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रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध के निहितार्थ

रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध के निहितार्थ

sanjay sharma

सवाल यह है कि रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का भारत पर क्या असर पड़ेगा? क्या भारत में इन उपकरणों के उत्पादन के लिए जरूरी टेक्नालॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर हैं? क्या यह फैसला रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर सकेगा? क्या स्वदेशी उपकरणों के उत्पादन से भारत की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी?

केंद्र सरकार ने 101रक्षा उपकरणों के आयात पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इन उपकरणों में तोप, असॉल्ट और स्नाइपर राइफल, हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, मालवाहक विमान, मिसाइलें ड्रोन, सर्वे व्हीकल आदि शामिल हैं। ये प्रतिबंध दिसंबर 2020 से 2025 के बीच लागू होंगे। सवाल यह है कि रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का भारत पर क्या असर पड़ेगा? क्या भारत में इन उपकरणों के उत्पादन के लिए जरूरी टेक्नालॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर हैं? क्या यह फैसला रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर सकेगा? क्या स्वदेशी उपकरणों के उत्पादन से भारत की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी? क्या इससे निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी? क्या इससे देश में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकेंगे?
किसी भी देश की सुरक्षा आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस सेना पर निर्भर होती है। भारत तमाम रक्षा उपकरणों के लिए विदेशों पर निर्भर है। ऐसे में यदि युद्ध के दौरान दूसरे देश रक्षा उपकरणों को देने से इंकार कर दें तो मुश्किल खड़ी हो सकती है। लिहाजा इन परिस्थितियों को देखते हुए आत्मनिर्भरता जरूरी है। यही वजह है कि सरकार रक्षा उपकरणों पर प्रतिबंध लगाने और इन्हें देश के भीतर ही बनाने का ऐलान किया है। देश में पंाच सरकारी कंपनियां रक्षा उपकरणों का निर्माण करती हैं। वहीं भारत दुनिया के तीन बड़े हथियार खरीदने वाले देशों में शामिल है। रक्षा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन से देश में घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा। अगले छह सालों में इन उपकरणों के निर्माण के लिए करीब चार लाख करोड़ के ठेके घरेलू रक्षा कंपनियों को दिए जाएंगे। ये कंपनियां डीआरडीओ की डिजाइन और तकनीक के आधार पर इन उपकरणों को तैयार करेंगी। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा क्योंकि इससे रोजगार और अनुसंधान के नए द्वार खुलेंगे। इसके अलावा इन उपकरणों को विदेशों में आयात कर विदेशी मुद्रा भी हासिल की जा सकेगी। बावजूद इसके सरकार को इसके लिए बड़े पैमाने पर न केवल निवेश करना होगा बल्कि इंफ्रास्क्ट्रचर को भी तैयार करना होगा। साथ ही कंपनियों को रक्षा उपकरणों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे युद्ध के समय भारत की सेना को उपकरणों, हथियारों व गोला-बारूद की कमी नहीं पड़ेगी। रक्षा उपकरणों के मामले में भारत की विदेशों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। इसमें दो राय नहीं कि सरकार का यह कदम सराहनीय है लेकिन इसको जमीन पर उतारने के लिए उसे न केवल लगातार मानीटरिंग करनी होगी बल्कि नए शोधों को प्रोत्साहित भी करना होगा।

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