वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धा भारत और भविष्य

सवाल यह है कि भारत के इतने पीछे रहने के कारण क्या हैं? क्या शिक्षा व कौशल विकास में हो रही गिरावट के कारण भारतीय बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं? क्या बाजार में श्रम की मांग और आपूर्ति के अंतर के कारण स्थितियां विकट होती जा रही हैं? क्या भारत अपनी प्रतिभाओं को निखारने में नाकाम साबित हो रहा है? क्या सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है?

Sanjay sharma

वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धा सूचकांक (जीटीसीआई)में भारत ने आठ अंकों की छलांग लगाई है। अब वह इस सूची में 72वें स्थान पर पहुंच गया है। 132 देशों की सूची में स्विटजरलैंड अव्वल है जबकि अमेरिका और सिंगापुर क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। सवाल यह है कि भारत के इतने पीछे रहने के कारण क्या हैं? क्या शिक्षा व कौशल विकास में हो रही गिरावट के कारण भारतीय बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं? क्या बाजार में श्रम की मांग और आपूर्ति के अंतर के कारण स्थितियां विकट होती जा रही हैं? क्या भारत अपनी प्रतिभाओं को निखारने में नाकाम साबित हो रहा है? क्या सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है? क्या अपने नागरिकों को योग्य बनाए बिना देश के विकास को रफ्तार दी जा सकती है?
पूर्व वर्षों से बेहतर छलांग लगाने के बाद भी जीटीसीआई की ताजा रिपोर्ट चिंता का विषय है। हकीकत यह है कि देश में शिक्षा की गुणवत्ता में अभी तक कोई खास बदलाव नहीं आया है। सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यहां शिक्षकों और संसाधनों की बेहद कमी है। रही सही कसर शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टïाचार और नकल माफियाओं की सक्रियता ने निकाल दी है। प्रारंभिक शिक्षा का आलम यह है कि कक्षा एक के करीब तीस फीसदी से अधिक बच्चे सामान्य अक्षर तक नहीं पहचानते हैं। शिक्षा को रोजगार से जोडक़र पढ़ाने की प्रणाली यहां अभी तक लागू नहीं की जा सकी है। इसके कारण छात्रों में पर्याप्त कौशल का विकास नहीं हो पाता है। यह स्थिति तब है जब देश में प्रतिभा की कमी नहीं है और यहां के लोगों में जीवनपर्यन्त सीखने की ललक विद्यमान है। उद्योग धंधों के लिए यहां पर्याप्त श्रम शक्ति मौजूद है लेकिन अकुशल मजदूरों के कारण मांग और आपूर्ति में जमीन आसमान का अंतर है। यह अकुशलता लोगों को बेहतर जीवनयापन के लिए रोजी-रोटी के साधन उपलब्ध कराने में रोड़ा बनी हुई है। कौशल विकास पर फोकस नहीं होने के कारण स्थितियां लगातार बिगड़ती जा रही हैं और दुनिया भर में विकास सुविधाओं तक पहुंच के मामले में भारत 39वें पायदान पर है। जाहिर है यदि इन स्थितियों से ऊपर उठना है तो सरकार को आगे आना होगा। बेहतर रणनीति बनानी होगी। सरकार को न केवल रोजगारपरक और गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रणाली का विकास करना होगा बल्कि कौशल विकास पर भी फोकस करना होगा। इससे भारतीय प्रतिभा निखर सकेगी साथ ही उसे बेहतर रोजगार के साधन उपलब्ध हो सकेंगे। युवा पीढ़ी को शिक्षित, कुशल और योग्य बनाए बिना देश को विकास के रास्ते पर नहीं दौड़ाया जा सकता है।

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