लखीमपुर हिंसा : पीड़ितों को न्याय तभी मिलेगा जब टेनी का इस्तीफा होगा : खड़गे

लखीमपुर हिंसा : पीड़ितों को न्याय तभी मिलेगा जब टेनी का इस्तीफा होगा : खड़गे

  • लखीमपुर हिंसा मामले पर रामनाथ कोविंद से मिला कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल
  • राहुल गांधी व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन

नईर् दिल्ली। लखीमपुर हिंसा को लेकर कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राष्टï्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने आज राष्टï्रपति भवन पहुंचा गया। वहां कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राष्टï्रपति से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और इस मामले में सक्रिय दिख रही यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल दल राष्टï्रपति कोविन्द से मिला और इस घटना से जुड़े तथ्यों के साथ उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमने राष्टï्रपति को लखीमपुर खीरी कांड के संबंध में सारी जानकारी दी है। हमारी दो मांगें हैं। पहली तो मौजूदा जजों से स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और गृह राज्य मंत्री (अजय मिश्रा टेनी) को या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या बर्खास्त कर देना चाहिए। खड़गे ने कहा राष्टï्रपति महोदय पीड़ितों को न्याय तभी संभव होगा, जब टेनी बर्खास्त हो जाएंगे या उनका इस्तीफा मंजूर होगा। कांग्रेस के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दल में राहुल गांधी के अलावा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खड़गे, वरिष्ठ नेता एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल थे।

क्या है लखीमपुर हिंसा मामला?

तीन अक्टूबर, 2021 की घटना लखीमपुर शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर तिकुनिया-बनबीरपुर रोड पर हुई, जब किसान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पैतृक गांव बनबीरपुर जाने का विरोध कर रहे थे। इस घटना में चार किसान, एक पत्रकार और तीन अन्य (जो इस घटना के बाद पीट-पीट कर मार दिए गए थे) की मौत हो गई थी। मरने वाले किसानों में दो लखीमपुर खीरी और दो पड़ोसी बहराइच जिले के थे।



25 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर

लखनऊ। घर से गिरफ्तारी के दौरान खुद को पूर्व वरिष्ठ आईपीएस बताकर धमकी देने व सरकारी कार्य में बाधा डालने के आपराधिक मामले में अदालत ने अभियुक्त अमिताभ ठाकुर को 25 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। सीजेएम रवि कुमार गुप्ता ने यह आदेश इस मामले के विवेचक व दारोगा अरुण कुमार मिश्रा की अर्जी को मंजूर व अमिताभ ठाकुर की अर्जी को खारिज करते हुए दिया है। विवेचक की इस अर्जी पर सुनवाई के दौरान अमिताभ ठाकुर को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में जेल से अदालत में पेश किया गया था। विवेचक का कहना था कि बीते 27 अगस्त को एक आपराधिक मामले में अमिताभ ठाकुर को गिरफ्तारी देने को कहा गया। लेकिन वह खुद को पूर्व आइपीएस बताकर धमकी देने लगे। गिरफ्तारी देने से इंकार किया। लेकिन जब पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का प्रयास किया गया, तो वह और उनकी पत्नी पुलिस कर्मचारियों पर हमलावर हो गए। कुछ पुलिस कर्मचारियों को आंशिक चोट भी आई। इनके द्वारा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने से असहज स्थिति पैदा हो गई। लिहाजा दारोगा धनंजय सिंह ने थाना गोमतीनगर में इन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 186, 189, 224, 323, 353 व 427 में यह मुकदमा दर्ज कराया। इस मुकदमे की विवेचना के लिए अभियुक्त को न्यायिक रिमांड में लिया जाना आवश्यक है। दूसरी तरफ अदालत में मौजूद अमिताभ ठाकुर ने खुद ही बहस करते हुए न्यायिक रिमांड का विरोध किया। कहा कि रिमांड मांगने का एक मात्र उद्ïदेश्य उनका शोषण व उत्पीड़न करना है। जबकि इस मामले में कोई साक्ष्य और न कोई तथ्य ही मौजूद है। यह रिपोर्ट झूठी है। उन्होंने कई निर्णयों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि सिर्फ रुटीन ढंग से नहीं बल्कि न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग करते हुए ही रिमांड दिया जा सकता है। यदि विवेचक को ऐसा लगता है, कि इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य है, तो उन्हें आरोप पत्र प्रेषित करना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत पूर्णतया अस्पष्ट व मनमाना कारण रिमांड देने का आधार नहीं हो सकता। सिर्फ उनकी स्वतंत्रता को बाधित करने के लिए विधि विरुद्ध तरीके से न्यायिक रिमांड की अर्जी दी गई है। इस दौरान अमिताभ की पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर व कई वकील भी अदालत में मौजूद थे।

