अदालतों की सुरक्षा का सवाल और तंत्र

सवाल यह है कि क्या अपराधियों के मन से खाकी का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है? क्या अब अदालत परिसर भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं? बम और हथियारों के साथ अपराधी अदालत परिसर में पहुंचने में कैसे सफल हो रहे हैं? क्या पुलिस अपराधियों के सामने पूरी तरह पंगु हो चुकी है?

sanjay Sharma

प्रदेश की राजधानी लखनऊ के जिला सत्र न्यायालय में बदमाशों ने अधिवक्ता के ऊपर देसी बम से हमला किया। इस हमले में कुछ वकील जख्मी हुए। इसके पहले बिजनौर के सीजेएम कोर्ट में बदमाशों ने एक अभियुक्त की गोली मारकर हत्या कर दी थी। दोनों मामलों में जांच की जा रही है। सवाल यह है कि क्या अपराधियों के मन से खाकी का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है? क्या अब अदालत परिसर भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं? बम और हथियारों के साथ अपराधी अदालत परिसर में पहुंचने में कैसे सफल हो रहे हैं? क्या पुलिस अपराधियों के सामने पूरी तरह पंगु हो चुकी है? अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का कोई असर क्यों नहीं दिख रहा है? क्या सरकार को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं समझ आ रही है? क्या प्रदेश में कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?
प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हो चुके हैं। आए दिन हत्या, बलात्कार, लूट और डकैती की घटनाएं हो रही हैं। अपराधी वारदातों को अंजाम देकर आराम से फरार हो रहे हैं। स्थानीय खुफिया तंत्र भी इनका सुराग पाने में नाकाम साबित हो रहा है। यही नहीं ताबड़तोड़ एनकाउंटर और अपराध के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति भी बेअसर दिख रही है। इसमें दो राय नहीं है कि प्रदेश में बढ़ते अपराधों के लिए पुलिस की लचर कार्यप्रणाली और भ्रष्टïाचार जिम्मेदार हैं। अदालत परिसर में हो रही वारदातें यह बताने के लिए काफी हैं कि व्यवस्था में बड़ी खामी आ चुकी है और इसे तत्काल दूर नहीं किया गया तो परिणाम भयावह हो सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि लखनऊ के जिला सत्र न्यायालय में बदमाश देसी बम और हथियार लेकर कैसे पहुंच गए जबकि यहां मेटल डिटेक्टर लगे हुए हैं। हकीकत यह है कि अदालत परिसरों की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। पुलिस भी यहां सतर्क नहीं दिखती है। इसके अलावा अपराधियों के प्रति पुलिस का लापरवाहीपूर्ण रवैया भी कम जिम्मेदार नहीं है। अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस को पसीने छूट जाते हैं। यह स्थिति किसी भी प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। यदि सरकार प्रदेश में कानून व्यवस्था को बेहतर करना चाहती है तो उसे न केवल अदालतों बल्कि जनता की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। अदालत परिसरों में विशेष रूप से प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को नियुक्त करना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई अपराधी हथियारों के साथ परिसर में प्रवेश न कर सके।

https://www.youtube.com/watch?v=syJh3udmjg0

Loading...
Pin It