आज अगर कुछ मिनटों की देरी हो जाती तो हवाई जहाज में मर जाते दर्जनों यात्री

  • जेट एयरवेज के विमान के हवा में पहुंचते ही यात्रियों के नाक-कान से गिरने लगा खून
  • क्रू मेंबर की गलती से जोखिम में पड़ी यात्रियों की जान, अस्पताल में कराया गया भर्ती
  • क्रू मेंबर को हटाया गया जांच के आदेश

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अगर कुछ मिनटों की और देरी हो जाती तो आज एक बड़ा हादसा हो जाता। मुंबई से जयपुर जा रही जेट एयरवेज की फ्लाइट में एक क्रू मेंबर की गलती से दर्जनों यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। कई यात्रियों के नाक और कान से खून बहने लगा और कई यात्री तेज दर्द से तड़पने लगे। इसके बाद जहाज में हड़कंप मच गया। इसके बाद क्रू मेंबर को याद आया कि उसने प्रेशर को मेंटेन करने वाले बटन को नहीं दबाया। मुंबई में फ्लाइट लैंड कराने के बाद यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज चल रहा है। जेट एयरवेज ने इस घटना के लिए खेद व्यक्त किया है और जांच के आदेश दिए हैं।
मुंबई से जयपुर जा रही जेट एयरवेज की फ्लाइट में अचानक कई यात्रियों के नाक और कान से खून निकलने लगा। कुछ यात्रियों ने तेज सिर दर्द की शिकायत की। विमान में 166 यात्री सवार थे। विमान जैसे ही हवा में पहुंचा तभी 30 यात्रियों के नाक और कान से खून निकलने लगा। इससे विमान में हड़कंप मच गया। इससे क्रू मेंबर के हाथ-पांव फूल गए। दरअसल क्रू मेंबर ने विमान में केबिन प्रेशर मेंटेन करने वाले स्विच को नहीं दबाया था। इसके चलते विमान के ऊंचाई पर पहुंचने से लोग हवा की कमी महसूस करने लगे। ऐसे में कुछ लोगों के तबीयत तेजी से बिगडऩे लगी। जेट एयरवेज के प्रवक्ता ने कहा कि विमान में केबिन प्रेशर कम होने लगा था। इससे कुछ यात्रियों की तबीयत बिगडऩे लगी थी। इसके बाद 166 यात्रियों और 5 क्रूमेंबर्स समेत विमान को तत्काल मुंबई में सामान्य ढंग से उतारा लिया गया है। प्रवक्ता का कहना है कि सभी यात्री सुरक्षित हैं। हालांकि कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि जिस क्रू मेंबर की गलती से हादसा हुआ, उसे तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया गया है। साथ ही मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

बर्निंग ट्रेन बनने से बची शताब्दी एक्सप्रेस

नई दिल्ली से लखनऊ आ रही शताब्दी एक्सप्रेस आज बर्निंग ट्रेन बनने से बच गई। कानपुर-लखनऊ रूट की ओएचई लाइन में शॉर्ट सर्किट होने से लखनऊ जा रही स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस को गंगाघाट रेलवे स्टेशन के पास आउटर पर रोक दिया गया। ट्रेन कानपुर से निकलने के बाद उन्नाव आउटर पर पहुंची। अभी ट्रेन गंगाघाट रेलवे स्टेशन के आउटर के पास ही पहुंची थी तभी ओएचई लाइन में पतंग और उसका मांझा फंस जाने से जोरदार स्पार्किंग हुई। यह देख लोको पायलट ने ट्रेन को रोक दिया। ट्रेन के रुकते ही रेल महकमे में हड़कंप मच गया। यात्रियों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ओएचई में हुए शार्ट सर्किट का पता चलते ही रूट पर दौड़ रहीं दूसरी ट्रेनों को भी जहां का तहां रोक दिया गया। बाद में ट्रेन को रवाना किया गया।

