मोबाइल फोन पर मौजूद बैक्टीरिया भी ले रहे शिशुओं की जान

  • मेडिकल कॉलेज की शोध रिपोर्ट से हुआ खुलासा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मेरठ। मोबाइल फोन भी शिशुओं की जिंदगी निगल रहा है। मेडिकल कॉलेज की शोध रिपोर्ट में पता चला कि मोबाइल पर चिपके बैक्टीरिया नवजातों की मौत का कारण बन रहे हैं। बाल रोग विभाग ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग में मोबाइल का कल्चर कराया। इसमें निगेटिव बैक्टीरिया (इकोलाई) की पुष्टि हुई। मोबाइल का नियमित कल्चर कर स्टडी रिपोर्ट बनाई जाएगी।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक नवजात शिशुओं में संक्रमण मौत की सबसे बड़ी वजह है। प्रोफेसर डा. विजय जायसवाल ने बताया कि वार्ड में सक्शन मशीन, बेड व अटेंडेंट के हाथ पर भी बैक्टीरिया मिलते हैं लेकिन मोबाइल फोन सर्वाधिक खतरनाक पहलू बनकर उभरा है। एंटीसेप्टिक विलयन से हाथ धोने के बाद भी मेडिकल स्टाफ व परिजन अक्सर मोबाइल छूते रहते हैं, जिससे इकोलाई और क्लबजेला समेत दर्जनों अन्य घातक बैक्टीरिया संक्रमित होते हैं। नवजातों में कई बार बैक्टीरिया शरीर व दिमाग तक पहुंच जाते हैं। दिमाग के पानी की जांच में मेनिन्जाइटिस की भी पुष्टि हो चुकी है। पेट के संक्रमण से लेकर सेप्सिस तक शिशुओं की जान ले लेते हैं। अगर एक बेड पर पीलिया का रोगी शिशु भर्ती है और उसी पर संक्रमण से ग्रस्त बच्चा भर्ती कर दिया जाए तो खतरनाक है। पीलिया के बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता कम होने से उसे संक्रमण से सेप्सिस बन सकता है। मेरठ के अस्पतालों में खुली हवा की कमी और गंदगी से कई नए माइक्रोआर्गनिज्म पैदा हो रहे हैं। शिशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। संक्रमित बच्चों को अन्य मरीजों से दूर रखा जाएगा। इससे कई शिशुओं में सेप्सिस का खतरा कम होगा। डा. विजय जायसवाल ने बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं के गलत प्रयोग से बैक्टीरिया दवा से बेअसर हो जाता है। पुरानी दवाएं नाकाम हो रही हैं। सेंसिटिविटी कल्चर में पता चला कि बैक्टीरिया पैटर्न बदल रहे हैं।

 

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