अब जीरो डिस्पोजल बनेंगे पार्क, पत्तियों से बनायी जाएगी खाद

  • बाहर से खाद मंगाने का भी झंझट होगा खत्म, कई पार्कों में लगाई जाएंगी मशीनें
  • लोहिया पार्क में सफल प्रयोग के बाद अधिकारियों का उत्साह बढ़ा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। शहर के पार्कों को जीरो डिस्पोजल बनाने की कवायद शुरू हो गई है। अब बाहर से खाद लाने और पेड़ों में डालने का झंझट खत्म हो जाएगा। विश्वस्तरीय जनेश्वर मिश्र पार्क समेत कई पार्कों में वहीं के पेड़ पौधों की पत्तियों से खाद का निर्माण होगा। इसका प्रयोग लोहिया पार्क में सफल रहा है। अब अन्य पार्कों में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए मशीनों से खाद बनाने की तैयारी की जा रही है। इससे एलडीए के उद्यान विभाग को अब पार्कों का कचरा भी बाहर नहीं भेजना पड़ेगा।
एलडीए अपने सभी पार्कों को जीरो डिस्पोजल बनाना चाहता है। लोहिया पार्क में इसके लिए वहां के पेड़-पौधों की पत्तियों से खाद बनाने का काम शुरू किया गया था। अफसरों के अनुसार पार्क में मिलने वाले कचरे से वहीं पर खाद बनाई जा रही है। इससे लोहिया पार्क समेत दूसरे छोटे पार्कों की खाद की जरूरत भी प्राधिकरण पूरी कर रहा है। उद्यान विभाग के उप निदेशक एसपी सिसोदिया ने बताया कि अभी तक पार्कों के कचरे को हटाने के लिए धनराशि खर्च की जा रही थी मगर अब इसका निस्तारण किया जाएगा। इसके तहत कंपोस्टिंग से खाद बनाना शुरू किया गया है। पार्क में पत्तियां और घास इतनी अधिक मात्रा में निकल रही है कि उसको रखने के लिए जगह कम पड़ गई लिहाजा मशीन से कंपोस्टिंग शुरू कराई गई। मशीन की कीमत 95 हजार है। श्रेडिंग मशीन से तीन महीने की जगह अब सात-आठ दिन में ही खाद बनने लगी है। अब इतनी खाद बन रही है कि उससे लोहिया पार्क के आलावा दूसरे पार्कों की मांग पूरी हो रही है। बैक्टीरिया भी अब यहीं विकसित हो गया है। ऐसे में अब इसे भी खरीदने की जरूरत एलडीए को नहीं है। इस प्रयोग को अब लोहिया पार्क से करीब 5 गुना बड़े जनेश्वर पार्क में भी शुरू किया जा रहा है। जल्द यह भी जीरो डिस्पोजल पार्क बन जाएगा।

अभी तक नहीं थी व्यवस्था
एलडीए अफसरों के अनुसार अभी तक पार्कों में पौधों में कम ही खाद डाली जाती थी। प्रकृतिक तौर पर या बेहद न्यूनतम खाद से ही इनकी जरूरत पूरी की जा रही थी। नयी व्यवस्था के चलते एलडीए के पास मांग से अधिक खाद है। ऐसे में यह पौधों और घास के लिए भी उपयोगी होगी।

प्लास्टिक कचरे का भी होगा उपयोग
पार्कों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए उद्यान विभाग प्लास्टिक कचरा इकट्ठा कर अपने अभियंताओं को देगा जो इसका उपयोग सडक़ बनाने में कर सकेंगे।

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