बच्चों और किशोरों में बढ़ी तम्बाकू की लत, तेजी से आ रहे कैंसर की चपेट में

  • तंबाकू के सेवन से व्यक्ति की औसत उम्र में दस वर्ष हो जाते हैं कम
  • राजधानी के अस्पतालों में मुंह के कैंसर रोगियों की संख्या में इजाफा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बच्चों और किशोरों में तम्बाकू की लत तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके कारण वे मुंह समेत कई अन्य प्रकार के कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुंह के कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसमें पांच वर्ष के बच्चे से लेकर 14 वर्ष तक के किशोर शामिल हैं। हाल यह है कि तम्बाकू से होने वाली बीमारियों के इलाज पर सरकार को भारी भरकम धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। बावजूद इसके तंबाकू के उत्पाद पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक तम्बाकू के सेवन से एक सामान्य व्यक्ति की औसत उम्र में दस वर्ष कम हो जाते हैं।
पांच साल के बच्चों और चौदह साल तक के किशोरों में तम्बाकू की लत बढ़ती जा रही है। इसके कारण माउथ कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियां बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश में कैंसर रोगियों की संख्या साल-दर-साल बढ़ रही है। राजधानी लखनऊ के तमाम अस्पतालों में मुंह के कैंसर रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक देश में प्रतिदिन 5500 से ज्यादा बच्चे, किशोर और युवा तम्बाकू का सेवन शुरू करते हैं। प्रतिदिन 3500 से ज्यादा लोगों की मौत तम्बाकू के सेवन से हुई बीमारियों के कारण होती है। भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में से 40 तम्बाकू के प्रयोग के कारण मरते हैं। लगभग 95 प्रतिशत मुंह के कैंसर रोगी तम्बाकू के सेवन करने वाले होते हैं। तम्बाकू के सेवनकर्ता प्रतिवर्ष 22 प्रतिशत बढ़ रहे हैं। सेकेंड हैंड स्मोक के कारण प्रतिवर्ष छह लाख प्रत्यक्ष और एक करोड़ लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक 65 प्रकार की बीमारियां तम्बाकू की वजह से होती है।

31 मई को मनाया जाता है निषेध दिवस
तम्बाकू से होने वाले नुकसान को देखते हुए साल 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने एक प्रस्ताव द्वारा हर साल 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का फैसला लिया था।

हर साल मर रहे लाखों लोग
विश्व में 60 लाख लोग एवं भारत में 10 लाख लोग हर साल परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से तम्बाकू की वजह से मौत के मुंह में समा जाते हैं। तम्बाकू निषेध की दिशा में जितना कार्य किया जा रहा है, वह पर्याप्त नहीं है। समाज के लोगों को इसके लिए आगे आना होगा।

हृदय और कैंसर का कारण
भारत एक मात्र ऐसा देश है जहां तम्बाकू का विभिन्न रूपों में सेवन किया जाता है। कैंसर के मूल कारणों में तम्बाकू बड़ा कारण है। यह 40 प्रकार के कैंसर और विभिन्न बीमारियां का कारण है। ई-सिगरेट भी बहुत हानिकारक है। निकोटिन का मुख्य कारक तम्बाकू है लेकिन ई-सिगरेट को लेकर आमजन में भ्रांति है कि इससे तम्बाकू की लत से निजात मिलती है और यह स्वास्थ्य के लिए कम नुकसानदेह है जबकि इसके उलट ई-सिगरेट स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह है। हृदय संबंधित 20 प्रतिशत बीमारी तम्बाकू के कारण होती हैं।

तम्बाकू के सेवन से व्यक्ति की औसत आयु 10 वर्ष कम हो जाती है। इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाये, बहुत नुकसानदायक है। इसके कारण कैंसर रोगियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।
-प्रो.एमएलबी भट्ट ,कुलपति, केजीएमयू

तम्बाकू से करीब 2.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है और सरकार को राजस्व भी मिलता है। यही कारण है कि इसको प्रतिबंधित नहीं किया जा रहा है जबकि तम्बाकू से जितना राजस्व सरकार को मिलता है उससे कहीं ज्यादा तम्बाकू जन्य बीमारियों पर खर्च करना पड़ता है। बच्चे और किशोरों में भी तम्बाकू की लत बढ़ी है। वे तेजी से कैंसर के शिकार हो रहे हैं।
-प्रो. सूर्यकांत , विभागाध्यक्ष ,रेस्पिरेटरी मेडिसिन, केजीएमयू

 

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