अतिक्रमण की चपेट में सरकारी अस्पताल मरीजों का इमरजेंसी तक पहुंचना मुश्किल

  • परिसर के अंदर वाहनों की लगी रहती है बेतरतीब लाइन
  • अस्पताल के बाहर दुकानदारों ने कर रखा है कब्जा, हाथ पर हाथ धरे बैठे जिम्मेदार
  • गंभीर रोगियों को लेकर पहुंचने वाली एंबुलेंस को भी नहीं मिल रहा रास्ता

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी में हर ओर अव्यवस्था का आलम है। यहां सडक़ों को छोडि़ए सरकारी अस्पतालों के परिसर तक जाम और अतिक्रमण से जूझ रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड तक बेतरतीब वाहन खड़े रहते हैं। लिहाजा एंबुलेंस से लाए गए गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। तत्काल इलाज न मिलने के कारण गंभीर रोगियों की जान जोखिम में पड़ रही है। वहीं शिकायतों के बावजूद स्थितियों में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। अस्पताल प्रशासन के आला अधिकारी कार्रवाई का भरोसा देकर लोगों को टरका रहे हें।
सरकारी अस्पतालों में रोजाना सुबह 8 बजे से दोपहर दो बजे तक लोगों की भीड़ लगी रहती है। इस दौरान यहां हजारों की संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों से पहुंचते हैं और परिसर के अंदर बेतरतीब तरीके से गाडिय़ां खड़ी कर देते हैं। इसके अलावा परिसर के आसपास दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। अतिक्रमण कर दुकानें सजा रखी हैं। इसके कारण स्थितियां और भी खराब हो रही हैं। दूसरी ओर अस्पतालों के बाहर अतिक्रमण को लेकर नगर निगम अभियान चलाने के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। कभी-कभी अभियान चलाया जाता है लेकिन कुछ दिन बाद हालात जस के तस हो जाते हैं। वीआईपी अस्पतालों की सूची में आने वाले सिविल अस्पताल का हाल बेहाल है। अस्पताल के अन्दर गाडिय़ों की कतार इतनी है कि स्टेचर और व्हील चेयर से मरीज को लाने और ले जाने के लिए जगह नहीं है। वहीं बलरामपुर अस्पताल के गेट के पास बने पैथालॉजी सेंटर से लेकर इमरजेंसी और ओपीडी के बाहर खड़ी गाडिय़ों की वजह से मरीज अस्पताल तो पहुंच जाता हैं लेकिन डॉक्टर तक पहुंचने में उसी मशक्कत करनी पड़ती है।

Case -1

आयुष के पिता विनोद कुमार ने बताया कि वह बच्चे को लेकर करीब 12 बजे निकले थे। रास्ते में कई जगह जाम मिला। अस्पताल के कचहरी गेट पर रोडवेज बस के कारण एंबुलेंस फिर जाम में फंस गयी। किसी तरह बलरामपुर अस्पताल के गेट पर पहुंचे लेकिन यहां भी गाडिय़ों के कारण एंबुलेंस इमरजेंसी तक नहीं पहुंच सकी। लिहाजा बच्चे को गोद में लेकर अस्पताल के अंदर दाखिल हुए। इस दौरान बच्चे की तबियत बिगड़ती गई। सही समय से इलाज न मिलने के कारण आयुष की मौत हो गई।

Case -2 

पिछले दिनों फैजाबाद के राकेश अपनी मां का इलाज कराने सिविल अस्पताल पहुंचे थे। राकेश के मुताबिक फैजाबाद से चिनहट आने में तीन घंटे लगे और चिनहट से सिविल अस्पताल आने में साढ़े तीन घंटे लग गए। इतना ही नहीं अस्पताल जैसे-तैसे पहुंचे तो यहां भी हर ओर जाम वाली स्थिति दिखी। इमरजेंसी के गेट तक गाडिय़ों की कतारें लगी हुई थीं। एंबुलेंस को इमरजेंसी गेट तक पहुंचने के लिए जगह नहीं थी। लिहाजा मरीज को गोद में उठाकर डॉक्टर के पास ले जाना पड़ा।

गार्ड भी नहीं तैनात
अस्पतालों में गाड़ी खड़ी करने के लिए कोई तय स्थान नहीं निर्धारत किया गया। ऐसे में तीमारदार अपनी गाडिय़ों को कही भी पार्क कर चले जाते हैं। अस्पतालों में इस पर नजर रखने के लिए कोई गार्ड भी तैनात नहीं किया गया है।

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