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स्कूलों में कोरोना संक्रमण का खतरा

स्कूलों में कोरोना संक्रमण का खतरा

sanjay sharma

सवाल यह है कि संक्रमण के खतरे के बावजूद प्रदेश सरकार ने स्कूलों को खोलने का निर्णय क्यों लिया? क्या ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम को मजबूत करने में सरकारी और निजी स्कूल सक्षम नहीं है? क्या छात्रों के जीवन को दांव पर लगाया जा सकता है? क्या छात्रों को पढ़ाने के लिए अन्य विकल्प नहीं अपनाए जा सकते हैं? क्या छात्र स्कूल परिसर में कोरोना गाइडलाइन का पालन सख्ती से कर पाएंगे?

कोरोना संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी 19 अक्टूबर से नौवीं से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए स्कूलों को खोलने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब कोरोना की रफ्तार कम होती नहीं दिख रही है। लिहाजा तमाम अभिभावक स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने को लेकर सशंकित हैं। सवाल यह है कि संक्रमण के खतरे के बावजूद प्रदेश सरकार ने स्कूलों को खोलने का निर्णय क्यों लिया? क्या ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम को मजबूत करने में सरकारी और निजी स्कूल सक्षम नहीं हैं? क्या छात्रों के जीवन को दांव पर लगाया जा सकता है? क्या छात्रों को पढ़ाने के लिए अन्य विकल्प नहीं अपनाए जा सकते हैं? क्या छात्र स्कूल परिसर में कोरोना गाइडलाइन का पालन सख्ती से कर पाएंगे? क्या सरकारी और एडेड स्कूलों के पास कोरोना संक्रमण के बचाव के लिए जरूरी संसाधन हैं? क्या स्कूलों में रोजाना सेनेटाइजेशन कराया जा सकेगा? क्या अभिभावकों की चिंता पर सरकार को गौर नहीं करना चाहिए?
कोरोना वायरस ने सभी व्यवस्थाओं को बेपटरी कर दिया है। उत्तर प्रदेश में भी कोरोना संक्रमण का कहर जारी है। यहां अब तक चार लाख 44 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 6507 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण को देखते हुए विभिन्न गतिविधियों को अनलॉक किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से खोलने का निर्णय लिया है। पहले चरण में कक्षा नौ से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए स्कूल खोलने की सशर्त अनुमति दी है। इन स्कूलों में कोरोना गाइडलाइन का पालन अनिवार्य किया गया है। बच्चों को निश्चित दूरी पर बैठाकर पढ़ाने के निर्देश हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि संसाधनों के अभाव में कोरोना गाइडलाइन का पालन कैसे कराया जा सकेगा। अधिकांश सरकारी और एडेड स्कूलों में पर्याप्त बजट नहीं है। ऐसे में स्कूल अपने खर्च पर रोजाना सेनेटाइजेशन कैसे करा पाएंगे। तमाम स्कूलों ने इसके लिए सरकार से अलग बजट की मांग की है। वहीं परिसर में आने वाले छात्र अपने साथियों के संपर्क में नहीं आएंगे इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती। ऐसे में यदि एक भी बच्चा कोरोना संक्रमित हुआ तो स्थितियां विस्फोटक हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि सरकार पढ़ाई के किसी अन्य विकल्प पर विचार करे। इसके लिए वह ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम को मजबूत कर सकती है। साथ ही प्रैक्टिकल विषयों पर वह दस या बीस छात्रों का ग्रुप बनाकर लैब में बुलाकर उनको इसकी जानकारी देने की व्यवस्था कर सकती है। इससे संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

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