सीवर लाइन डाल कर भूल गए सडक़ की मरम्मत का कार्य

  • इस्माईलगंज द्वितीय वार्ड के कई मोहल्लों में लोगों का सडक़ पर चलना हुआ मुश्किल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। शहर में विकास कार्यों के नाम पर कई-कई साल लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। ठेकेदार और अफसरों की लपारवाही के चलते लोगों का सडक़ पर चलना मुश्किल हो गया है। ताजा मामला शहर के इस्माईलगंज द्वितीय वार्ड का है। जहां पिछले एक साल पहले सडक़ खोद कर सीवर कनेक्शन तो दे दिया गया लेकिन आज तक सडक़ नहीं बनी।
इस्माईलगंज द्वितीय वार्ड के शिवपुरी, प्रीति नगर, अजय नगर, सुरेंद्रनगर समेत शंकरपुरी में सडक़ों का मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया है। पार्षद समीर पाल सिंह और पूर्व पार्षद रूद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सडक़ की मरम्मत न होने के कारण जनता को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग रोज दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं, इसके अलावा बार-बार कहने के बावजूद जल निगम वार्ड के मुख्य मार्गों पर सीवर कनेक्शन का कार्य नहीं कर रहा है। पिछले 2 साल से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। जनता चिंतित है कि कहीं जल निगम का कार्य खत्म होने के बाद मुख्य मार्ग पर रहने वाले लोगों के घरेलू कनेक्शन ही न मिल पाये।

अवैध वसूली का आरोपबजरंगबली वार्ड स्थित मेहंदी टोला
मुहल्ले में पिछले कुछ दिनों से सीवर कनेक्शन के नाम पर अवैध वसूली के मामलों की शिकायत जल निगम पहुंची है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल निगम के लोग कनेक्शन के नाम पर रूपये मांग रहे हैं।

मानसिक रोगियों को नहीं मिल पा रहा इलाज

  • डीजी के आदेश पर भी अस्पतालों में नहीं बने मानसिक वार्ड

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पद्माकर सिंह के निर्देश के बाद भी बलरामपुर, सिविल, डफरिन समेत शहर के अन्य बड़े अस्पतालों में अब तक मानसिक रोगियों के लिए वार्ड नहीं बन पाए हैं। जिसकी वजह से रोगियों को भटकना पड़ रहा है।
सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. डीएस नेगी का कहना है कि हमारे पास जगह का अभाव है। इस कारण हम अब तक मानसिक रोगियों का वार्ड नहीं बना पाए हैं। बलरामपुर अस्पताल के प्रवक्ता एसएम त्रिपाठी का कहना है कि अस्पताल में अभी मानसिक रोगियों के लिए वॉर्ड नहीं बनाया गया है। हालांकि, मानसिक रोगियों के काउंसलिंग के लिए मन कक्ष चल रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग ने सितंबर में पत्र जारी कर अस्पतालों में मानसिक वॉर्ड बनाने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने अस्पतालों में मानसिक रोगियों के इलाज के प्रति असंतुष्टि जताई थी, इसके बाद महानिदेशक ने यह निर्देश जारी किया था। इन सबके बावजूद अधिकारी गंभीर नहीं है। जिसकी वजह से मरीज भी काफी परेशान हैं।

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