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लॉकडाउन में मजबूत हुए हैं पारिवारिक रिश्ते

लॉकडाउन में मजबूत हुए हैं पारिवारिक रिश्ते

सैनिटाइजर और मास्क की बिक्री ने सारे रिकॉर्ड तोड़ नया बाजार ही विकसित कर दिया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लॉकडाउन के दौरान पारिवारिक रिश्ते मजबूत हुए हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) लखनऊ के सेंटर फॉर मार्केटिंग इन इमर्जिंग इकोनॉमिइस (सीएमईई) के सर्वे में ये बातें सामने आई हैं। सर्वे में पाया गया कि कोरोना काल में लोगों के खरीदारी करने के अंदाज में भी बदलाव देखा गया। सैनिटाइजर और मास्क की बिक्री ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इससे इसका नया बाजार ही विकसित हो गया। लेकिन लॉकडाउन के दौरान जहां लोग अनाज का पर्याप्त स्टॉक अपने घरों पर रखने पर फोकस कर रहे थे, तो वहीं इम्युनिटी बढ़ाने के लिए अंवाला और विटामिन सी जैसे पदार्थों को भी जमकर खरीद रहे थे।
लॉकडाउन के दौरान मिठाइयों की दुकान बंद थीं। ऐसे में चॉकलेट के जरिए मीठा खाकर लोगों ने लॉकडाउन के डिप्रेशन से मुकाबला किया। सोना लोगों का सबसे फेवरिट काम था। जहां अनाजों में सबसे ज्यादा मांग चावल की रही तो सब्जियों में प्याज और आलू छाए रहे। हालांकि इस दौरान मिनरल वॉटर की मांग भी अच्छी रही। हम नए आयाम देख रहे हैं। स्वास्थ्य और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं लोगों के जहन में हैं। उनकी खरीदारी की लिस्ट में यह चिंता झलकती है। लोग परिवार के साथ क्वॉलिटी टाइम बिताना चाहते हैं और स्वास्थ्य चिंताओं के कारण साफ-सफाई की अच्छी आदतें विकसित कर रहे हैं। मार्केटिंग से जुड़े लोगों को भी इन बदलावों पर फोकस करना होगा।

खाने की चिंता

द्य 75 फीसदी लोगों ने अपने चावल की खरीदारी को प्राथमिकता दी।
द्य 100 में से 65 लोग ने आटे का स्टॉक अपने घरों में रखा।
द्य 63 फीसदी लोगों ने खाना बनाने के तेल भी लॉकडाउन के दौरान बड़े स्तर पर खरीदा।
द्य 57 फीसदी लोगों ने दालों की खरीद को तरजीह दी।
द्य 53 फीसदी लोगों ने प्याज खरीदने को प्राथमिकता दी, जबकि 32 फीसदी लोगों ने ही टमाटर खरीदा।
द्य 52 फीसदी लोगों की खरीदारी की सूची में आलू नियमित रूप से शामिल रहा।

स्वास्थ्य का ध्यान

द्य 100 फीसदी लोगों ने स्वास्थ्यवर्धक अंवाला और विटामिन सी की दवाओं को खरीदारी की।
द्य 40 फीसदी लोगों ने नैपकिन, सेनेटाइजर और टिशू पेपर का स्टॉक अपने घरों में रखा।
द्य 36 फीसदी लोगों ने डिस्फंकेट पदार्थों की खरीदारी को प्राथमिकता दी।
द्य 39 फीसदी लोगों ने
सेनेटाइजर और डिस्फंकेट पदार्थों के साथ क्लीनिंग एजेंटों पर खर्च बढ़ा दिया।

https://www.youtube.com/watch?v=94rBGFhRGyA

कुछ मीठा हो जाए
द्य 42 फीसदी लोगों ने लॉकडाउन के दौरान नॉर्मल चॉकलेट से लेकर चॉकलेट सीरप तक की खरीदारी की।
द्य 31 फीसद लोगों ने डेरी प्रॉडक्ट की खरीदारी को प्राथमिकता दी।
द्य 22 फीसद लोगों ने मिनरल वॉटर भी नियमित रूप से खरीदा।
करना है कुछ काम
द्य 44 फीसदी लोगों ने खाना बनाने में अपना समय खर्च किया।
द्य 24 फीसदी लोगों ने नई किताबें पढक़र लॉकडाउन का फायदा उठाया।
द्य 20 फीसद लोगों ने योग और प्रार्थना में अपना समय बिताया।
द्य 32 फीसदी लोगों ने बच्चों के साथ खेलने और पढऩे में समय बिताया।

लॉकडाउन का फायदा शहरवासियों को मिला है। इस दौरान पारिवारिक रिश्ते मजबूत हुए हैं। घरों में खानपान में दिलचस्पी देखी गयी। घरों में लोगों ने एक-दूसरे के साथ वक्त बिताया। स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं लोगों के जहन में जरूरी रहीं। मीठा खाकर लोगों ने डिप्रेशन से मुकाबला किया।
-प्रो. सत्य भूषण दास, आईआईएम लखनऊ

मनोरंजन
द्य 53 फीसदी लोगों ने लोगों ने टीवी पर मनोरंजन को प्राथमिकता दी।
द्य 45 फीसदी लोगों को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कार्यक्रम और फिल्में देखीं।

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