कुंडली में ग्रहों की स्थिति कमजोर है तो ज्योतिषीय उपाय ही नहीं योग भी है मददगार

कुंडली में ग्रहों की स्थिति कमजोर है तो ज्योतिषीय उपाय ही नहीं योग भी है मददगार


नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2021के मौके पर जानिए ऐसे योगासनोंके बारे में जिनका संबंध नवग्रहों से माना जाता है। इन्हें करके आप अपनी कुंडली में कमजोर ग्रह की स्थिति को मजबूत बनाकर परिस्थितियों को अपने लिए अनुकूल बना सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे जीवन में जो भी परेशानियां या खुशी आती है, वह कुंडली में कहीं न कहीं ग्रहों की स्थिति के कारण होती है। अर्थात ग्रहों की प्रबल स्थिति हमारे जीवन को आनंदित बनाती है और कमजोर स्थिति जीवन में सभी परेशानियां पैदा करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि योग आसनों के जरिए भी ग्रहों को मजबूत किया जा सकता है। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2021 के मौके पर जानिए ऐसे ही 9 योगासनों के बारे में जिन्हें नवग्रहों से संबंधित माना जाता है। इन्हें करके आप अपनी कुंडली में कमजोर ग्रह की स्थिति को मजबूत बनाकर परिस्थितियों को अपने लिए अनुकूल बना सकते हैं।
सूर्य के कुप्रभावोंसे बचने और उसे मजबूत करने के लिए प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करना चाहिए। सूर्य नमस्कार करने से शरीर के लगभग हर अंग का व्यायाम हो जाता है। इससे आपकी कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, जिसके कारण समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है और आपका वर्चस्व बढ़ता है। इसके अलावा आपका शरीर भी फिट रहता है। यदि आपका चंद्रमा कमजोर स्थिति में है तो लोगों की मानसिक स्थिति तनावपूर्ण है। मूड स्विंग की समस्या होती है, सर्दी, फ्लू और सांस की समस्या होती है और व्यक्ति भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है। चंद्रमा को मजबूत बनाने के लिए भंत्रिका प्राणायाम नियमित रूप से करें। ओम का जाप भी करें।
मंगल की कमजोर स्थिति विवाहित जीवन में समस्याएं पैदा करती है। इससे आपसी संघर्ष की स्थितियां बनती हैं। व्यक्ति बहुत क्रोधित हो जाता है। कुंडली में मंगल के नकारात्मक प्रभावों को खत्म करने के लिए किसी को भी पद्मासना में बैठकर योग करना चाहिए। इसके अलावा तितली और मयूरासन किया जाना चाहिए। बुध की कमजोर स्थिति बौद्धिक क्षमता को प्रभावित करती है। इससे व्यक्ति की जजमेंट क्षमता कमजोर हो जाती है, साथ ही चर्म रोग होने का खतरा भी रहता है। बुध के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए भंत्रिका प्राणायाम, बालसाना, उत्तासन और शीर्ष आसन करना चाहिए।
अगर आपको करियर में सफलता नहीं मिल रही है या शादी में देरी हो रही है तो यह आपकी कुंडली में बृहस्पति की कमजोर स्थिति के कारण भी हो सकता है। बृहस्पति की वजह से ही मोटापा, डायबिटीज, लिवर और पेट की समस्या परेशानी होती है। बृहस्पति के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए सूर्य नमस्कार, कपाल भाती और सर्वांगासन आदि करना चाहिए। जिस व्यक्ति का शुक्र कमजोर हो, उसे जीवन में यौन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस कारण गर्भावस्था में परेशानी तो होती ही है, साथ ही भौतिक सुखों में भी कमी आती है। इन स्थितियों से निपटने के लिए धनुरासन, हलसाना, भुजंगासना, गरुड़साना, सेतुबंधा और त्रिबंध और मूलाबंध प्राणायाम करना चाहिए।
शनि अक्सर हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं का कारण होता है। इसके अलावा जब शनि की स्थिति कमजोर होती है तो मानसिक तनाव, अवसाद, चिड़चिड़ापन उत्पन्न होता है। कई बार कोई व्यक्ति झूठे मामलों में फंस भी सकता है। शनि के कुप्रभावों को कम करने के लिए भ्रामरी, कपालभाति और मंडुक आसन करना लाभकारी होता है। आठवां ग्रह राहु है। राहु व्यक्ति के मन को प्रभावित करता है और उसे भ्रमित करता है, उसे सही निर्णय लेने से रोकता है। बेवजह डर बढ़ता है। राहु के कुप्रभाव से बचने के लिए किसी को भी भ्रामरी प्राणायाम करना चाहिए और ओम का जाप करना चाहिए। केतु के कारण पेट की समस्या और त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं। केतु के प्रभाव के कारण त्वचा काली पड़ जाती है। इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए शीर्षासन और कपालभाति करना लाभकारी होता है।


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