आयुष्मान योजना: गोल्डन कार्ड बने शोपीस इलाज के लिए दर-दर भटक रहे पात्र

  • बजट की कमी का रोना रो रहे सरकारी अस्पताल मरीजों को टरका रहे जिम्मेदार
  • गंभीर रोगियों को दी जा रही महीनों की वेटिंग, निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना को सरकारी अस्पताल ही पलीता लगा रहे हैं। हालत यह है कि योजना के तहत बने गोल्डन कार्ड शोपीस बनकर रह गए हैं। मरीज कार्ड लेकर इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। गंभीर रोगियों को भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं जिम्मेदार बजट का रोना रो रहे हैं।
आयुष्मान योजना के कार्डधारकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। कहीं बजट न होने की बात कह कर टरका दिया जा रहा है कहीं इलाज के लिए महीनों बाद की वेटिंग दी जा रही है। मरीजों को जांच के नाम पर दौड़ाया जा रहा है। राजधानी में आयुष्मान योजना में करीब 2,79,930 लाभार्थियों का चयन किया गया है। इसमें करीब 1,08,609 लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड दिया जा चुका है। बाकी को कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जिन लोगों को कार्ड मिला है, उन्हें भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी के कार्ड में बेटे का नाम गलत है तो किसी में मां का। कई लोगों को तो ऐसे कार्ड मिले हैं जिनके मुखिया का नाम है, लेकिन परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम गलत हैं। ऐसे में उनके परिवारिजनों के बीमार होने पर उन्हें इलाज नहीं मिल पाता है।
अस्पतालों में इलाज के नाम पर भी दौड़ाया जा रहा है।

केस एक
मोहनलालगंज निवासी समीर का कहना हैं कि पहले तो आयुष्मान योजना का कार्ड बनाने के लिए दौड़ाते रहे और अब जब कार्ड बन गया तो इलाज के नाम पर कभी किसी कागज की कमी बता कर वापस भेज देते तो कभी बजट की कमी बताकर लौटा देते हैं। आखिर मुझे निजी हॉस्पिटल जाकर इलाज करवाना पड़ रहा है।

केस दो
गोंडा के रहने वाले फारूख को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना हैं कि अस्पतालों में योजना का लाभ लेना बहुत मुश्किल है। कार्ड में उनका नाम सही है, लेकिन पत्नी व बच्चों का नाम गलत लिख दिया गया है। उनके बच्चे को न्यूरोलॉजी की परेशानी है। उसका इलाज चल रहा है, लेकिन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है क्योंकि आधार, राशन कार्ड से नाम मैच नहीं कर रहा है। इसे सही कराने के लिए वे दर-दर भटक रहे हैं।

केस तीन
खुर्रमनगर के रहने वाले रेहान को डॉक्टरों ने कुल्हा बदलवाने की सलाह दी है। मजदूरी करने वाले रेहान का कहना है कि हमने आयुष्मान योजना का लाभ लेने के लिए कार्ड तो बनवा लिया लेकिन इसका फायदा नहीं मिल रहा है। अस्पतालों के चक्कर लगा रहा हूं।

शासन द्वारा अभी नए नाम जोडऩे का आदेश नहीं हुआ है। जैसे ही आदेश जारी होगा इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। योजना के तहत इलाज न मिलने की शिकायत पर जांच कराई जाएगी।
डॉ. नरेंद्र अग्रवाल सीएमओ

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