‘आयुष्मान’ पर लापरवाही का ग्रहण, गोल्डन कार्ड के लिए भटक रहे लोग

  • कार्ड बनाने की लिए बनाए गए 265 केंद्रों में सिर्फ 80 हैं सक्रिय
  • पीएम की महत्वाकांक्षी योजना को लगाया जा रहा है पलीता
  • शिकायत के बावजूद हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं जिम्मेदार a
  • बिना कार्ड नहीं मिल रहा निशुल्क इलाज, गरीब परेशान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की आयुष्मान योजना पर लापरवाही का ग्रहण लग गया है। तमाम दावों के बावजूद चिन्हित किए गए पात्र गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए जन सुविधा केंद्रों के चक्कर काट रहे हंै। बिना कार्ड के गरीबों को पांच लाख तक की निशुल्क इलाज कराने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। वहीं शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
केंद्र सरकार ने गरीबों को पांच लाख तक के निशुल्क इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना की शुरूआत की है। इसके तहत गोल्डन कार्ड धारकों को यह सुविधा मिलती है। चिन्हित पात्रों के कार्ड बनाने के लिए हर जिले में जनसुविधा केंद्र बनाने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत राजधानी लखनऊ में 265 जन सुविधा केंद्र बनाए गए थे लेकिन इसमें महज 80 केंद्र ही कार्य कर रहे हैं। लिहाजा पात्रों के कार्ड नहीं बन पा रहे है। उनको इन केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। आलम यह है कि आयुष्मान योजना के कार्ड बनाने के मामले में लखनऊ फिसड्डी साबित हो रहा है। कार्ड बनवाने के मामले में राजधानी का स्थाना पांचवें नंबर पर है। हालांकि जिम्मेदारों का कहना है कि जो जन सुविधा केंद्र ठीक से काम नहीं कर रहे हैं उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की योजना बनाई जा रही है।
केंद्र सरकार के निर्देश के मुताबिक प्रदेश में 1 करोड़ 18 लाख दो हजार 300 परिवारों को इस योजना से जोड़ा जाना था लेकिन स्थितियां इसके ठीक उलट हैं। अभी तक इस योजना के तहत 70 लाख परिवारों के ही गोल्डन कार्ड बन पाए हैं। एक बड़ी आबादी अभी भी गोल्डन कार्ड बनाने से अछूता रह गई है जिसके चलते वह इसका लाभ नहीं उठा पा रही है।

निजी अस्पताल भी कर रहे आनाकानी
आयुष्मान योजना का लाभ देने के लिए 129 निजी अस्पतालों को जोड़ा गया था। हालांकि यह संख्या पहले 150 थी। दरअसल निजी अस्पताल योजना के तहत मरीजों का इलाज करने में आनाकानी कर रहे हैं। इसकी शिकायत मिलने के बाद कुछ को इस योजना से बाहर कर दिया गया है। वहीं जो अस्पताल योजना से जुड़े हैं, वे भी योजना के तहत मरीजों को इलाज देने से कतरा रहे हैं।

आयुष्मान योजना से परिवारों को जोड़ा जा रहा है। जिनके नाम पंजीकृत हैं उनके कार्ड बनवाये जा रहे हैं। इसमें और तेजी लाई जाएगी।
-संगीता सिंह, निदेशक, आयुष्मान योजना

इलाज उपलब्ध कराने में भी पीछे
आयुष्मान योजना के तहत पात्रों को इलाज उपलब्ध कराने में भी राजधानी काफी पीछे है। इस मामले में बरेली पहलेऔर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र बनारस दूसरे स्थान पर है जबकि प्रदेश की राजधानी लखनऊ तीसरे पायदान पर है।

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