हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद नहीं सुधरे हालात, अस्पताल अतिक्रमण के शिकार

  • अतिक्रमण हटाओ दस्ते के लौटते ही फिर सज जाती हैं दुकानें
  • परिसर में पार्क हो रहे वाहनों ने भी बढ़ा दी है मरीजों की मुसीबत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद अस्पतालों के इर्द-गिर्द और परिसर के अंदर अतिक्रमण खत्म नहीं हो रहा है। अतिक्रमण दस्ते के लौटते ही अतिक्रमणकारी दोबारा अपनी जगहों पर जम जाते हैं और दुकानें सजा लेते हैं। यही नहीं खुद अस्पताल प्रशासन भी इस मामले को लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। लिहाजा परिसर के अंदर वाहनों को पार्क किया जा रहा है। इसके कारण मरीजों को चिकित्सकों तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पिछले दिनों एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन से अस्पतालों में फैले अतिक्रमण को लेकर रिपोर्ट तलब की थी। कोर्ट ने पूछा था कि पीजीआई, केजीएमयू, बलरामपुर व सिविल अस्पताल के निकट से अतिक्रमण हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट द्वारा रिपोर्ट तलब करने के बाद अस्पतालों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। आनन-फानन में अतिक्रमण हटाया गया। अब इन अस्पतालों में फिर अतिक्रमणकारियों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी है। एक याचिका पर कोर्ट ने फिर रिपोर्ट तलब की है। इस पर कोर्ट को बताया गया कि आठ सदस्यीय टीम इस मामले को देख रही है। इसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। इसके उलट हकीकत यह है कि अस्पतालों के इर्द-गिर्द ठेले खोमचे वाले हमेशा जमे रहते हैं। कुछ ने बाकायदा गुमटियां डाल रखी हैं और कारोबार कर रहे हैं। प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद वे सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसके कारण मरीजों का अस्पताल परिसर में पहुंचना मुश्किल हो रहा है। पुलिस की लापरवाही के कारण स्थितियों में सुधार होता नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन भी इस मामले में गंभीर नहीं दिख रहा है। लिहाजा अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।

एंबुलेंस को करनी होती है मशक्कत

अस्पतालों में बेतरतीब पार्क वाहनों के कारण गंभीर मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। हालत यह है कि मरीजों को लेकर आ रही एंबुलेंस को भी इमरजेंसी तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन अस्पताल प्रशासन परिसर में फैले इस अतिक्रमण पर आंखें मूंदे बैठा है।

कई बार पुलिस प्रशासन और नगर निगम को अस्पताल से बाहर लगे अतिक्रमण को हटाने के लिए पत्र लिखा जा चुका है। अतिक्रमण हटता भी है लेकिन दुकानदार फिर अपनी दुकानें लगा लेते हैं।
डॉ. डीएस नेगी, निदेशक, सिविल अस्पताल

अतिक्रमण दस्ते के लौटने के बाद दुकानदार फिर अपनी जगह जम जाते हैं। प्रशासन को इसका स्थायी समाधान निकालना होगा।
एसएम त्रिपाठी, प्रवक्ता बलरामपुर अस्पताल

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