स्वच्छता अभियान की हकीकत और लचर तंत्र

सवाल यह है कि सरकार कचरे का समुचित निस्तारण करने में नाकाम क्यों है? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? प्रदेश के तमाम शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अभी तक क्यों नहीं बन पाए? साफ-सफाई के नाम पर हर साल जारी होने वाला भारी भरकम बजट कहां खर्च किया जा रहा है? क्या कचरा निस्तारण के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत नहीं है?

Sanjay Sharma

आवास और शहरी विकास मंत्रालय से स्वच्छता अभियान की पोल खोल दी है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में रोजाना 15, 500 टन कचरा निकलता है और इसके सापेक्ष केवल 58 फीसदी कचरे का ही निस्तारण हो पाता है। जाहिर है तंत्र की लापरवाही के कारण न केवल गंदगी फैल रही है बल्कि कूड़े के ढेर वातावरण और भूगर्भ जल को प्रदूषित कर रहे हैं। सवाल यह है कि सरकार कचरे का निस्तारण करने में नाकाम क्यों है? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? प्रदेश के तमाम शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अभी तक क्यों नहीं बन पाए? साफ-सफाई के नाम पर हर साल जारी होने वाला भारी भरकम बजट कहां खर्च किया जा रहा है? क्या कचरा निस्तारण के लिए ठोस उपाय करने की जरूरत नहीं है? क्या लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की छूट दी जा सकती है? क्या ऐसे ही प्रदेश के शहरों को स्वच्छ किया जाएगा?
कचरा निस्तारण पर आई रिपोर्ट बेहद चिंताजनक है। प्रदेश के तमाम शहरों के साथ राजधानी लखनऊ की भी हालत बेहद खराब है। यह स्थिति तब है जब शहर की साफ-सफाई के लिए सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी हैं और इसके लिए हर साल करोड़ों का बजट नगर निगम को जारी किया जाता है। कहने को डोर-टू-डोर कूड़ा उठान और उसके नियमित निस्तारण की व्यवस्था है लेकिन हकीकत इसके उलट है। कुछ पॉश इलाकों को छोडक़र अधिकांश जगहों पर गंदगी का साम्राज्य है। बाजारों, गलियों और सडक़ों पर कूड़ा बिखरा रहता है। कई इलाकों में खाली प्लाटों में कूड़ा डाला जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम की ओर से रखे गए डस्टबिन से भी नियमित रूप से कूड़ा उठान नहीं होता है। जहां तक इसके निस्तारण का सवाल है, उसकी हालत और भी बदतर है। कूड़ा निस्तारण के लिए शिवरी प्लांट लगाया गया लेकिन यहां दो महीने से कूड़ा निस्तारण नहीं हो पा रहा है, लिहाजा प्लांट के बाहर कूड़े का पहाड़ लग गया है। कई बार सफाई कर्मी कूड़े को जलाकर इसका निस्तारण करते देखे जाते हैं। इसके कारण प्रदूषण फैल रहा है। कचरे के कारण भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो रहा है। जब राजधानी का यह हाल है तो दूसरे शहरों के बारे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। आज तक तमाम शहरों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तक नहीं बन सके हैं। यदि सरकार कचरे का सौ फीसदी निस्तारण करना चाहती है तो उसे न केवल इसके लिए ठोस रणनीति बनानी होगी बल्कि इसके निस्तारण की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो न केवल वातावरण प्रदूषित होगा बल्कि लोगों की सेहत पर भी इसका खराब असर पड़ेगा।

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