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अजीत सिंह के शूटर के इलाज के तार जुड़े बाहुबली पूर्व सांसद से

अजीत सिंह के शूटर के इलाज के तार जुड़े बाहुबली पूर्व सांसद से

  • मुख्तार अंसारी के करीबी माफिया अजीत सिंह की लखनऊ में कर दी गई थी सरेआम हत्या
  • पुलिस शूटरों के बहुत करीब पहुंची, घायल शूटर को डॉक्टर के पास ले जाने वाले विपुल की तलाश
  • अलकनंदा के एक फ्लैट में ढाई घंटे तक चला था इलाज, विपुल लेकर पहुंचा था डॉक्टर के पास
  • तबीयत बिगड़ने पर सुल्तानपुर ले जाया गया था घायल शूटर
  • अजीत सिंह की महिला मित्र के जरिए शूटर कर रहे थे ट्रेस, राप्ती अपार्टमेंट से किया था पीछा
4पीएम न्यूज नेटवर्क. लखनऊ।
राजधानी लखनऊ में हुए गैंगवार में अब शक की सुई बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर टिक गयी है। पुलिस का मानना है कि इस गैंगवार में जिस शूटर को गोली लगी उसके इलाज के लिये पूर्व सांसद ने फोन किया था। यही फोन कॉल अब उनके गले की हड्डी बन गयी है। पुलिस ने उनके कई गुर्गों को उठा लिया है। पुलिस ने इस शूट आउट को चुनौती की तरह लिया है और इसके शूटरों को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है।
दरअसल, लखनऊ में जिस तरह दिनदहाड़े मुख्तार अंसारी के करीबी अजीत सिंह की हत्या हुई उसने पुलिस की बहुत किरकिरी करा दी। सीएम और डीजीपी ने इस पर बहुत नाराजगी जतायी थी। इसके बाद पुलिस ने इस कांड के शूटरों को पकड़ने के लिये दिन रात एक कर दिया। पुलिस को जानकारी मिली कि शूटरों की मदद करने वाला प्रदीप कबूतरा के भाई धनंजय सिंह के शारदा अपार्टमेंट के फ्लैट में रहते थे। हालांकि प्रदीप के भाई इस प्लैट में एक साल से अधिक समय से रह रहे थे और वे एक विद्यालय के प्रबंधक हैं। यही पर एक लाख का इनामी गिरधारी आता था। इन लोगों ने इसी के पास राप्ती में रह रही अजीत सिंह की महिला मित्र को ट्रेस करना शुरू किया। घटना के दिन शूटर यही से अजीत सिंह के पीछे लगे थे। पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक जब एक शूटर को गोली लगी तो विपुल ने पहले लखनऊ के चिकित्सक निखिल को फोन किया। अलकनन्दा के एक फ्लैट में ढाई घंटे उसका इलाज किया गया। पूर्व सांसद का करीबी विपुल सिंह इस डॉक्टर के यहां शूटर को लेकर पहुंचा था। विपुल को उस दिन धनंजय सिंह ने कई व्हाट्सएप कॉल की थी। बाद में तबीयत बिगड़ने पर विपुल ही उसको लेकर सुल्तानपुर पहुंचा और डॉक्टर एके सिंह के क्लीनिक पर सारी व्यवस्था मौजूद थी। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस धनंजय सिंह को घेरने की रणनीति बनाने में जुट गयी है। देखना यह है कि पुलिस इन शूटरों को गिरफ्तार कर धनंजय सिंह की भूमिका साबित कर पायेगी या नहीं। यह केस खोलना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है।



