डायबिटीज की गिरफ्त में प्रदेश, ढाई करोड़ से अधिक चपेट में

  • अनियमित जीवनशैली के कारण लगातार बढ़ रहे मरीज
  • अस्पतालों में सैकड़ों मरीज पहुंच रहे इलाज के लिए
  • यूपी में 12 फीसदी लोग हैं डायबिटीज से पीडि़त
  • पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अधिक हो रहीं शिकार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अनियमित जीवनशैली लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। प्रदेश में डायबिटीज के रोगियों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। यूपी में करीब ढाई करोड़ लोग इस रोग की चपेट में आ चुके हैं। अस्पतालों में सैकड़ों मरीज रोज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं राजधानी लखनऊ में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इस रोग की अधिक चपेट में है।
प्रदेश में डायबिटीज का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां 12 फीसदी लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इस आंकड़े में भी हर साल दस फीसदी की दर से वृद्धि हो रही है। जहां तक राजधानी लखनऊ का सवाल है तो यहां भी सूरते हाल कोई बहुत अच्छा नहीं है। सीएमओ दफ्तर से मिली रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वर्ष 10265 पुरूष और 11761 महिला डायबिटीज से पीडि़त हुए हैं। इस प्रकार पिछले साल कुल 22026 मरीजों में डायबिटीज की पुष्टि हुई है। वहीं इस वर्ष अक्टूबर माह में 550 नए मरीजों में डायबिटीज की पुष्टिï हुई है। आंकड़ों से साफ है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं डायबिटीज की अधिक शिकार हो रही हैं। हालत यह है कि यहां के अस्पतालों में रोजाना सैकड़ों मरीज डायबिटीज का इलाज कराने पहुंच रहे हैं। शुरुआती दौर में शुगर लेवल सिर्फ कम या ज्यादा रहने तक सीमित रहता है। लेकिन उसके बाद यह धीरे-धीरे किडनी, लीवर, हार्ट समेत तमाम अंगों को प्रभावित करने लगता है। इसके बाद रोगी का शरीर धीरे-धीरे बीमारी के जाल में फंसता जाता है और अंत में यह बीमारी इतनी अधिक बढ़ जाती है कि जानलेवा साबित होती है।

बचाव

चिकित्सकों के मुताबिक अनियमित जीवनशैली के कारण डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं। रोगी अपनी जीवनशैली बदलकर इस रोग से लड़ सकता है। सुबह करीब 30 मिनट टहलें। मीठी चीजों और वसायुक्त खानपान से परहेज करें।

गर्भवती को डायबिटीज तो रहें सावधा
डफरिन अस्पताल के डॉ. सलमान का कहना है कि यदि गर्भवती महिला को डायबिटीज है तो वह डिलीवरी के तुरंत बाद बच्चे को अपना दूध पिलाए और दो घंटे के अंदर उसके शुगर लेवल की जांच करवाए। कई बार ऐसी महिला से उत्पन्न बच्चा भी रोग का शिकार हो जाता है। यदि समय से इसकी जांच और इलाज हो तो एक हद तक नवजात में डायबिटीज की समस्या खत्म हो सकती है

कोई भी हो सकता है शिकार
कोई भी डायबिटीज का शिकार हो सकता है। टाइप वन डायबिटीज आमतौर पर 6 से 18 साल से कम उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। हालांकि प्रदेश में बहुत कम लोगों को टाइप वन डायबिटीज की शिकायत है। हैरानी की बात यह है कि अब किशोर भी टाइप-2 डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। 13 वर्ष तक के किशोर इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसके अलावा आनुवांशिक कारणों से भी लोग इससे पीडि़त हो रहे हैं। अमूमन 40 साल की महिला और पुरुष इसके शिकार होते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण मोटापा और अनियमित खान-पान है।

अधिकांशत: डायबिटीज का रोग चालीस की उम्र के बाद होता है। खान-पान में अनियमितता के कारण इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ओपीडी में रोजाना एक दर्जन से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
-डॉ. विष्णु, फिजिशियन, बलरामपुर अस्पताल

यहां है एनसीडी क्लीनिक
बलरामपुर अस्पताल
मलिहाबाद सीएचसी
मोहनलालगंज सीएचसी

Loading...
Pin It

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.