अब राजधानीवासियों को डराने लगा स्वाइन फ्लू, खतरे से बेखबर जिम्मेदार

  • स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक नहीं जारी की स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए गाइडलाइन
  • अलग वार्ड का भी नहीं किया गया इंतजाम, डेंगू पर ही चिकित्सकों का फोकस
  • अब तक 545 लोग आ चुके हैं चपेट में, पांच की हो चुकी है मौत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। डेंगू के बाद अब स्वाइन फ्लू राजधानीवासियों को डराने लगा है। यह लगातार पैर फैला रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने इससे निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की है। विभाग की ओर से न कोई अलर्ट जारी किया गया है न ही गाइडलाइन ही जारी की गई। अस्पतालों में इसके मरीजों की भर्ती के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था तक नहीं की गई है। यह स्थिति तब है जब डेंगू से ज्यादा लोग स्वाइन फ्लू की चपेट में आ चुके हैं और पांच लोगों की जान जा चुकी है।
राजधानी में डेंगू के साथ स्वाइन फ्लू भी तेजी से पांव पसार रहा है। अभी तक 433 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं जबकि जनवरी से चार अक्टूबर तक स्वाइन फ्लू के 545 मामले सामने आए हैं। डेंगू से एक दर्जन तो स्वाइन फ्लू से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इन आंकड़ों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के कान में जू नहीं रेंग रही है। विभाग में बैठे बड़े अधिकारी खतरे से बेपरवाह बने हुए हैं। डेंगू की रोकथाम के लिए लगातार बैठकें हो रही हैं। जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन स्वाइन फ्लू से बचाव को लेकर अभी तक गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। हैरानी की बात यह है कि एसजीपीजीआई और केजीएमयू को छोडक़र यहां के किसी भी अन्य अस्पताल में स्वाइन फ्लू को लेकर कोई तैयारी नहीं दिख रही है। स्वास्थ्य विभाग ने भी रोग को लेकर अभी तक कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। यही वजह है कि ज्यादातर अस्पतालों में अभी तक स्वाइन फ्लू वार्ड का भी इंतजाम नहीं हो सका है। इसके अलावा दवाओं की किल्लत भी है। यह हाल तब है जब मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और रोजाना दर्जनों मरीज स्वाइन फ्लू से पीडि़त होकर इलाज के लिए यहां पहुंच रहे हैं।

प्रदेश में अब तक 29 की मौत
स्वाइन फ्लू से जनवरी से सितंबर तक प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 2047 मरीज मिले हैं। इसमें 29 की मौत हो गई है जबकि राजधानी में सितंबर तक 540 मरीज मिले हैं। इनमें पांच की मौत हो चुकी है। राजधानी में चार अक्टूबर तक पांच नए मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टिï हुई है।

चार दिन में पांच आए चपेट में
इस माह क्वीन मेरी अस्पताल में चार दिन के अंदर पांच महिलाएं स्वाइन फ्लू की चपेट में आ चुकी हैं। इन्हें वार्ड में भर्ती कराया गया है जबकि सितंबर में छह महिलाएं स्वाइन फ्लू से ग्रसित पाई गई थीं।

लखनऊ में कब कितने मरीज मिले वर्ष मरीज मृत्यु
2011 38 0
2012 121 0
2013 32 0
2014 3 0
2015 1087 0
2016 46 0
2017 2192 14
2018 19 0
2019 545 5
(अब तक) (स्रोत:स्वास्थ्य विभाग )

स्वाइन फ्लू वाले
टॉप 10 जिले
जिला मरीज मौत
1. लखनऊ 528 5
2. मेरठ 392 2
3. गाजियाबाद 332 0
4. आगरा 140 0
5. गौतमबुद्ध नगर 78 0
6. बरेली 57 2
7. हापुड़ 51 0
8. कानपुर 42 0
9. मुजफ्फरनगर 39 3
10. बुलंदशहर 27 3
(जनवरी से सितंबर तक का आंकड़ा)

स्वाइन फ्लू के मरीजों पर नजर रखी जा रही है। जल्द ही इस संदर्भ में गाइडलाइन जारी की जाएगी।
-डॉ. विकाशेंदु अग्रवाल, संयुक्त निदेशक, संचारी रोग

राजधानी में पड़ोसी जिलों के मरीज भी आते हैं। यही वजह है कि यहां मरीजों की संख्या अधिक हो जाती है। राजधानी में स्वाइन फ्लू के जो भी मरीज मिल रहे हैं, उनके घर टीम भेजी जा रही है। पूरे परिवार की जांच भी कराई जाती है।
-डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ

 

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