अष्टïमी पर मंदिरों में उमड़ी आस्था, पंडालों में रौनक

लखनऊ। शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर आज शहर के छोटे-बड़े सभी मंदिरों में आस्था की भीड़ उमड़ पड़ी। अष्टमी पर मां दुर्गा के पूजन का विशेष महत्व होने से देवी मंदिरों में भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। मां चांदिका मंदिर सहित राजधानी के सभी मंदिरों में मेले जैसा दृश्यरहा। मंदिरों में आस्था की भीड़ उमड़ने से पुलिस व मंदिर कमेटी के लोगों को काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। इस बीच शहर में कई स्थानों पर लगे पूजा पंडालों में भी गजब की रौनक रही। पंडालों में स्थापित एक से एक दिव्य प्रतिमाओं को देखने के लिए दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ी। बच्चे पंडालों में बज रहे डीजे की धुन पर जमकर थिरकते नजर आए। चारों ओर उल्लास व उत्साह का माहौल रहा। इस बीच चारों ओर मां के जयकारे से वातावरण गुंजायमान होता रहा। वहीं दूसरी ओर आदिज्योति सेवा समिति द्वारा नवोत्सव कार्यक्रम जारी है। संस्था की अध्यक्ष ज्योति ने बताया कि श्री गौर राधा कृष्ण मंदिर पुराना इस्कॉन मंदिर बांसमंडी में आयोजित कार्यक्रम में आज रंगोली प्रतियोगिता हुईं, जिसमें बच्चों ने जीवन व प्रकृति पर चित्र उकेरा। इससे पहले मेहंदी प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग, कलश सज्जा, कविता व डांस प्रतियोगिताएं हुईं, जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में समिति का साथ कई सामाजिक संस्थाएं भी दे रही हैं, जिनमें से अग्रहरी वैश्य समाज के अध्यक्ष जगदीश अग्रहरी की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही वन इंडिया फैमिली मार्ट, राइजिंग हैंड, डायमंड ग्रुप आदि का विशेष सहयोग है। इसके अलावा नवोत्सव कार्यक्रम में संस्था की उपाध्यक्ष प्रिया बजाज, दिव्यदर्शिनी, संध्या, शुभम, आकाश, भानू भी अपना सहयोग देने में जुटे हुए हैं।

लखीमपुर के तिकुनिया में बनेगा शहीद स्थल : राकेश टिकैत

लखनऊ। लखीमपुर खीरी में तिकुनिया बवाल में मारे गए किसानों की याद में वहां पर शहीद स्थल बनाया जाएगा और उनकी अस्थियां पूरे देश में विसर्जित की जाएंगी। इसकी घोषणा संयुक्त किसान मोर्चा के मंच से की गई। कार्यक्रम के दौरान मंच को संबोधित कर रहे राकेश टिकैत ने बताया कि दिल्ली के शिरोमणि सिख गुरुद्वारा कमेटी के लोग भी अंतिम अरदास में शामिल होने पहुंचे हैं। उन लोगों ने कहा है कि वे तिकुनिया में जमीन खरीदकर इन सभी मृत किसानों की याद में शहीद स्थल बनाएंगे। उन्होंने बताया कि शहीदों की अस्थियां पूरे देश की पवित्र नदियों में विसर्जित की जाएंगी। चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान अब तक करीब 750 किसान शहीद हो चुके हैं। तिकुनिया के शहीद किसानों के नाम भी उसी सूची में शामिल किए जाएंगे ताकि आने वाली पीढ़ी उनकी शहादत पर गर्व कर सके। कार्यक्रम स्थल पर सैकड़ों अस्थि कलश भी मौजूद थे। बताया गया कि कार्यक्रम में शामिल होने आए लोग शहीद किसानों के अस्थि कलश अपने साथ लेकर जाएं और उन्हें पूरे देश की पवित्र नदियों में विसर्जित करें। अगर कुुछ स्थानों से किसान नहीं आए हैं तो मोर्चा निर्णय लेकर उन जिलों में विसर्जन कराएगा। राकेश टिकैत ने कहा कि लखीमपुर सहित कृषि कानूनों को वापस करने की मांग को लेकर 26 अक्टूबर को महापंचायत होगी।

Next Story
Share it