लोहिया संस्थान में रोगियों की जांच अटकी

  • न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में दवा की किल्लत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। विलय के दो महीने होने के बाद भी अभी तक लोहिया संस्थान की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है। संस्थान में न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में मरीजों की जांच पर संकट खड़ा हो गया है। जांच में इस्तेमाल होने वाली दवा आईसोटोप की कमी है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। जांच के लिए आ रहे मरीजों को जांच की तारीख दी जा रही है। 20 से 25 दिन बाद की तारीख मरीजों को मिल रही है। विभाग में हड्डी के कैंसर, थॉयराइड, ब्रेन स्कैन, गुर्दा, लिवर समेत दूसरी गंभीर बीमारियों की जांच होती है। मरीज को आईसोटोप दवा पिलाने के बाद जांच की जाती है। करीब एक माह पूर्व दवा आपूर्ति करने वाली बेल्जियम की कंपनी से करार की मियाद पूरी हो गई है। लिहाजा कंपनी ने दवा आपूर्ति बंद कर दी। वहीं मरीजों की दुश्वारियां दूर करने के लिए संस्थान ने इजराइल से दवा खरीदने का फैसला किया है।

टीबी के गायब मरीजों की तलाश तेज

  • करीब 38 प्रतिशत टीबी के मरीज खोजे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश में टीबी के गायब मरीजों की तेजी से तलाश चल रही है। एक साल के दौरान करीब 38 प्रतिशत टीबी के मरीज खोजे गए। इन मरीजों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं थी। इनमें सबसे ज्यादा मरीज प्राइवेट अस्पताल व क्लीनिक से मिले हैं।
केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि टीबी के खात्मे में मेडिकल कॉलेज की अहम भूमिका है। इस साल की शुरुआत में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने मान्यता के लिए आवेदन करने वाले सभी नए मेडिकल कॉलेजों को आदेश दिया है कि उन्हें सभी टीबी रोगियों को मुफ्त जांच व इलाज देना होगा। क्षय पोषण योजना भी टीबी मरीजों के लिए प्रभावी साबित हो रही है। प्रत्येक टीबी के मरीज को हर माह 500 रुपए प्रदान किए जा रहे हैं ताकि उसके इलाज में बाधा न आए। मरीजों की तलाश जारी है।

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