भाजपा को शिखर तक पहुंचाने वाले सुनील बंसल का आज जन्मदिन, बधाई देने वालों का लगा तांता

  • संगठन में माहिर बंसल ने भाजपा की बदल दी तस्वीर
  • पर्दे के पीछे रहकर करते हैं पार्टी को आगे बढ़ाने का काम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कुछ महीनों बाद ही होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के एक रणनीतिकार पर सबकी निगाहें टिकी हंै और वह हैं सुनील बंसल। आज सुनील बंसल का जन्मदिन है और उनको शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा हुआ है। विधानसभा चुनावों में भाजपा को प्रचंड बहुमत हासिल हुआ तो उसके पीछे मील के पत्थर की तरह काम करने वाले सुनील बंसल का जादू हर कोई मान गया। सरकार बनने के बाद उनकी निगाहें लोकसभा चुनावों पर आकर टिक गई और पिछले डेढ़ सालों में सुनील बंसल ने यूपी की हर लोकसभा सीट का बारीकी से मंथन करना शुरू किया और बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने के लिए हर जगह बैठकें आयोजित कर कार्यकर्ताओं से कहा कि सरकार आपके बूते बनी हैं और आप ही सरकार की पहली कड़ी हैं इसलिए देश को आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा चुनावों की तैयारी इस तरह करिए कि जैसे आपके परिवार का ही कोई व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बनने जा रहा हो।
सुनील बंसल विद्यार्थी परिषद से संघ की गतिविधियों में शामिल हुए और जब 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद उन्हें यूपी का भाजपा का संगठन मंत्री बनाया गया तो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि संगठन का माहिर यह खिलाड़ी पूरी भाजपा की तस्वीर बदल देगा। उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें इस जीत का हीरो बताया। आमतौर पर सुनील बंसल पर्दे के पीछे रहकर ही काम करना पसंद करते हैं और वे चाहते हैं कि संगठन के कार्यकर्ताओं को यह एहसास हमेशा होता रहे कि यूपी में सरकार सिर्फ उनकी मेहनत के कारण ही बनी है। बेहद विनम्र और सौम्य व्यवहार के लिए प्रसिद्ध बंसल कार्यकर्ताओं में भी बहुत लोकप्रिय हैं। वह भाजपा के कार्यालय में ही प्रवास करते हैं और उन्होंने जिस तरह कार्यकर्ताओं को एकजुट किया उसका लोहा सभी मान गये हैं। 47साल के बंसल 1986 में विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 1989 में परिवार छोड़कर आरएसएस में पूर्णकालिक तौर पर शामिल हो गए। संघ कार्यालय में रहकर 1993 से 1996 तक वह उदयपुर में संघ का काम देखते रहे। इसके बाद 2007 में वे राजस्थान भाजपा के संगठन मंत्री बने। क्षेत्रीय संगठन मंत्री राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री और राष्ट्रीय मंत्री जैसे पदों पर होते हुए 2014 में उन्हें भाजपा में भेजा गया। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में आए सुनील बंसल ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के करीबी सहयोगी के तौर पर काम किया। अमित शाह रणनीति बनाते और उसे जमीन पर उतारने का काम सुनील बंसल करते रहे। बंसल पर अमित शाह का इतना भरोसा था कि महाराष्टï्र विधानसभा चुनाव में उन्हें भेजा गया और नतीजा हुआ कि पहली बार भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। सरकार बनने के बाद विपक्ष के कुछ बड़े लोगों ने समझ लिया कि सुनील बंसल के रहते भाजपा को कमजोर नहीं किया जा सकता। लिहाजा एक साजिश के तहत सुनील बंसल को बदनाम करने का अभियान चलाया गया जिससे उन्हें यूपी से हटाया जा सके मगर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को यह सारी बातें पता चल गईं और नतीजा यह रहा कि सुनील बंसल और मजबूती के साथ भाजपा को मजबूत करने में जुट गए।

 

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