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भारतीय कामगारों को कोरोना का टीका नहीं लगा रहा नेपाल, पलायन शुरू

भारतीय कामगारों को कोरोना का टीका नहीं लगा रहा नेपाल, पलायन शुरू

गोरखपुर। कोरोना टीकाकरण के पहले दौर में बिना भेदभाव वैक्सिनेशन करने वाले नेपाल में दूसरे दौर में भारतीयों को कोरोनारोधी टीका नहीं लगाया जा रहा है। वहां अभी केवल नेपाली मूल के नागरिकों को ही टीका लग रहा है। टीकाकरण के नियम में हुए इस बदलाव के बाद वहां सालों से काम कर रहे भारतीय पलायन करने लगे हैैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के मूल निवासी ये भारतीय रोज डेढ़-दो सौ की संख्या में सोनौली बार्डर से भारत आ रहे हैैं। भारत के विभिन्न राज्यों के हजारों लोग नेपाल की विभिन्नि फैक्ट्रियों व ईंट-भट्ठे पर काम करतेे हैैं। नेपाल के मेडिकल कालेजों में भी भारतीयों की संख्या अधिक है। कोरोना संक्रमण की पहली लहर के बाद शुरू हुए टीकाकरण अभियान मेें भारतीयों को भी प्राथमिकता मिलती थी, लेकिन दूसरी लहर में भारतीयों की उपेक्षा शुरू हो गई। बुधवार को सोनौली सीमा से वापस अपने घर जा रहे झारखंड के रमेश मांझी, सुरेश कुमार व दिनेश ने बताया कि वे बुटवल की एक सीमेंट फैक्ट्री में बीते 10 साल से काम कर रहे हैैं। नेपाल में ही रहते हैैं। कंपनी का आइकार्ड दिखाकर सुविधाएं मिल जाती थीं, लेकिन टीका नहीं लग रहा है। पहले भारत का आधार कार्ड देखकर भी टीका लग रहा था, लेकिन अब बंद कर दिया।

नेपाल में भारतीय मूल की जनसंख्या 40 लाख

खुली सीमा वाले पड़ोसी देश नेपाल की जनसंख्या करीब तीन करोड़ है, जिसमें भारतीय मूल के 40 लाख लोग हैं। इनमें भारत से नेपाल जाकर काम करने वालों के अलावा ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनके पास दोनों देश में जमीन है। वहां की नागरिकता है। छह लाख लोग ऐसे हैैं, जो नेपाल में नौकरी करते हैं। नेपाल के 75 जिले में से 23 जिले भारत से जुड़े हुए हैैं। सीमावर्ती इलाके के गांवों में रोटी-बेटी का रिश्ता है।

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