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अमरोहा में कंटेनर पलटने से छह लोगों की मौत

अमरोहा में कंटेनर पलटने से छह लोगों की मौत

  • 15 से अधिक लोग घायल, अस्पताल में भर्ती
4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। मुरादाबाद जिले से अलग होकर अस्तित्व में आए अमरोहा में आज सुबह बड़ा हादसा हो गया। जिले में तेज रफ्तार से जा रहा कंटेनर टायर पंचर होने से पलट गया। इससे इसके नीचे दबने से छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि 15 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार अमरोहा में नेशनल हाईवे पर सुबह 8:30 बजे गजरौला में मोहम्मदाबाद की पुलिया के पास जयपुर से पशु लेकर आ रहा एक कंटेनर गांव ढकिया चमन जा रहा था। उसमें 25 पशु लदे हुए थे और 20 से अधिक लोग सवार थे। यह कंटेनर जैसे ही हाईवे पर बृजघाट चौकी से निकलने के बाद गांव मोहम्दाबाद के पास पहुंचा तो अगले टायर में पंचर हो गया। इसके बाद कंटेनर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गया। मौके पर अफरातफरी मच गई। ग्रामीणों ने वाहन में फंसे लोगों को निकाला। इस बीच पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से तेजी के साथ वाहन में फंसे घायल और शवों को बाहर निकाला। पुलिस के अनुसार अकरम पुत्र असलम निवासी गांव सहसपुर अली कोतवाली डिडौली। मोहम्मद हसन पुत्र मोहम्मद इस्माइल निवासी गांव ओवरी थाना असमोली जिला संभल। सानु पुत्र लठ्न निवासी गांव ओवरी थाना असमोली जिला संभल। नाजिम पुत्र अख्तर निवासी गांव ओवरी थाना असमोली जिला संभल। हरि सिंह पुत्र हरि राज गांव महदपुर थाना सैदनगली। दुली चंद पुत्र मोहन गांव महदपुर थाना सैदनगली की मौत हुई है। वहीं 15 से अधिक लोग घायल है। इसके अलावा कंटेनर में लदे 15 से अधिक पशुओं की भी मौत हो चुकी है।


जनेश्वर मिश्रा पार्क: साल के पहले ही दिन टिकट बेचने के नाम पर एलडीए मेें लाखों का घोटाला
  • पुलिस का मानना कि लाखों लोग आये थे साल के पहले दिन
  • एलडीए कह रहा सिर्फ तीस हजार ही टिकट बिके
  • बड़ा सवाल फिर यह लाखों लोगों के पैसे किसकी जेब में गए
  • पार्क की हालत खराब पर एलडीए लगा घोटाला करने में
सत्य प्रकाश. लखनऊ। साल 2021 के पहले ही दिन एलडीए के कर्मचारियों ने जनेश्वर मिश्रा पार्क के टिकटों में धांधली कर डाली। एलडीए कार्यालय में साल के पहले दिन जनेश्वर मिश्रा पार्क में मौजूद भीड़ और कम टिकट बिकने का दावा चर्चा का विषय बना हुआ है। टिकट काउंटर पर तैनात गुरुबक्श के मुताबिक़ कुल तीस हजार टिकट बिके हैं। जबकि 4पीएम के सवाल पर प्रभारी एई संजीव गुप्ता ने टिकट बिक्री पर चुप्पी साध ली। मामला फंसता देख अधीनस्थ को फोन कर कुल 31200 टिकट बेचे जाने का दावा कर डाला। यही नहीं, जनेश्वर मिश्रा पार्क में गेटों के बाहर लोग दस का टिकट पचास रुपए का बेचते नजर आए। साल के पहले दिन एकाएक एशिया के सबसे बड़े पार्क में पहुंची लाखों की भीड़ ने पुलिस के पसीने तक छुड़ा दिए। पैर रखने की जगह भी नहीं थी। भीड़ को संभालने के लिए मोर्चा खुद एडिशनल एसपी रैंक अधिकारी को संभालना पड़ा।
दरअसल, न्यू ईयर पर गोमतीनगर विस्तार स्थित जनेश्वर मिश्रा पार्क में घूमने राजधानी के बाशिंदों का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके पर तैनात पुलिस बल की माने तो भीड़ की संख्या लाखों में थी। चारों काउंटरों पर भारी भीड़ थी। वहीं एलडीए के कर्मचारियों का दावा है कि मात्र तीस हजार लोगों ने ही टिकट खरीदा। सभी के अलग-अलग बयान संदेह पैदा कर देने वाले हैं। ऐसे में टिकट के नाम पर एक बड़ी धांधली होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं पार्क के प्रभारी एई संजीव गुप्ता को यह तक जानकारी नहीं थी कि पहले दिन कितने की आमदनी हुई। संजीव गुप्ता ने बताया कि पार्क में टिकटिंग व्यवस्था ठेके पर उत्तम ट्रेडर्स को दी गई थी। ठेका लेने वाली कंपनी सालाना 80 लाख रुपये एलडीए को देती थी। लॉकडाउन के कारण कमाई बंद हो जाने के कारण कम्पनी ठेका छोड़कर चली गई। इसके बाद से एलडीए ही टिकटिंग की व्यवस्था देख रहा है।
10 का टिकट 50 रुपए में ब्लैक में भी बेचा गया
जनेश्वर मिश्रा पार्क में टहलने आईर् अनन्या मिश्रा ने बताया कि काउंटर पर भारी भीड़ के चलते हमने गेट पर ही दस का टिकट ब्लैक में पचास रुपए में खरीदा जबकि वह 100 रुपए मांग रहा था। यही नहीं, इंदिरानगर से आकाश वर्मा, सत्येंद्र तिवारी, राहुल विश्वकर्मा ने भी पार्क में जाने के लिए ब्लैक में टिकट खरीदा।
भीड़ संभालने के लिए एडीसीपी ने संभाला मोर्चा
पार्क में साल के पहले दिन लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों के पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। सारी सड़कें वाहनों से पटी हुई थी। दोपहिया पार्किंग भी पूरी तरह भर गई थी। चारों ओर जाम ही जाम था। लोगों की बढ़ती भीड़ की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय थाने की पुलिस सहित एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी मौके पर पहुंच गए। घंटो मशक्कत के बाद जाम खुलवाया जा सका।

