महज दो फ्लैटों पर फिसल गई खाकी, 700 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी से ही कर लिया सौदा

  • गुडंबा पुलिस ने आरोपी की पत्नी को हिरासत से छोड़ा आरोपी राजेश पर है करोड़ों की धोखाधड़ी का आरोप
  • ईडी की जांच में पुलिस की भूमिका मिली संदिग्ध

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में अक्सर पुलिसकर्मी अपनी करतूतों से खाकी को शर्मसार करने में पीछे नहीं रहते हैं। आये दिन ऐसे मामले प्रकाश में आते हंै जो खाकी की छवि पर धब्बा लगाते हैं। ऐसा ही एक मामला देश के टॉप तीन थानों में शामिल गुडंबा में प्रकाश में आया है। जहां एक बार फिर खाकी दागदार हो गयी है। निवेशकों के करोड़ो हड़प लेने वालों पर गुडंबा पुलिस की मेहरबानी ने एक बार फिर पुलिस और आला अफसरों को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। करोड़ों की धोखाधड़ी करने के आरोपी की पत्नी को पुलिस ने हिरासत में तो लिया लेकिन महज दो फ्लैटों के लालच में छोड़ दिया।
गुडंबा थाना क्षेत्र में जेकेवी लैंड डेवलपर्स कंपनी द्वारा निवेशकों से लगभग 700 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। इसका मामला भी गुडंबा थाने में कुछ निवेशकों द्वारा दर्ज कराया था। यही नहीं इस मामले को लेकर 10 जून को निवेशकों ने थाने पर प्रदर्शन भी किया था। संबंधित मामले के आरोपी प्रबंध निदेशक राजेश सिंह पर पुलिस शिकंजा कसना चाह रही थी। लिहाजा राजेश की पत्नी प्रियंका को पुलिस ने हिरासत में लिया। आरोप है कि प्रियंका को छोडऩे के लिए गुडंबा पुलिस ने एक अफसर के कहने पर दो फ्लैट की डिमांड आरोपी से की और डिमांड पूरी होने से पहले प्रियंका को छोड़ दिया गया। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में भी पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आई है। ईडी ने मामला दर्ज कर निदेशक व आरोपी राजेश सिंह की तलाश शुरू कर दी है। पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए आईजी सुजीत पांडेय ने सहायक पुलिस अधीक्षक उत्तरी विक्रांत सिंह को जांच सौंपते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हंै। इसके साथ ही ईडी ने टेढ़ी पुलिया के पास अपार्टमेंट बनाने वाले अन्य बिल्डर्स पर भी शिकंजा कसने की तैयारी की है और उनके बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की इस कारगुजारी से राजधानी की हाईटेक पुलिस पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गुडंबा पुलिस द्वारा धोखाधड़ी करने वालों पर मेहरबानी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी गुडंबा पुलिस ऐसी करतूतों से चर्चा का विषय बन चुकी है। लगभग 4 साल पहले हुए मैग्नम फाइनेंस के करोड़ों के घोटाले को कोई भूला नहीं होगा। मैग्नम फाइनेंस नामक कंपनी ने निवेशकों से एक हजार करोड़ का घोटाला किया था। इस मामले में भी पुलिस का खेल उजागर हुआ था। मामला सामने आने पर तत्कालीन एसएसपी रवींद्र गौड़ ने जांच कराई थी जिसमें गुडंबा थाना प्रभारी व अन्य की भूमिका पर आरोप सत्य साबित हुए थे। एक्शन में आये रवींद्र गौड़ ने तत्कालीन थाना प्रभारी समेत कई पर गाज गिराई थी। मैग्नम घोटाले में आरोपियों के सबसे बड़े पक्षकार सिपाही रणधीर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।

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