परीक्षा की शुचिता का सवाल

सवाल यह है कि परीक्षा में शुचिता को भंग करने का जिम्मेदार कौन है? छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों हो रहा है? क्या सरकारी तंत्र और दलालों की मिलीभगत से यह सारा खेल चल रहा है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे तंत्र को खोखला कर दिया है? क्या गुणवत्ता युक्त शिक्षा के अभाव के कारण ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई हैं? क्या सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा की शुचिता को लेकर गंभीर नहीं है?

Sanjay sharma

लखनऊ विश्वविद्यालय में एलएलबी के त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम के तीसरे सेमेस्टर का पेपर लीक हो गया। इस मामले की जांच एसटीएफ से कराने के निर्देश दिए गए हैं जबकि लॉ की तीन व पांच वर्षीय पाठ्यक्रम की आगामी सभी परीक्षाएं निरस्त कर दी गई हैं। यह केवल बानगी भर है। बोर्ड परीक्षाओं से लेकर मेडिकल व इंजीनियरिंग परीक्षाओं तक का हाल बेहाल है। सवाल यह है कि परीक्षा में शुचिता को भंग करने का जिम्मेदार कौन है? छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों हो रहा है? क्या सरकारी तंत्र और दलालों की मिलीभगत से यह सारा खेल चल रहा है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे तंत्र को खोखला कर दिया है? क्या गुणवत्ता युक्त शिक्षा के अभाव के कारण ऐसी स्थितियां उत्पन्न हुई हैं? क्या सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा की शुचिता को लेकर गंभीर नहीं है? क्या प्रतिभाशाली छात्रों के साथ हो रहे अन्याय को रोका नहीं जाना चाहिए?
पूरे प्रदेश में होने वाली तमाम परीक्षाएं भ्रष्टïाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं। आलम यह है कि बोर्ड परीक्षाओं में केंद्र निर्धारण के दौरान जमकर खेल किया जाता है। मानकों को धता बताकर तमाम स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया जाता है। इसके बाद नकल कराने का खेल शुरू होता है। नकल माफिया पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं। इनका पूरा नेटवर्क है और ये पेपर लीक करने से लेकर परीक्षा के दौरान नकल कराने तक का ठेका लेते हैं। इसके एवज में वह परीक्षार्थी से मोटी रकम ऐंठते हैं। इसमें दो राय नहीं कि यह खेल बिना विभागीय कर्मचारियों के मदद के संभव नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं का भी यही हाल है। मेडिकल व इंजीनियरिंग परीक्षाओं में भी नकल माफियाओं की पकड़ हैं। वे पैसे के दम पर परीक्षा से पहले पेपर उपलब्ध कर लेते हैं और उसे ऊंचे दामों में परीक्षार्थियों को बेच देते हैं। यही नहीं कई बार वे परीक्षार्थी की जगह दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बिठा देते हैं। ऐसे कई मामले सामने भी आ चुके हैं। नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाएं भी भ्रष्टï तंत्र का शिकार हो चुकी है। यहां भी जमकर धांधली चल रही है। कुल मिलाकर योग्य अभ्यर्थियों के हक को पैसे के दम पर अयोग्यों को उपलब्ध कराने का खेल जमकर चल रहा है और सरकार इस पर नियंत्रण लगाने में नाकाम साबित हो रही है। यदि सरकार वाकई परीक्षा की शुचिता को बरकरार रखना चाहती है तो उसे न केवल पूरी परीक्षा बल्कि शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना होगा। साथ ही प्राथमिक स्तर पर ही गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध करना सुनिश्चित करना होगा। यदि शुरू में ही छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा मिलेगी तो वे शार्टकट या नकल जैसी चीजों को नहीं अपनाएंगे और योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय भी नहीं हो सकेगा।

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