प्रदेश में एनीमिया का खतरा बढ़ा, चपेट में महिलाएं और बच्चे

  • जागरूकता अभियान के बावजूद नहीं हो रहा सुधार
  • राजधानी में 58.4 प्रतिशत महिलाएं व 72 फीसदी बच्चों में खून की कमी
  • सर्वे ने खोली चिकित्सा सेवाओं की पोल

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश में एनीमिया का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। महिलाओं और बच्चों के साथ पुरुषों में भी खून की कमी की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। अकेले राजधानी में 58.4 फीसदी महिलाएं और 6 से 59 माह के 72 फीसदी बच्चे इसकी चपेट में हैं। यह स्थिति तब है जब स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई अभियान चलाए जा चुके हैं और अब देश में एनीमिया मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है।
प्रदेश में एनीमिया लगातार अपने पांव फैलाता जा रहा है। यह विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को तेजी से प्रभावित कर रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के मुताबिक प्रदेश में 15 से 49 वर्ष की लगभग 52.4 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से ग्रसित हैं। 6 से 59 माह के लगभग 63.2 प्रतिशत बच्चे और 15 से 49 वर्ष के लगभग 23.7 प्रतिशत पुरुष खून की कमी से जूझ रहे है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हालत और भी बदतर है। यहां 15 से 49 वर्ष की 58.4 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से पीडि़त हैं। बच्चों में इसका प्रतिशत काफी अधिक है। 6 से 59 माह के करीब 72 प्रतिशत बच्चे खून की कमी से प्रभावित हैं। हालांकि पुरुषों में यह प्रतिशत कम हैं। बावजूद इनका प्रतिशत भी चिंताजनक है। राजधानी में 15 से 49 वर्ष के लगभग 22.9 प्रतिशत पुरुष खून की कमी से जूझ रहे हैं। 15-49 वर्ष की लगभग 35.4 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं खून की कमी से ग्रसित हैं। यह स्थिति तब है जब एनीमिया पर नियंत्रण के लिए देश में लगातार जागरूकता व अन्य अभियान चलाए जा रहे हैं। फिलहाल नेशनल आयरन प्लस इनिशिएटिव (निपी), वीकली आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन और नेशनल डिवार्मिंग डे (एनडीडी) कार्यक्रम चल रहे हैं। बावजूद इसके स्थितियों में कोई ठोस बदलाव नहीं दिख रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि जागरूकता के अभाव के कारण भी इस रोग का तेजी से विस्तार हो रहा है। एनीमिया में कमी लाने के लिए उपलब्ध आयरन सिरप और गोली के साथ इसके प्रति जागरूकता लाना बहुत जरूरी है।

जागरूकता अभियान
एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गयी है। यह अभियान 31 मार्च 2020 तक चलेगा। यह अभियान गर्भ से लेकर 19 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों को ध्यान में रखकर उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. एके दीक्षित ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जागरूकता उत्पन्न करना और 6 से 19 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों और गर्भवती व धात्री माताओं जो एनीमिया से पीडि़त हैं, में प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की दर से गिरावट लाना है।

कारण और प्रभाव
पोषक तत्वों की कमी के कारण खून की कमी होती है। इसके चलते शारीरिक एवं मानसिक विकास बाधित होता है। प्रतिरोधक क्षमता में भी कमी आ जाती है। किशोरियों में एनीमिया आगे जाकर गर्भावस्था को भी प्रभावित करता है।

रोग से निपटने और लोगों को जागरूक करने के लिए पूरे देश में एनीमिया मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। इससे रोग पर जल्द नियंत्रण लगने की उम्मीद है।
– डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ

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