बिना किसी गठबंधन के 2022 में चुनाव लड़ेगी सपा: अखिलेश

  • कहा, भाजपा जनता में नफरत फैलाकर कर रही राजनीति
  • जेएनयू में कम खर्च में शिक्षा की मांग कर रहे छात्रों को पीटना गलत

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बिना किसी गठबंधन के 2022 का विधानसभा चुनाव लडऩे और सरकार बनाने का ऐलान किया है। अखिलेश का यह बयान प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव के उस बयान के बिल्कुल विपरीत है जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की पेशकश की थी और कहा था कि अखिलेश यादव ही मुख्यमंत्री बनेंगे।
अखिलेश यादव ने एक शादी समारोह में कहा कि भाजपा लोगों को डराकर व नफरत फैलाकर राजनीति कर रही है। केंद्र व प्रदेश की सरकरों ने लोकतांत्रिक व संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिकरण कर खराब कर दिया है। प्रदेश के सीएम व डिप्टी सीएम पर सपा अध्यक्ष ने कटाक्ष किया कि पहली बार ऐसा देखा गया, जब मुख्यमंत्री अपने डिप्टी सीएम का ही काम छीन रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि प्रदेश में गड्ढा मुक्त सडक़ें, नौजवानों को नौकरी और किसानों को उनके काम का दाम देने का वादा करने वाले भाजपाई कहां हैं। जेएनयू में छात्र कम खर्च में शिक्षा की मांग कर रहे हैं तो उन्हें पीटा जा रहा है। यह गलत है। वहीं एनआरसी पर सपा मुखिया ने कहा कि इसे लागू करने से पहले बताएं कि युवाओं को नौकरी कब मिलेगी।

पूंजीपतियों का हित पोषण कर रही सरकार
अखिलेश यादव ने जारी एक बयान में कहा है कि भाजपा की नीतियां पूंजीघरानों के हितों का पोषण करती हैं। देश का हर वर्ग उससे असंतुष्ट है। विकास का कोई भी पत्थर कहीं लगता नजर नहीं आता है। केवल झूठ, भ्रम और मनमानी के सहारे भाजपा ने काफी समय गंवा दिया, अब आगे उसकी चालें नहीं चलेंगी। यह भी कहा कि सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी लागू करते समय बड़े दावे किए थे। इससे न तो आतंकवाद न नक्सलवाद पर रोक लगी और न भ्रष्टाचार दूर हुआ, न ही काला धन समाप्त हुआ। उल्टे छोटे उद्योग धंधे बंद हो गए। बड़ी कंपनियों में भी कर्मचारियों की छंटनी शुरू हो गई।

महाविद्यालयों में गिरता शिक्षा का स्तर चिंता का विषय: मनोज दीक्षित

  • कहा, शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के बाद ही मिलेगा अनुदान

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
गोंडा। अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने महाविद्यालयों में गिरते शिक्षा के स्तर और बदहाल व्यवस्था पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि यदि अशासकीय या राजकीय महाविद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता मे सुधार नहीं करते हैं तो आने वाला समय उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बगैर सरकार की तरफ से मिलने वाले अनुदान में कठिनाई हो सकती है। आप सभी को अनुदान चाहिए तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना होगा। साथ ही आने वाले समय में महाविद्यालयों को यूजीसी नैक मूल्यांकन के लिए भी तैयार रहना होगा।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के तुलसी सभागार में उचित शिक्षा में सुधार विषय को लेकर आयोजित बैठक का शुभारंभ डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने किया। इस बैठक को प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद सत्यदेव सिंह ने संबोधित करते हुए बढ़ते प्रदूषण स्तर पर चिंता जताई और कहा कि इस समस्या का समाधान उच्च शैक्षिक संस्थानों की तरफ से दिए जाने वाले सुझावों से ही संभव है। प्रबंध समिति के सचिव उमेश शाह ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंशाराम वर्मा ने किया।

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