कैबिनेट विस्तार में मोदी ने दिया सुशासन बाबू को जोर का झटका

कैबिनेट विस्तार में मोदी ने दिया सुशासन बाबू को जोर का झटका


नई दिल्ली| केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार में बिहार की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड को बड़ा झटका लगा है। असल में जदयू की तरफ से कैबिनेट में चार मंत्रियों के पद मांगे जा रहे थे। लेकिन बीजेपी ने केवल एक ही कैबिनेट का पद देकर जदयू को निपटा दिया। असल में कैबिनेट विस्तार में मंत्री बनाकर नीतीश कुमार लोजपा में दो फाड़ कराने वाले ललन सिंह को भी मंत्री बनाना चाहते थे। लेकिन एक ही पद मिलने के कारण उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
राज्य में चर्चा है कि जदयू में नंबर दो नेता माने जाने वाले आरसीपी सिंह को अभी तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बधाई नहीं दी है। क्योंकि नीतीश कुमार नाराज है। माना जा रहा है कि कैबिनेट में पदों को लेकर नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को अधिकृत किया था और उनको साफ बता दिया गया था कि पार्टी को ज्यादा मंत्रियों के पद चाहिए। लेकिन आरसीपी सिंह सिर्फ एक पद के लिए तैयार हो गए। लिहाजा कहा जा रहा है कि आरसीपी खुद को मंत्री का मिलता पद देखकर बीजेपी से डील नहीं कर सके। जिसको लेकर नीतीश कुमार नाराज हैं। इसके पीछे एक और कारण बताया जा रहा है। इसके तहत ललन सिंह का जनता दल यूनाइटेड में कद बढ़ रहा है, जो आरसीपी सिंह के लिए खतरा माना जा रहा है। लिहाजा ललन सिंह को झटका देने के लिए आरसीपी सिंह ने बीजेपी पर मंत्रियों के कोटे के लिए दबाव नहीं बनाया।
असल में बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड को पिछले विधानसभा में चुनाव में नुकसान पहुंचाने वाले चिराग पासवान की पार्टी में फूट डालने और दो गुट बनाने के लिए नीतीश कुमार पार्टी के सांसद ललन सिंह को भी मंत्री बनाना चाहते थे। लेकिन एक कैबिनेट मंत्री का पद मिलने के कारण ये संभव न हो सका। ललन सिंह ही वह नेता हैं जिन्होंने ऑपरेशन चिराग को अंजाम दिया था और चिराग पासवान की सियासी पावर को खत्म कर दिया था।
कहा जा रहा है कि पहले भाजपा पशुपति पारस को कैबिनेट में शामिल नहीं करना चाहती थी। क्योंकि वह ऊहापोह की स्थिति में थी। भाजपा चिराग पासवान को भी नाराज नहीं करना चाहती थी। लिहाजा नीतीश कुमार के कहने पर पशुपति पारस को मंत्री बनाया गया। ये भी चर्चा है कि नीतीश को अपनी पार्टी के कोटे से लोजपा के बागी गुट के नेता पारस को मंत्री बनाया। पहले भाजपा ने जदयू को दो कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पद देने पर अपनी सहमति दी। वहीं नीतीश पशुपति पारस को मंत्री बनाकर चिराग को अंतिम राजनीतिक झटका देना चाहते थे। लेकिन भाजपा लोजपा को अलग कोटा नहीं देना चाहती थी। लिहाजा नीतीश ने पारस को अपनी पार्टी के कोटे से मंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा।


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