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मुसीबत का नया नाम है सेक्सटॉर्शन

मुसीबत का नया नाम है सेक्सटॉर्शन


नई दिल्ली। ऑनलाइन हनी ट्रैपिंग रैकेट अब सेक्सटॉर्शन घोटाला बन गया है। जिसमें महिलाएं न्यूड होकर पुरुषों को वीडियो कॉल करती हैं और इस सीन को कैप्चर करने और पुरुषों को वापस भेजने के बाद उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है। गुजरात में इन दिनों हर दिन सेक्सटॉर्शन के करीब दस मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें 12 साल के बच्चों से लेकर 80 साल तक के बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। ताजा मामला एक पूर्व मंत्री से जुड़ा है। जिन्हें ब्लैकमेल कर ढाई लाख रुपये की मांग की गई। पूर्व मंत्री, एक वयोवृद्ध राजनेता सेक्सटॉर्शन घोटाले के शिकार हो गए । अक्टूबर 2020 में उसे एक युवती से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। उन्होंने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। लडक़ी ने सोशल मीडिया पर खुद को दिल्ली-गुडग़ांव में काम करने वाली 30 साल की प्रोफेशनल बताया।
पूर्व मंत्री और लडक़ी सोशल प्लेटफॉर्म पर बात करने लगे और दोनों ने नंबरों का आदान-प्रदान किया। इसके बाद दोनों मोबाइल पर बात करने लगे। दोनों वाट्सएप पर चैटिंग भी करने लगे। लडक़ी ने पूर्व मंत्री को फोन किया और पूछा कि क्या वह घर पर अकेले है? जब मंत्री ने बताया कि वह घर पर अकेले हैं तो लडक़ी ने कहा कि वह उनके लिए सरप्राइज है। कॉल डिस्कनेक्ट करने के बाद उसने वीडियो कॉल कर दिया।
वीडियो कॉल में लडक़ी न्यूड थी । तीन मिनट का कॉल खत्म होते ही पूर्व मंत्री को एक मैसेज मिला। यह मैसेज उनकी न्यूड वीडियो चैट से था। लडक़ी ने पूर्व मंत्री से ढाई लाख रुपये मांगे और कहा कि अगर वह पैसे नहीं देगी तो वह इस चैट को सार्वजनिक कर देगी।
पूर्व मंत्री ने पुलिस विभाग में अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। पुलिस के आला अधिकारी उनके बचाव में आए और ब्लैकमेल करने वालों के खातों को निष्क्रिय कर दिया गया। समाज के डर के कारण मंत्री ने शिकायत नहीं की। मामले का निपटारा चुपके से कर दिया गया।
इस तरह के सेक्सटॉर्शन के शिकार लोग समाज में बदनामी के डर से ब्लैकमेलकरने वालों को पैसे दे रहे हैं। एक 80 वर्षीय कृषि सहकारी नेता भी इस तरह के घोटालों में शामिल रहा है और ब्लैकमेलर्स को तीन बार पैसे दिए।
पुलिस ने कहा कि चूंकि अश्लील वीडियो पीडि़तों को सामाजिक कलंक और उपहास की चपेट में लेते हैं, इसलिए कई पुरुष पुलिस की मदद लेने के बजाय भुगतान करते हैं । पुलिस ने कहा कि ज्यादातर हमारे पास आते हैं जब जबरन वसूली जारी रहती है और वे आगे भुगतान नहीं कर सकते । ज्यादातर अभी भी औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करना चाहते हैं ।


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