जिद… सच की- अंतरिक्ष बाजार, इसरो और अर्थव्यवस्था

अहम सवाल यह है कि विश्व के तमाम देश भारत से अपने उपग्रहों को प्रक्षेपित कराने में दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं? क्या इसरो की सफलता दर ने अरबों के अंतरिक्ष बाजार में उसका डंका बजा दिया है? इसरो की सफलता भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना और कहां तक असर डालेगी? क्या सस्ती प्रक्षेपण प्रक्रिया के चलते इसरो की मांग बढ़ी है? क्या आने वाले दिनों में इसरो अंतरिक्ष बाजार में अपना मुकाम बना पाएगा?

Sanjay Sharma

पिछले दिनों भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ब्रिटेन के उपग्रह नोवा एसएआर और एस1-4 का सफल प्रक्षेपण किया। नोवा एसएआर का इस्तेमाल वनों के मानचित्र बनाने के अलावा बाढ़ व आपदा निगरानी के लिए किया जाएगा। वहीं एस 1-4 का उपयोग संसाधनों के सर्वेक्षण, पर्यावरण और शहरी प्रबंधन आदि की निगरानी के लिए होगा। इस सफलता ने अतंरिक्ष के क्षेत्र में इसरो के नाम एक और उपलब्धि कर दी है। अहम सवाल यह है कि विश्व के तमाम देश भारत से अपने उपग्रहों को प्रक्षेपित कराने में दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं? क्या इसरो की सफलता दर ने अरबों के अंतरिक्ष बाजार में उसका डंका बजा दिया है? इसरो की सफलता भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना और कहां तक असर डालेगी? क्या सस्ती प्रक्षेपण प्रक्रिया के चलते इसरो की मांग बढ़ी है? क्या आने वाले दिनों में इसरो अंतरिक्ष बाजार में अपना मुकाम बना पाएगा? क्या भविष्य में इसरो स्पेस टूरिज्म को बढ़ावा देने में भी सफल होगा?
कभी राकेट को साइकिल और उपग्रह को बैलगाड़ी पर ढोने वाले भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष विज्ञान में अपना लोहा मनवा लिया है। विश्व के तमाम देश अपने उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के लिए इसरो का सहयोग ले रहे हैं। इसरो ने सिद्ध कर दिया है कि सस्ती प्रक्षेपण प्रक्रिया और सफलता दर को बनाए रखते हुए अंतरिक्ष बाजार में डंका बजाया जा सकता है। अंतरिक्ष बाजार में इसरो की बढ़ती प्रतिष्ठïा का कारण मंगलयान के अलावा अपने रॉकेटों के जरिए भारी विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करना है। इसरो की सफलताओं ने पूरे स्पेस मार्केट में खलबली मचा दी है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में उतरी अमेरिकी कंपनियांं इसरो की सफलता से परेशान हैं। दरअसल, आईटी और बीपीओ इंडस्ट्री के बाद अंतरिक्ष ऐसे तीसरे क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, जिसमें भारत को आउटसोर्सिंग से अच्छी-खासी कमाई हो रही है। इसकी बड़ी वजह इसरो से उपग्रहों का प्रक्षेपण करवाने की लागत अन्य देशों की तुलना में 35 फीसदी कम होना है। लिहाजा कई यूरोपीय देश इसरो के जरिए अपने उपग्रह अंतरिक्ष में भेजना पसंद कर रहे हैं। वहीं इसरो के उपग्रह प्रक्षेपण की सफलता दर 94 फीसदी से अधिक है। इसरो की इस सफलता का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। निकट भविष्य में उपग्रह प्रक्षेपण के जरिए भारत में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आएगी। यह मुद्रा देश और इसरो दोनों के विकास को गति देगी। इसके अलावा इसरो अब अंतरिक्ष में मानव मिशन की तैयारी कर रहा है। स्पेस मिशन की सफलता भविष्य में स्पेस टूरिज्म को बढ़ावा देगी। उम्मीद है इसरो के वैज्ञानिक अपने मिशन में कामयाब होंगे।

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