दिल्ली से यूपी तक बर्ड फ्लू की दस्तक से मचा हड़कंप

  • देश के नौ राज्यों में पुष्टिï हाई अलर्ट पर राज्य सरकारें
4पीएम न्यूज नेटवर्क. नई दिल्ली। कोरोना काल के बीच अब बर्ड फ्लू का संकट गहराता जा रहा है। दिल्ली समेत देश के नौ राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि से हड़कंप मच गया है। केंद्र सरकार के मुताबिक नौ राज्यों में बर्ड फ्लू फैलने की पुष्टि हो गई है। केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली बर्ड फ्लू फैलने की पुष्टि हो गई है। इसे लेकर राज्य सरकारें अलर्ट हो गई हैं। यूपी में बर्ड फ्लू की एंट्री कानपुर से हुई, जहां चिड़ियाघर में चार मरे पक्षियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके बाद चिड़ियाघर को सील कर दिया गया है। कानपुर चिड़ियाघर में दो दिनों में 10 पक्षी मरे मिले। अब उस बाड़े के सभी पक्षियों को मारने के आदेश दिए गए हैं। लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान को भी अलर्ट पर रखा गया है। यहां पक्षियों के बाड़े को सेनेटाइज किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर, मंदसौर, आगर-मालवा, नीमच, देवास, उज्जैन, खांडवा, खरगौन और गुना में वायरस की पुष्टिï हुई है। राजस्थान के 11 जिले बर्ड फ्लू की चपेट में है। इनमें सवाई माधोपुर, पाली, दौसा और जैसलमेर भी शामिल है। सवाई माधोपुर में मरे कौओं में बर्ड फ्लू का एच 5 स्ट्रेन मिला है। दिल्ली में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। जालंधर भेजे गए आठ पक्षियों के सैम्पल पॉजिटिव मिले हैं। दिल्ली की संजय झील में 17 और बत्तखें मृत पाई गईं जिसके बाद अधिकारियों ने इलाके को 'अलर्ट क्षेत्रÓ घोषित कर दिया। एक दिन पहले ही यहां पर 10 बत्तखें मृत मिली थीं जिसके बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने इसे बंद कर दिया था। मृत बत्तखों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। एनआईएचएसएडी की परीक्षण रिपोर्ट से पुष्टि होती है कि महाराष्टï्र के मुंबई, ठाणे, परभणी, बीड, और रत्नागिरी के दापोली में पक्षियों की मौत बर्ड फ्लू के कारण हुई।

किसान आंदोलन पर सरकार के रुख से सुप्रीम कोर्ट नाराज, पूछा- कृषि कानूनों पर आप रोक लगाएंगे या हम लगाएं

  • सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने की सुनवाई
4पीएम न्यूज नेटवर्क. नई दिल्ली। कृषि कानूनों पर करीब सवा महीने से अधिक समय से सड़कों पर घमासान जारी है। किसान आंदोलन और कृषि कानूनों की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि जिस तरह से प्रक्रिया चल रही है, हम उससे निराश हैं। कोर्ट ने पूछा कि आप इन कानूनों पर रोक लगाएं वरना हमें लगाना होगा। कृषि कानूनों की वैधता को एक किसान संगठन और वकील एमएल शर्मा ने चुनौती दी है।
शर्मा ने याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार को कृषि से संबंधित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है। कृषि और भूमि राज्यों का विषय है और संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 2 (राज्य सूची) में इसे एंट्री 14 से 18 में दर्शाया गया है इसलिए इस कानून को निरस्त किया जाए। शीर्ष अदालत ने कृषि कानूनों को लेकर समिति की आवश्यकता को दोहराया और कहा कि अगर समिति ने सुझाव दिया तो वह इस कानून के लागू होने पर रोक लगा देगी। कोर्ट ने कहा कि वह चाहता था कि बातचीत से हल निकले लेकिन कृषि कानूनों पर रोक लगाने को लेकर केन्द्र की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हम फिलहाल इन कानूनों को निरस्त करने की बात नहीं कर रहे हैं। अगर कुछ गलत हुआ तो हममें से हर एक जिम्मेदार होगा। हम किसानों को प्रदर्शन से नहीं रोक सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने यह सुनवाई की। वकील हरीश साल्वे ने कहा कि कानून के विवादित हिस्सों पर रोक लगाइए लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि नहीं हम पूरे कानून पर रोक लगाएंगे।

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