाते हैं। कोरोना काल में सरकार के समूचे सिस्टम की बदनामी हुई है। सरकार को खतरे का अंदेशा हुआ तो ट्वीटर पर केंद्र ने कार्रवाई शुरू कर दी। वरिष्ठï पत्रकार अशोक बानखेड़े ने कहा बीजेपी और कांग्रेस की लड़ाई में केंद्र सरकार कौन होती है बीच में आकर कहने वाली कि ट्विटर ये मेनोप्लेटेड टैग हटाए। ट्विटर को नोटिस भी दिया गया। राजनीतिक लड़ाई में ट्विटर पीसा गया। क्या केंद्र सरकार इस बात की गारंटी देती है कि संबित पात्रा ने जो कहा, वो सही है और अगर वो सही है तो कांग्रेस के नेताओं को जेल क्यों नहीं भेजा। मोदी सरकार बैकफुट पर है। सरकार अमेरिका से पंगा नहीं ले सकती, ऐसे में ट्विटर के नाम पर राजनीतिक खेल खेला जा रहा है।
चर्चित पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला ने कहा हर आदमी का एक अंदाज होता है। मुझे लगा ये सरकार ये फैसला सही नहीं है तो टिप्पणी करनी चाहिए। ऐसे में अपनी बात ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सअप पर लोग रखते हैं। ट्विटर जब बुद्घिजीवी लोग अपनी बात रखने लगे तो सरकार को चुभने लगा। ऐसे में सरकार ने इस पर लगाम कसना शुरू कर दिया। सरकार अभिव्यक्ति की आजादी दबाना चाहती है। सरकार को मालूम है कि ट्विटर पर बदनामी मतलब पूरी दुनिया में बदनामी। यही सब वजहें है कि सरकार ट्विटर को बैन करना चाहती है। स्वतंत्र पत्रकार रणविजय सिंह ने कहा ट्विटर को बैन कर देना यह बड़ा गलत कदम होगा। ट्विटर की वजह से हजारों लोगों को रोजगार भी मिला है। ट्विटर पहले एक प्रचार तंत्र था मगर अब सरकार के झूठ को दिखाए जाने का ये जो टे्रंड आया, इसी वजह से ट्विटर और सरकार में लड़ाई शुरू हो गयी है।


आलमबाग सब्जी मंडी में उड़ीं कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां
4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। राजधानी लखनऊ की आलमबाग सब्जी मंडी में दुकानदारों और ग्राहकों द्वारा लॉकडाउन के नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। सब्जी मंडी में ग्राहक और दुकानदार सरकार के नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। इस मामले में विभागीय अधिकारी जरा भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। सब्जी मंडी में सुबह से ही ग्राहकों का आवागमन शुरू हो जाता है। सब्जी मंडी में ना तो दुकानदार ही मास्क का प्रयोग करते हैं और न ही यहां खरीदारी करने पहुंचने वाले ग्राहक। सब्जी मंडी में सामाजिक दूरी की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सब्जी मंडी में मार्केट कमेटी के कर्मचारियों द्वारा सभी दुकानदारों को मास्क लगाने तथा शारीरिक दूरी बनाए रखने के साथ सामान बेचने के चेतावनी जारी की हुई है, लेकिन मंडी में बाहर से आने वाले ज्यादातर ग्राहकों द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सब्जी मंडी को रामभरोसे छोड़ दिया है। प्रशासनिक अधिकारी यहां आने में भी परहेज करते हैं। मंडी व उसके आसपास की कालोनियों के लोगों ने मार्केट कमेटी के अधिकारियों से मांग की है मंडी में लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने के लिए कर्मचारियों की तैनाती की जाए और मास्क का प्रयोग करने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए।

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