भ्रष्टïाचार की जड़ें और सरकार

सवाल यह है कि क्या कुछ भ्रष्टïाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करके इसे रोका जा सकता है? क्या इसके खात्मे के लिए सरकार को व्यापक रणनीति बनाने की जरूरत नहीं है? क्या इसके मूल कारक को समझे बिना इसको समाप्त किया जा सकता है? क्या कोई भी सरकारी विभाग भ्रष्टïाचार से बचा है? क्या भ्रष्टïाचार खत्म करने के लिए समाज की मानसिकता बदलने की जरूरत है?

sanjay Sharma

प्रदेश सरकार ने भ्रष्टïाचार और लापरवाही के आरोप में सात अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी। एक अन्य को पद से हटा दिया व गबन की आरोपी एक इंस्पेक्टर समेत सात पुलिसकर्मियों के ऊपर इनाम घोषित कर दिए। इन कार्रवाईयों से साफ है कि प्रदेश में किस कदर भ्रष्टïाचार व्याप्त है। सवाल यह है कि क्या कुछ भ्रष्टïाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करके इसे रोका जा सकता है? क्या इसके खात्मे के लिए सरकार को व्यापक रणनीति बनाने की जरूरत नहीं है? क्या इसके मूल कारक को समझे बिना इसको समाप्त किया जा सकता है? क्या कोई भी सरकारी विभाग भ्रष्टïाचार से बचा है? क्या भ्रष्टïाचार खत्म करने के लिए समाज की मानसिकता बदलने की जरूरत है? क्या कम समय में अधिक से अधिक कमाने की चाहत ने भ्रष्टïाचार को बढ़ावा नहीं दिया है? क्या ईमानदारी के प्रति लोगों की निष्ठïा खत्म हो गई है?
पूरी दुनिया में भ्रष्टïाचार एक बड़ी समस्या है। पूंजीवाद ने इसे जन्म दिया और आधुनिकीकरण इसका पालन-पोषण कर रहा है। भारत में भी भ्रष्टïाचार व्याप्त है। सरकार का कोई महकमा इससे बचा नहीं है। अधिकांश सरकारी विभागों में बिना सुविधा शुल्क के काम नहीं होता है। सडक़ों और पुलों के ट्रेंडर पास कराने का मामला हो, दवाओं की खरीद हो या स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाने का मामला हो, बिना सुविधा शुल्क काम नहीं होता है। कमीशनखोरी इसका बड़ा जरिया है। इसके लिए पूरा नेटवर्क काम करता है। इसमें एजेंट, कर्मचारी और अधिकारी सभी शामिल होते हैं। सरकार भले ही पारदर्शिता और भ्रष्टïाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस का का दावा कर ले, ये ऊपरी कमाई का कोई न कोई रास्ता निकाल लेते हैं। उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में भी गले तक भ्रष्टïाचार व्याप्त है। आए दिन भ्रष्टïाचार के नए-नए मामले सामने आते रहते हैं। दरअसल, समाज की बदलती सोच ने भ्रष्टïाचार को बढ़ावा दिया। सुविधा शुल्क देकर काम कराने की प्रवृत्ति ने ईमानदारी को पीछे धकेल दिया। कर्मचारी भी ऊपरी कमाई के आदी को गए हैं और यह प्रक्रिया धीरे-धीरे बढ़ती चली गई। हालात यह हो गए हैं कि आज भ्रष्टïाचार पूरे समाज और सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि प्रदेश और केंद्र सरकार ने भ्रष्टïाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाया है और ऐसे लोगों को दंडित भी कर रही है लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है। सरकार यदि भ्रष्टïाचार को खत्म करना चाहती है तो उसे न केवल समाज में इसके खिलाफ जागरूकता पैदा करनी होगी बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली को पारदर्शी और सरल बनाना होगा। अन्यथा भ्रष्टïाचार रक्त-बीज की तरह बढ़ता रहेगा। एक ही जगह कई भ्रष्टïाचारी उत्पन्न होते रहेंगे।

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