उपग्रहों की कमर्शियल लॉन्चिंग और इसरो

सवाल यह है कि इसरो की इस सफलता के निहितार्थ क्या हैं? अमेरिका सहित विश्व के अन्य देश इसरो से उपग्रहों की लॉन्चिंग क्यों करा रहे हैं? क्या ये सफलताएं अंतरिक्ष बाजार में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को एक बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित होंगी? क्या यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है?

Sanjay Sharma
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक साथ दो सफलताएं अर्जित कीं। पहला ताकतवर रडार इमेजिंग सैटेलाइट रीसैट-2वीआर 1 उपग्रह और दूसरा अमेरिका के 6, इजरायल, जापान और इटली के एक-एक सैटेलाइट का प्रक्षेपण सफलतापूर्वक किया। इसके साथ विदेशी उपग्रहों की कमर्शियल लॉन्चिंग में इसरो ने रिकार्ड बना दिया है। सवाल यह है कि इसरो की इस सफलता के निहितार्थ क्या हैं? अमेरिका सहित विश्व के अन्य देश इसरो से उपग्रहों की लॉन्चिंग क्यों करा रहे हैं? क्या ये सफलताएं अंतरिक्ष बाजार में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को एक बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करने में मददगार साबित होंगी? क्या यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है? क्या रीसैट-2वीआर 1 उपग्रह भारतीय सेना को और मजबूती देने में सफल होगा?
इसरो के खाते में सफलताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। उपग्रहों की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग में पूरे विश्व में इसरो की साख बन चुकी है। अमेरिका समेत तमाम देश इसरो के जरिए अपने उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेज रहे हैं। यही वजह है कि इसरो ने 20 सालों में 33 देशों के 319 उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है। इसरो ने यह रिकॉर्ड बनाया है। दरअसल, कमर्शियल लॉन्चिंग को लेकर इसरो की क्षमता में साल दर साल इजाफा हो रहा है। सबसे पहली कमर्शियल लॉन्चिंग 1999 को पीएएसएलवी-सी2 से किया गया था। इस लॉन्चिंग में जर्मनी और दक्षिण कोरिया के एक-एक सैटेलाइट्स छोड़े गए थे। 90 के दशक में दो विदेशी उपग्रह लॉन्च किए गए। इसके बाद 2010 तक इसरो ने 20 विदेशी उपग्रह छोड़े। 2010 से अब तक 297 विदेशी उपग्रह लॉन्च किए। इसरो की क्षमता इतनी अधिक हो चुकी है कि अब वह हर साल औसतन 16 विदेशी उपग्रह छोड़ सकता है। कमर्शियल लॉन्चिंग में इसरो का विदेशी राष्टï्रों की पहली पसंद बनने का कारण इसका कम खर्च और सफलता की अधिकतम दर का होना है। यही वजह है कि इसरो ने पिछले तीन साल में कमर्शियल लॉन्चिंग के जरिए करीब 6289 करोड़ कमाए हैं और इसकी इस कमाई में इजाफा हो रहा है। जाहिर है इसरो की बढ़ती साख और सफलता से देश की अर्थव्यवस्था को भविष्य में नई दिशा मिलेगी। साथ ही वह उभरते अंतरिक्ष बाजार में अहम भूमिका निभाने में सक्षम होगा। वहीं इसरो द्वारा प्रक्षेपित किए गए रीसैट-2वीआर 1 भारतीय उपग्रह से सेना को काफी मदद मिलेगी। ये सैटेलाइट रात के अंधेरे और खराब मौसम में भी काम करेगा। इससे सीमाओं की निगरानी सटीक तरीके से हो सकेगी। यह कृषि, जंगल और आपदा प्रबंधन विभागों की भी मदद करेगा। वैज्ञानिकों की ये सफलताएं देश के लिए शुभ संकेत हैं।

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