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विदेश यात्रा करने वालों को बिना कोरोना टेस्ट के नहीं लगेगी येलो फीवर वैक्सीन

विदेश यात्रा करने वालों को बिना कोरोना टेस्ट के नहीं लगेगी येलो फीवर वैक्सीन

केजीएमयू में शुरू हो गया येलो फीवर वैक्सीनेशन
सोमवार, गुरुवार व शनिवार को ही लगेगी वैक्सीन
पहले पांच लोगों को ही लगाई जाती थी डोज
अब एक वायल में दस-दस लोगों के ग्रुप को वैक्सीन लगाई जाएगी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अगर आप विदेश यात्रा करते है तो आपके लिए येलोफीवर वैक्सीनेशन से संबंधित बहुत जरूरी खबर है क्योंकि लखनऊ के केजीएमयू में येलोफीवर वैक्सीनेशन शुरू हो गया है। इसके लिए कोरोना टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है जबकि मार्च से पहले ऐसा नहीं था। मगर अब विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि वैक्सीनेशन के तय दिवसों में कोरोना रिपोर्ट साथ लेकर पहुंचे।
बिना कोरोना जांच रिपोर्ट के यात्रियों को विदेश नहीं जाने दिया जाएगा। केजीएमयू की माने तो यह वैक्सीन सप्ताह में तीन दिन लगेगी। दरअसल, अफ्रीकी देशों में यात्रा से पहले येलो फीवर का वैक्सीनेशन अनिवार्य है। इसके लिए देश में केजीएमयू समेत 44 सेंटर बनाए गए हैं। वहीं केजीएमयू को यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड, झारखंड, बिहार, नेपाल का नोडल सेंटर नामित किया गया। यहां सोमवार, गुरुवार व शनिवार को येेलोफीवर का वैक्सीनेशन किया जाता है। केजीएमयू में अब चार राज्यों के लोग इस सुविधा का लाभ उठाएंगे जबकि पहले यूपी और उत्तराखंड के यात्रियों को ही ये सुविधा मिलती थी। नाइजीरिया, इजिप्ट, अमेरिका, साउथ अफ्रीका, अल्जीरिया, केन्या, इथोपिया, ट्यूनेशिया, घाना, सुडान, लीबिया, युगांडा समेत आदि अफ्रीकी देशों की यात्रा से पहले संबंधित सेंटरों पर येलो फीवर का वैक्सीन लगवाना जरूरी है। सेंटर से जारी वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र दिखाने पर ही आपको इन देशों की यात्रा करने की अनुमति प्रदान की जाएगी। एयरपोर्ट पर यह चेक किया जाता है ताकि यात्रा कर रहें व्यक्ति को किसी प्रकार से यलो फीवर जैसी बीमारी के चपेट में न आ सकें।

बचाव का टीका है

येलो फीवर मच्छर की एक खास किस्म से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। पीला बुखार अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले एक मच्छर से फैलता है। इन क्षेत्रों में जाने से पहले बचाव का टीका लगवा लेना चाहिए। हल्के मामलों में बुखार, सिरदर्द, मतली और उल्टी होती है। गंभीर मामलों में दिल, जिगर और गुर्दे की खराबियों से स्थिति जानलेवा हो सकती है। इस बीमारी का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। प्रयास लक्षणों की रोकथाम और जटिलता को कम करने पर केंद्रित होते हैं।

लॉकडाउन में बंद हो गई थी यह सुविधा

लॉकडाउन में वैक्सीनेशन सुविधा को बंद कर दिया गया था। अगस्त में शुरू किया गया मगर कई स्टाफ के कोरोना संक्रमित हो जाने से सितंबर भर वैक्सीनेशन बंद रहा। एसपीएम विभाग के अध्यक्ष डॉ. जमाल मसूद के मुताबिक अक्टूबर में वैक्सीनेशन शुरू कर दिया गया है। इसके लिए कोरोना टेस्ट रिपोर्ट लाना अनिवार्य है। एक वायल में दस-दस लोगों के ग्रुप को वैक्सीन लगाई जाएगी जबकि पहले पांच लोगों को डोज दी जाती थी।

क्या है येलो फीवर

येलो फीवर (पीत ज्वर) की समस्या कर्क व मकर रेखाओं के बीच स्थित अफ्रीकी देशों में पाई जाती है। येलो फीवर इन देशों में संक्रामक रोग माना जाता है जो तीव्र गति से लोगों में फैलता है। इस रोग का कारण एक सूक्ष्म विषाणु है जो कि ईडीस ईजिप्टआई मच्छर के काटने से होता है। इससे बचने के लिए सरकार ने इन देशों की यात्रा से पहले वैक्सीनेशन अनिवार्य कर दिया है।

https://www.youtube.com/watch?v=ofqIhrWYwQM

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