ईवीएम, चुनाव आयोग और सियासत

सवाल यह है कि क्या सियासी दल ईवीएम को लेकर सियासत कर रहे हैं? क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर भी उनको विश्वास नहीं है? क्या औचक तरीके से हर विधानसभा क्षेत्र के वीवीपैट पर्चियों से नतीजों के मिलान की प्रक्रिया पर उनको भरोसा नहीं है? क्या विपक्ष के इस रवैए से चुनाव आयोग की साख को बट्टा नहीं लग रहा है?

Sanjay Sharma

लोक सभा चुनाव के दौरान ईवीएम फिर सवालों के घेरे में है। कांग्रेस समेत 21 दल ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं। इनकी मांग है कि कम से कम पचास फीसदी ईवीएम का वीवीपैट की पर्ची से मिलान कराया जाए। हालांकि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया था और हर विधानसभा क्षेत्र की पांच मशीनों के नतीजों का वीवीपैट से मिलान कराने का निर्देश दिया था। सवाल यह है कि क्या सियासी दल ईवीएम को लेकर सियासत कर रहे हैं? क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर भी उनको विश्वास नहीं है? क्या औचक तरीके से हर विधानसभा क्षेत्र के वीवीपैट पर्चियों से नतीजों के मिलान की प्रक्रिया पर उनको भरोसा नहीं है? क्या विपक्ष के इस रवैए से चुनाव आयोग की साख को बट्टा नहीं लग रहा है? बैलेट पेपर के जरिए मतदान की पुरानी और थकाऊ परंपरा की वकालत करने के पीछे उनकी मंशा क्या है? ईवीएम को लेकर वे चुनाव आयोग की चुनौती का सामना क्यों नहीं करते हैं?
पिछले कुछ सालों से विपक्षी दल ईवीएम पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का मानना है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। हालांकि चुनाव आयोग कई बार स्पष्टï कर चुका है कि ईवीएम को हैक करना असंभव है। यही नहीं आयोग ने विपक्ष को ईवीएम को हैक करने की चुनौती तक दी थी लेकिन उसने इसे स्वीकार नहीं किया। लोक सभा चुनाव में कांग्रेस समेत तमाम दल एक बार फिर ईवीएम पर निशाना साध रहे हैं। साथ ही विपक्ष मतदान पत्र से चुनाव कराने की मांग भी कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिन राज्यों में विपक्षी दल चुनाव जीत जाते हैं, वहां वे ईवीएम पर सवाल नहीं उठाते हैं। साफ है विपक्ष एक सियासी एजेंडे के तहत ईवीएम पर सवाल उठा रहा। वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए। सुप्रीम कोर्ट ने हर विधानसभा क्षेत्र में पांच ईवीएम के नतीजों का मिलान वीवीपैट की पर्चियों से करने का निर्देश जारी कर दिया, बावजूद उनको भरोसा नहीं हो रहा है। सवाल यह है कि विपक्ष चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर भरोसा क्यों नहीं कर रहा है? सियासी दलों द्वारा बार-बार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने को उचित नहीं कहा जा सकता। साथ ही उसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को महत्व देना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो स्वस्थ लोकतंत्र महज सपना ही रह जाएगा। अगर कोई शंका है तो विपक्ष को आयोग के साथ मिलकर इसका समाधान करना चाहिए वरना जनता में गलत संदेश जाएगा।

 

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