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सरकारी तंत्र की पोल खोलते तेजाबी हमले

सरकारी तंत्र की पोल खोलते तेजाबी हमले

sanjay sharma

सवाल यह है कि सख्त गाइडलाइन के बावजूद लोगों को तेजाब आसानी से कैसे उपलब्ध हो जाता है? सरकारी तंत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार क्यों कर देता है? खुले बाजार में तेजाब की बिक्री धड़ल्ले से कैसे हो रही है? जुर्माने के कड़े प्रावधानों के बावजूद दुकानदार लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? क्या सतत निगरानी व्यवस्था के बिना तेजाब की बिक्री पर नियंत्रण लगाया जा सकता है?

उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में तीन लड़कियों पर सोते समय तेजाब फेंका गया। तीनों बुरी तरह झुलस चुकी हैं और सभी का इलाज चल रहा है। इसने सरकारी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सवाल यह है कि सख्त गाइडलाइन के बावजूद लोगों को तेजाब आसानी से कैसे उपलब्ध हो जाता है? सरकारी तंत्र सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार क्यों कर देता है? खुले बाजार में तेजाब की बिक्री धड़ल्ले से कैसे हो रही है? जुर्माने के कड़े प्रावधानों के बावजूद दुकानदार लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? क्या सतत निगरानी व्यवस्था के बिना तेजाब की बिक्री पर नियंत्रण लगाया जा सकता है? महिलाओं के खिलाफ लगातार हो रहे तेजाबी हमले के बावजूद प्रशासन लापरवाही क्यों बरत रहा है? आखिर तेजाबी हमले से झुलस रही महिलाओं के प्रति कौन जवाबदेह है? क्या पुलिस-प्रशासन की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने तेजाब की बिक्री को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। प्रावधान किया गया था कि दुकानदार एक रजिस्टर में तेजाब का कुल स्टॉक, खरीदार का नाम-पता और खरीदने का उद्देश्य दर्ज करेंगे। 18 साल से कम उम्र के लोगों को तेजाब नहीं बेचा जाएगा। उल्लंघन पर जब्तीकरण से लेकर पचास हजार तक के जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। इसके अलावा प्रशासन के द्वारा तेजाब विक्रेताओं को पहचान पत्र जारी करने का भी प्रावधान किया गया था। स्कूल, लैब, अस्पताल व सरकारी विभागों को भी इसका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है। बावजूद इसके प्रदेश में महिलाओं पर तेजाबी हमले जारी हैं। इससे साफ है कि सरकार आदेश देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर चुकी है। यही वजह है कि लोगों को बाजार में आसानी से तेजाब मिल जाता है और अपराधी इसका प्रयोग महिलाओं के खिलाफ कर रहे हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में एक फैसला सुनाते हुए महिलाओं पर तेजाब से किए जाने वाले हमले को न केवल हृदयहीन बल्कि अक्षम्य अपराध करार दिया था। दुकानदार न तो रजिस्टर मेंटन कर रहे हैं और न ही पुलिस प्रशासन इस मामले में कोई गंभीरता ही दिखा रहा है। ये स्थितियां बेहद चिंताजनक हैं और तेजाबी हमले मानव सभ्यता के विपरीत हैं। सरकार को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना होगा। यदि सरकार महिलाओं के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल हो रहे तेजाबी हमले को रोकना चाहती है तो उसे न केवल अपनी गाइडलाइन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा बल्कि बाजार में तेजाब की बिक्री पर सतत निगरानी व्यवस्था बनानी होगी अन्यथा महिलाएं ऐसे अपराधियों का शिकार होती रहेंगी।

https://www.youtube.com/watch?v=VUBQOCEpCkM

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