बलिया के सीएमओ जितेंद्र पाल की कोरोना से मौत

4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। बलिया के सीएमओ डॉ. जितेंद्र पाल ने आज तड़के लखनऊ पीजीआई में अंतिम सांसें लीं। सीएमओ डॉ. जितेंद्र पाल कोरोना पॉजिटिव थे। उनके निधन की सूचना से डॉक्टरों में शोक की लहर दौड़ गई। कोरोना की तमाम व्यवस्थाओं की कमान संभालने वाले मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. जितेंद्र पाल 27 दिसंबर को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इस बात की जानकारी होते ही विभाग में खलबली मच गई। कोरोना रिपोर्ट आने के बाद उनका बलिया में ही उपचार चल रहा था लेकिन 29 दिसम्बर को ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर सांस लेने में तकलीफ के चलते पीजीआई के राजधानी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें कोरोना के साथ अन्य बीमारियां भी थी। फेफड़े में संक्रमण अधिक होने की वजह से उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया था। पीजीआई में डॉक्टरों की निगरानी इलाज चला रहा था पर देर रात अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। कुछ देर बाद उनका निधन हो गया। वह पैरा ए-1 जीएसवीएम कानपुर के मेडिको थे। डॉ. जितेंद्र पाल उप्र. पीएमएचएस के पहले वर्तमान सीएमओ थे।

भाजपा काल में निर्माण हो या कृषि कानून सभी जानलेवा

  • यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का आरोप
4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा भाजपा के शासनकाल में हुए निर्माण हों या तीनों नए कृषि कानून सभी जानलेवा हैं। गाजियाबाद में श्मशान में नवनिर्मित छत की भेंट चढ़ गए 25 लोगों के निधन पर शोक प्रकट करते हुए नेता प्रतिपक्ष चौधरी ने कहा कि भाजपा के नेता केवल जुमले बाजी और नफरत की आग को हवा देना जानते हैं। सत्ता में आने से पहले इसी के बल पर ये लोग लोगों को भरमाकर धन का दुरुपयोग करते रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि देश और प्रदेश के लोगों की जान बचाने के लिए जरूरी है कि इन लोगों के पुराने कारनामों की व्यापक जांच हो, खास तौर से भीड़, हत्या और नरसंहार जैसे मामलों की। उन्होंने कहा कि ये जांच परिणाम आने के साथ ही निर्माण के नाम पर मौत देने वाली इस सरकार के अगुआ और अम्बानी अडानी को खेती बारी और किसानी सौंपने वाले कृषि कानूनों के अगुआ वहां होंगे, जहां कानून से खेलने वाले को होना चाहिए। रामगोविंद चौधरी ने कहा है कि गाजियाबाद के श्मशान गृह में घटिया निर्माण में 25 लोगों की मौत की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री स्वयं ग्रहण करें और इसकी जांच तक अपने को अपने अपने पदों से विरत रखे। इसी प्रकार कृषि कानून को लेकर यूपी के कश्मीरा सिंह समेत 50 किसानों की शहादत की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री स्वयं ग्रहण कर अपने अपने पद से विरत होने की घोषणा करें।

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