महिलाओं से बर्बरता पर अंकुश कब?

सवाल यह है कि तमाम कानूनों के बावजूद महिलाओं के प्रति बर्बरता क्यों बरती जा रही है? क्या बदमाशों के मन में वर्दी का कोई खौफ नहीं रह गया है? महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने में सरकार नाकाम क्यों हो रही है? क्या समाज में फैल रही गंदी सोच इसके लिए जिम्मेदार है? क्या महिलाओं को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?

Sanjay Sharma
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक गैंगरेप पीडि़ता के साथ हैदराबाद की महिला डॉक्टर जैसी हैवानियत की गई। मुकदमे की पैरवी के लिए जा रही पीडि़ता को आरोपियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर जिंदा जला दिया। पीडि़ता को नाजुक हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सवाल यह है कि तमाम कानूनों के बावजूद महिलाओं के प्रति बर्बरता क्यों बरती जा रही है? क्या बदमाशों के मन में वर्दी का कोई खौफ नहीं रह गया है? महिला के प्रति बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने में सरकार नाकाम क्यों हो रही है? क्या समाज में फैल रही गंदी सोच इसके लिए जिम्मेदार है? क्या महिलाओं को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या ऐसे अपराधियों के लिए कठोर और तत्काल सजा देने का प्रावधान करने की जरूरत नहीं है?
हैदराबाद की घटना हो या उन्नाव की, दोनों मामलों में महिलाओं के साथ अपराधियों ने बर्बरता की हद लांघ दी है। ताबड़तोड़ एनकाउंटर के बावजूद उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। महिला अपराधों की बाढ़ आ गई है। आए दिन हत्या, बलात्कार, अपहरण जैसी घटनाएं घट रही हैं। इस सबके लिए हमारी पुलिस, सरकारें और समाज तीनों ही जिम्मेदार हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली इस प्रकार की है कि आम आदमी इनके पास जाने से खौफ खाता है जबकि अपराधी बेखौफ रहते हैं। कई बार तो थानों में बलात्कार पीडि़ता की रिपोर्ट तक नहीं लिखी जाती है। उसे आरोपी से समझौता करने का दबाव तक बनाया जाता है। यहां गले तक भ्रष्टïाचार फैला है। जघन्य अपराधों में रिपोर्ट बनाने तक में खेल किया जाता है। कई बार अहम सबूतों को भी दबाने की कोशिश की जाती है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। सरकारें भी ऐसे अपराधों को लेकर पुलिस की तफ्तीश का समर्थन करती नजर आती हैं। अपराधों को रोकने के लिए कोई ठोस पहल नहीं होती दिख रही है। समाज भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं है। समाज में आज भी सामंती सोच विद्यमान है। बेटे-बेटी में भेदभाव किया जाता है। परिवार में बच्चों को महिलाओं का सम्मान करना नहीं सिखाया जाता है। रही सही कसर इंटरनेट पर मौजूद पोर्नोग्राफी पूरी कर देती है। पोर्नोग्राफी ऐसे अपराधों को बढ़ावा दे रही है। सरकार यदि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को नियंत्रित करना चाहती है तो उसे न केवल ऐसे अपराधों के लिए कठोरतम दंड का विधान करना होगा बल्कि पीडि़ता को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित करना होगा। साथ ही पोर्नोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना होगा। इसके अलावा समाज को महिलाओं के सम्मान को स्थापित करने के लिए प्रयत्नशील होना होगा।

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