अब आपकी पीएफ की कमाई भी आई टैक्स के दायरे में

अब आपकी पीएफ की कमाई भी आई टैक्स के दायरे में


नई दिल्ली। अब आपके पीएफ में 2 अकाउंट होंगे। एक खाते में वह राशि होगी जो कर योग्य नहीं होगी, दूसरा खाता वह होगा जो कर योग्य होगा। हालांकि खाते में ढाई लाख रुपये से अधिक जमा होने पर ही टैक्स वसूला जाएगा। आयकर विभाग के नए नियमों के मुताबिक सरकार टैक्स वाले खाते पर कमाए गए ब्याज पर टैक्स वसूलेगी। नए नियम वित्तीय वर्ष 2021-22 से ही लागू होंगे। इस नियम का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो एक साल में 40-50 लाख रुपये या उससे अधिक कमाते हैं। साथ ही वे लोग भी अपने रिटायरमेंट को ध्यान में रखते हुए पीएफ अकाउंट में अतिरिक्त पैसा जमा कर सकते हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक क्लीयरटैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता ने बताया, नए नियम के अनुसार पीएफ खाताधारकों के पास दो खाते होंगे। इसका मकसद यह है कि मौजूदा रकम पर कोई टैक्स न लग जाए। इसके अलावा मौजूदा फाइनैंशल अगर साल से किसी व्यक्ति के पीएफ अकाउंट में जमा रकम ढाई लाख रुपये से अधिक है तो उसे दूसरे अकाउंट के जरिए टैक्स वसूला जाएगा। हालांकि इस राशि की गणना कर्मचारी द्वारा जमा की गई राशि पर ही की जाएगी। अर्जित ब्याज को कमाई माना जाएगा जिसके बाद आयकर स्लैब के आधार पर आयकर वसूला जाएगा।
इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि मान लीजिए कि अब आपके पीएफ अकाउंट में 5 लाख रुपये जमा हैं। इसलिए नए नियम के तहत 31 मार्च 2021 तक जमा की गई राशि को बिना टैक्स के खाते में रखा जाएगा। इस पर कोई टैक्स देनदारी नहीं होगी।
लेकिन अगर चालू वित्त वर्ष में आपका पीएफ जमा 2.50 लाख रुपये से अधिक हो जाता है। इसलिए अतिरिक्त राशि और अर्जित ब्याज कर के दायरे में आ जाएगा। इसके अलावा सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये होगी। साथ ही जिन कर्मचारियों का अंशदान पीएफ खाते में नियोक्ता के माध्यम से नहीं किया जा रहा है, उनके लिए भी 5 लाख रुपये की सीमा होगी।
इस समय देश में 6 करोड़ पीएफ खाताधारक हैं। इसमें से करीब 93 फीसद लोग नए नियम के दायरे में नहीं आएंगे। तो कौन प्रभावित होगा? इस सवाल पर अर्चित कहते हैं, देखिए, अगर नियमों के आधार पर गणना की जाए तो सालाना कम से कम 40-50 लाख रुपये कमाने वाले लोग नए नियम के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि कई लोग ऐसे भी हैं जिनके पीएफ अकाउंट में एक्स्ट्रा रकम होती है। इनमें से ज्यादातर लोग 40-50 साल या उससे ज्यादा आयु वर्ग के हैं। वे रिटायरमेंट को ध्यान में रखकर अतिरिक्त राशि जमा करते हैं। इस मामले में उन पर टैक्स लगाया जा सकता है।
अर्चित के मुताबिक अब तक यह परंपरा रही है कि वित्त वर्ष खत्म होने के बाद पीएफ पर ब्याज का भुगतान किया जाता है। ऐसी स्थिति में स्थिति स्पष्ट नहीं है कि वह राशि कर गणना का आधार क्यों बनेगी। क्योंकि नए नियम को देखते हुए टैक्स की गणना पहले से की जानी चाहिए। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर देगी। इसी तरह पीएफ अकाउंट खोलने के बाद अगर कोई व्यक्ति 5 साल से पहले पैसे निकाल लेता है तो उस पर टीडीएस कटौती का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में, इस संबंध में भी कई अनुपालन पूरे करने होंगे। जिस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।


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