जिद… सच की- बारिश, बीमारी और लचर व्यवस्था

अहम सवाल यह है कि हर बार राजधानीवासी बारिश से होने वाले जलभराव से दो-चार क्यों होते हैं? आज तक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी है? बीमारियों के बढऩे के बाद ही स्वास्थ्य विभाग क्यों चेतता है? जल एवं मच्छरजनित बीमारियों से निपटने के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते हैं?

Sanjay Sharma

प्रदेश में मानसून ने दस्तक दे दी है। राजधानी लखनऊ समेत तमाम जिलों में बारिश हो रही है। सडक़ों से लेकर कॉलोनियों तक में जलभराव की समस्या उत्पन्न होने लगी है। जल एवं मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं, जलभराव और बीमारियों से निपटने के लिए कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर नहीं दिखाई पड़ रही है। अधिकांश कार्रवाई कागजों तक सिमट गई है। ऐसे में कई सवाल उठने लाजिमी हैं। अहम सवाल यह है कि हर बार राजधानीवासी बारिश से होने वाले जलभराव से दो-चार क्यों होते हैं? आज तक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकी है? बीमारियों के बढऩे के बाद ही स्वास्थ्य विभाग क्यों चेतता है? जल एवं मच्छरजनित बीमारियों से निपटने के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते हैं? राजधानी में गंदगी से निपटने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जाते हैं? कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था लचर क्यों है? क्या नागरिकों के सेहत की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?
हर वर्ष बारिश में स्थितियां बदतर हो जाती हैं। हल्की बारिश में ही सडक़ों से लेकर गलियों तक में जलभराव हो जाता है। इससे जल एवं मच्छरजनित बीमारियां फैलती हैं। शुद्ध पेयजल की आपूर्ति तक नहीं की जा रही है। हाल में स्वास्थ्य विभाग ने सप्लाई वॉटर की क्लोरीन जांच की है। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी के कम से कम 17 स्थानों में पीने लायक पानी नहीं है। जाहिर है इन इलाकों में जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। डेंगू और मलेरिया का खतरा भी है। यह स्थिति तब है जब पिछले साल डेंगू से कई लोगों की जान जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग अभी डेंगू के लार्वा ही ढूंढ रहा है। यह अभियान भी सरकारी कार्यालयों तक सीमित है। डेंगू से बचाव के लिए कोई जागरूकता अभियान तक नहीं चलाया जा रहा है। मच्छरों के लार्वा को नष्टï करने का कोई अभियान अभी तक नहीं चलाया गया है। नाली और नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये बहा दिए गए लेकिन जल निकासी व्यवस्था जस की तस है। हल्की बारिश में ही कॉलोनियों और बस्तियों में जलभराव होने लगा है जबकि अभी पूरा मानसून बाकी है। कूड़ा निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई इलाकों में गंदगी का अंबार लगा है। जब राजधानी का यह हाल है तो प्रदेश के दूसरे जिलों की हालत को आसानी से समझा जा सकता है। साफ है लचर तंत्र के कारण जनता की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। यदि सरकार वाकई जनता की सेहत की रक्षा करना चाहती है तो उसे इन अव्यवस्थाओं को त्वरित गति से दूर करना होना। साथ ही इसके लिए दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी।

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