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अखिलेश के ऐलान से सरकार में हड़कंप, आनन-फानन में सीओ और इंस्पेक्टर सस्पेंड

अखिलेश के ऐलान से सरकार में हड़कंप, आनन-फानन में सीओ और इंस्पेक्टर सस्पेंड

  • सपा प्रत्याशी की प्रस्तावक की साड़ी खींचने का मामला गरमाया
  • सपा प्रमुख बोले, जिसकी खींची गई साड़ी उसके सम्मान की लड़ाई लड़ेगी सपा
  • भाजपा पर लगाया ब्लॉक प्रमुख चुनाव में खुलेआम गुंडागर्दी करने का आरोप
  • आंखों पर पट्टी बांधकर किया जा रहा लोकतंत्र का चीरहरण, चुनाव जीतने के लिए हिंसा का सहारा

4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ। जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव के बाद अब ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भीषण हिंसा से सपा प्रमुख अखिलेश यादव आगबबूला हो गए हैं। उन्होंने कल लखीमपुर खीरी में सपा प्रत्याशी की प्रस्तावक महिला की साड़ी खींचने को लेकर योगी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। साथ ही ऐलान किया कि जिस महिला की साड़ी खींची गई है, सपा उसके सम्मान की लड़ाई लड़ेगी। सपा प्रमुख के इस ऐलान के बाद सरकार में हड़कंप मच गया है। लिहाजा आनन-फानन में न केवल आरोपी को गिरफ्तार किया गया बल्कि सीओ और इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव का पारा तबसातवें आसमान पर पहुंच गया जब लखीमपुर खीरी के पसगवां ब्लॉक में सपा प्रत्याशी रितु सिंह का नामांकन भाजपाइयों ने नहीं होने दिया। यही नहीं उन्होंने ब्लॉक में दाखिल हो रहीं प्रत्याशी की प्रस्तावक अनीता को सड़क से खींच लिया। उनके साथ मारपीट की और उनकी साड़ी खींच ली। अखिलेश ने इस घटना का वीडियो ट्वीट करते हुए कहा है कि चुनाव जीतने के लिए भाजपा नारी का अपमान करने पर तुली हुई है। भाजपा गुंडों को आजादी दे रही है। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि आखिर गुंडई करने वाले कौन लोग हैं? उन्होंने कहा कि हम उन सभी अधिकारियों को चिन्हित कर रहे हैं, जो हिंसा में शामिल हैं। उचित समय आने पर उन सभी पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग सरेआम लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को भाजपा ने बंधक बना लिया है। ब्लॉक प्रमुख चुनाव में नामांकन के दौरान भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं द्वारा अराजकता और हिंसा किया जाना लोकतंत्र का उपहास है। पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बन तमाशा देख रहा है। वहीं इस मामले पर घेरे जाने के बाद प्रदेश सरकार ने इलाके के सीओ और थाना इंचार्ज को सस्पेंड करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के 825 ब्लॉक प्रमुखों के लिए 10 जुलाई को वोटिंग होगी। 10 जुलाई को ही रात तक सारे नतीजे घोषित हो जाएंगे।

भाजपा सांसद रेखा वर्मा का करीबी निकला आरोपी

एडीजी प्रशांत कुमार के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर के बाद मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी यश वर्मा भाजपा का जिलाध्यक्ष होने के साथ ही भाजपा सांसद रेखा वर्मा का करीबी भी बताया जा रहा है। इस पर ब्लॉक प्रमुख के नामांकन के दौरान लखीमपुर में महिला की साड़ी खींचने का आरोप है।

यहां भी हुई भीषण हिंसा

लखीमपुर खीरी के अलावा यूपी के सीतापुर, अंबेडकरनगर, मऊ, जौनपुर और फतेहपुर जिलों में भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं के बीच जमकर संग्राम हुआ। सीतापुर में तो कई राउंड फायरिंग हुई और हथगोले चले। फतेहपुर में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। लखीमपुर खीरी में सपा प्रत्याशी की प्रस्ताव के साथ बदसलूकी हुई। अधिकांश जिलों में बवाल के बाद ही नामांकन हो पाया।



क्या चुनाव आयोग नाम की संस्था समाप्त हो चुकी है? लखीमपुर खीरी में ब्लॉक प्रमुख की प्रस्तावक के साथ खुलेआम गुंडागर्दी की गई। ब्लॉक प्रमुख का चुनाव रद्द हो।

संजय सिंह, सांसद, आप

कितनी जगह बमबाजी, गोलीबारी, पत्थरबाजी की, कितने लोगों का पर्चा लूटा, कितने पत्रकारों को पीटा। कितनी जगह महिलाओं से बदतमीजी की। कानून व्यवस्था की आंख पर पट्टी बांधकर लोकतंत्र का चीरहरण चल रहा है।

प्रियंका गांधी, महासचिव कांग्रेस

लोकतंत्र लोकलाज से चलता है। मर्यादा और कानून से संचालित होता है। एक महिला क्षेत्र पंचायत सदस्य का लखीमपुर खीरी में चीरहरण का सार्वजनिक सामूहिक प्रयास हुआ। ये लोकतंत्र की मर्यादा को कलंकित करता है। ये घनघोर अपमान है समाज का। ऐसे दुष्कृत्य करने वालों को सार्वजनिक सजा मिलनी चाहिए।

ब्रजेश मिश्रा, चीफ एडिटर भारत समाचार

विपक्ष की उम्मीदवार रितु सिंह की प्रस्तावक अनिता यादव को रोकने के लिए उनकी साड़ी तक खींचने से पीछे नहीं हटे तथाकथित राष्ट्रवादी। इन दु:शासनों के दुस्साहस का परिणाम भी वही होगा जो स्वयं दु:शासन का हुआ था। तानाशाही और निर्लज्जता की सभी सीमाओं को तोड़ता उत्तरप्रदेश।

रोहिणी सिंह, वरिष्ठï पत्रकार

केवल बेटी बचाओ की बात हुई थी..मां बचाओ..बहन बचाओ..महिला बचाओ की कोई बात नहीं हुई थी..ये लखीमपुर खीरी है..और अनिता यादव सपा की ब्लॉक प्रमुख उम्मीदवार रितु सिंह की प्रस्तावक हैं..उनका चीरहरण करते चाल चरित्र चेहरे वाले लोग हैं..ये निंदनीय है..शर्मनाक है..पुरुष जाति पर कलंक हैं।

प्रज्ञा मिश्रा, पत्रकार

एक पल के लिए कल्पना कीजिए कि यदि यही घटना ममता बनर्जी शासित पश्चिम बंगाल में हुई होती तो मीडिया सरकार को कठघरे में खड़ा कर देती लेकिन यूपी और योगी के शासन में मीडिया 'म्यूट मोडÓ में चली गई है।

स्वाती चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा जी दोनों को इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए। यूपी के नए डीजीपी अभी भी गुलदस्ते स्वीकार करने में व्यस्त हो सकते हैं।

कंचन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार

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