…तो ऐसे साकार हो रहा स्मार्ट सिटी का सपना

  • बजबजाती नालियां और कूड़े के ढेर बने शहर की पहचान
  • सडक़ पर बह रहा सीवर का पानी, लोग हो रहे हलकान 

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं, बस एक स्लोगन बनकर रह गया है। यहां मुस्कुराने की कोई वजह नहीं दिख रही है। बजबजाती नालियां, कूड़े के ढेर और सडक़ों पर बह रहा सीवर का पानी शहर की पहचान बन चुके हैं। खुले नाले हादसों को न्योता दे रहे हैं। राजधानीवासियों को इस हालातों से रोज दो-चार होना पड़ता है। ऐसे में स्मार्ट सिटी का सपना कैसे साकार होगा। फोटो जर्नलिस्ट शुभम त्रिपाठी की तस्वीरें नवाबों के शहर लखनऊ के हालात को बयां कर रही हैं।
सरकार के तमाम दावों के बावजूद शहर के हालात दिनोंदिन बदतर होते जा रहे हैं। यहां की तमाम सडक़ों पर सीवर का पानी बह रहा है। सीवर चोक हैं। स्वच्छता अभियान के बावजूद जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। नालियों की साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। कूड़ेदान भरे पड़े हैं। कूड़े के निस्तारण की कोई व्यवस्था है। नाले चोक हैं। कई जगह नालों के बगल में बनी बाउंड्रीवाल टूट गई है। इसके कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गंदगी के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है। लोग डेंगू और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों से पीडि़त हो रहे हैं। यह हाल तब है जब शहर की साफ-सफाई के लिए करोड़ों का बजट हर साल नगर निगम को जारी किया जाता है। भारी संख्या में सफाई कर्मी तैनात हैं। अधिकारियों का पूरा अमला है। इन हालातों में शहर को स्मार्ट सिटी में तब्दील करने का सपना सरकार और प्रशासन देख रहा है। फिलहाल ये तस्वीरें तंत्र की लापरवाही को उजागर कर रही हैं।

सडक़ें बनीं पशुओं की आरामगाह

राजधानी की सडक़ें पशुओं की आरामगाह बन चुकी है। ये पशु न केवल हादसों को न्योता दे रहे हैं बल्कि लोगों को हमला कर घायल भी कर रहे हैं। पूर्व में पशुओं के हमले में कई लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद इनकी धरपकड़ के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है। इसके कारण सडक़ों पर इनकी आमद लगातार बढ़ती जा रही है।

 

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