बेखौफ बदमाश और पस्त पुलिस

सवाल यह है कि प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ता क्यों जा रहा है? बदमाशों के मन से खाकी का खौफ क्यों खत्म हो गया है? सरकार नागरिकों की सुरक्षा करने में नाकाम क्यों हो रही है? अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा खोखला क्यों साबित हो रहा है? महिला अपराधों की बाढ़ क्यों आ गई है? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार व लापरवाही ने पूरी व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है?

Sanjay sharma

आगरा में बदमाशों ने सर्राफा कारोबारी और उसकी पत्नी की हत्या कर दी। बरेली में एक महिला को जिंदा जलाकर मारने की कोशिश की गई और गोरखपुर में एक मासूम से दुष्कर्म किया गया। इसके पहले लखनऊ में एक युवक का बेरहमी से मर्डर कर दिया गया। ये वारदातें यह बताने के लिए काफी हैं कि प्रदेश में कानून व्यवस्था किस ओर जा रही है और पुलिस इन अपराधियों के सामने पूरी तरह पस्त हो चुकी है। सवाल यह है कि प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ता क्यों जा रहा है? बदमाशों के मन से खाकी का खौफ क्यों खत्म हो गया है? सरकार नागरिकों की सुरक्षा करने में नाकाम क्यों हो रही है? अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा खोखला क्यों साबित हो रहा है? महिला अपराधों की बाढ़ क्यों आ गई है? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार व लापरवाही ने पूरी व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है? क्या ऐसे ही स्मार्ट पुलिसिंग का सपना साकार होगा? क्या बढ़ते अपराध प्रदेश की अर्थव्यवस्था को चौपट नहीं कर देंगे?
प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। बदमाश इस कदर बेखौफ हैं कि वे कोर्ट में घुसकर हत्या जैसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के कारण लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है। इस सबके लिए पुलिस का लचर रवैया और विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार जिम्मेदार है। थानों में कई बार रिपोर्ट तक नहीं लिखी जाती है। यही नहीं खुद पुलिसकर्मी पीडि़त पर आरोपियों से समझौता करने का दबाव बनाते हैं। दुष्कर्म और हत्या जैसी घटनाओं को भी पुलिस गंभीरता से नहीं लेती है। पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ के कई मामले भी प्रकाश में आ चुके हैं। लिहाजा अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय खुफिया तंत्र पूरी तरह चरमरा चुका है। यही वजह है कि अपराधी अपराध कर आराम से फरार हो जाते हैं और उनको पकडऩे में पुलिस अक्सर नाकाम रहती है। हालत यह है कि आज भी कई हाई प्रोफाइल केसों का खुलासा नहीं हो सका है और उनकी फाइलें थानों में धूल खा रही हैं। पुलिस अपराधियों को पकडऩे के लिए सीसीटीवी फुटेज के भरोसे रहती है। जाहिर है, जिन वारदात स्थलों पर सीसीटीवी फुटेज नहीं उपलब्ध हैं, वहां पुलिस की जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ पाती है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश सरकार अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की वकालत करती है। जाहिर है कि यदि सरकार अपराधों पर लगाम लगाना चाहती है तो उसे पूरे पुलिस तंत्र में आमूल सुधार लाना होगा। विभाग में भ्रष्टïाचार को खत्म करना होगा। साथ ही अवांछनीय तत्वों से साठगांठ रखने वाले पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर कठोर कार्रवाई करनी होगी।

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