जागरूकता अभियान बेअसर, बढ़ती तम्बाकू की लत बिगाड़ रही लोगों की सेहत

  • कड़े कानूनों के बावजूद नहीं सुधर रहे हालात किशोर भी कर रहे सेवन
  • स्कूलों के पास धड़ल्ले से हो रही गुटखा, सिगरेट और बीड़ी की बिक्री
  • अस्पतालों में बढ़ रही सांस और कैंसर रोगियों की संख्या

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। प्रदेश को तम्बाकू मुक्त करने का अभियान बेअसर साबित हो रहा है। हालत यह है कि अब बड़ों के साथ किशोर भी तम्बाकू का सेवन कर रहे हैं। प्रतिबंध के बावजूद स्कूलों के पास गुटखा, सिगरेट और बीड़ी की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। लिहाजा लोगों की सेहत बिगड़ रही है। धूम्रपान और गुटखे की बढ़ती लत के कारण अस्पतालों में
सांस और कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
प्रदेश में तम्बाकू उत्पाद लोगों की सेहत को बिगाड़ रहे हैं। राजधानी लखनऊ की हालत और भी खराब है। यहां युवा, किशोर औ वृद्ध प्रतिबंध के बावजूद सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार यहां गुटखा, सिगरेट और तम्बाकू के अन्य उत्पादों का सालाना कारोबार करोड़ों रुपये का है। कानूनी रूप से प्रतिबंधित होने के बावजूद तमाम स्कूलों से सौ गज के भीतर धड़ल्ले से तम्बाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। इसका असर यहां पढऩे वाले छात्रों पर पड़ रहा है। छात्रों और किशोरों में तम्बाकू उत्पादों को सेवन की लत बढ़ती जा रही है। यही नहीं रेस्टोरेंट में भी तम्बाकू उत्पादों का सेवन लोग खुलेआम कर रहे हैं। बावजूद इसके इसको रोकने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जाता है। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। लिहाजा प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी तम्बाकू उत्पाद धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि तम्बाकू से 40 तरह के कैंसर व 25 तरह की जानलेवा बीमारियां होती हैं। बीड़ी, सिगरेट के सेवन से फेफड़ों संबंधी तथा तम्बाकू, गुटखा के सेवन से ओरल कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। सिगरेट का हर कश व्यक्ति की आयु को कम करता है।

प्रदेश में 2.5 करोड़ लोग करते हैं धूम्रपान
पूरे देश में 12 करोड़ तथा प्रदेश में 2.5 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं। इसके अलावा इतनी ही संख्या में लोग गुटखा और अन्य तम्बाकू उत्पादों का प्रयोग कर रहे हैं। तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद हालात में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है।

आसपास के लोग होते हैं प्रभावित
चिकित्सकों के मुताबिक एक व्यक्ति घर या सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करता है तो वह अपनी सेहत के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों की सेहत को भी प्रभावित करता है। एक धूम्रपान करने वाला व्यक्ति कम से अपने आस-पास के पांच व्यक्तियों की सेहत को प्रभावित करता है। इससे पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

तम्बाकू व्यक्ति के साथ समाज को भी नुकसान पहुंचाता है। राजधानी को तम्बाकू मुक्त करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने के लिए अन्य संस्थाओं की भी मदद ली जा रही है।
-डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ

विद्यालयों के 100 गज के दायरे में तम्बाकू उत्पादों की बिक्री नहीं की जा सकती है। इस पर नजर रखी जा रही है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-सतीश त्रिपाठी स्टेट कंसल्टेंट, राष्टï्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम

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