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यूपी विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 199 उम्मीदवार मैदान में

यूपी विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 199 उम्मीदवार मैदान में

बसपा का इस चुनाव से किनारा
सबसे ज्यादा 30 उम्मीदवार मेरठ स्नातक क्षेत्र में जबकि सबसे कम 11 उम्मीदवार लखनऊ से

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानपरिषद की खंड स्नातक और खंड शिक्षक क्षेत्र से 11 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए नाम वापस लेने की अंतिम तारीख कल खत्म हो गई। इसके बाद अब मैदान में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और शिक्षक संघों के अलावा निर्दलीय समेत कुल 199 उम्मीदवार मैदान में हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा 30 उम्मीदवार मेरठ स्नातक क्षेत्र में जबकि सबसे कम 11 उम्मीदवार लखनऊ शिक्षक खंड निर्वाचन क्षेत्र से हैं। शिक्षक और स्नातक खंड निर्वाचन क्षेत्र से विधानपरिषद की 11 सीटों के लिए एक दिसंबर को मतदान होगा और तीन दिसंबर को परिणाम घोषित किया जाएगा। इस चुनाव से बहुजन समाज पार्टी ने किनारा कर लिया है। उत्तर प्रदेश विधानपरिषद के लिए पांच खंड स्नातक और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है।
उल्लेखनीय है कि लखनऊ खंड स्नातक क्षेत्र से कांति सिंह, वाराणसी खंड स्नातक से केदारनाथ सिंह, आगरा खंड स्नातक से डॉक्टर असीम यादव, मेरठ खंड स्नातक से हेम सिंह पुंडीर, इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक से डॉक्टर यज्ञदत्त शर्मा तथा लखनऊ खंड शिक्षक से उमेश द्विवेदी, वाराणसी खंड शिक्षक से चेत नारायण सिंह, आगरा खंड शिक्षक से जगवीर किशोर जैन, मेरठ खंड शिक्षक से ओमप्रकाश शर्मा, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक खंड से संजय कुमार मिश्र और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक से निर्वाचित विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल छह मई 2020 को ही पूरा हो चुका है। कोविड-19 की वजह से यह चुनाव निर्धारित समय पर नहीं हो सका लेकिन अब इसकी प्रक्रिया चल रही है। इन्हीं सीटों के लिए एक दिसंबर को मतदान होना है।

सपा के उम्मीदवार
समाजवादी पार्टी ने आगरा खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉक्टर असीम यादव, मेरठ खंड स्नातक से शमशाद अली, लखनऊ खंड स्नातक से राम सिंह, वाराणसी खंड स्नातक से आशुतोष सिन्हा और इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक से डॉक्टर मान सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। जबकि लखनऊ खंड शिक्षक क्षेत्र से उमाशंकर चौधरी, वाराणसी खंड शिक्षक से लाल बिहारी, बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक से संजय कुमार मिश्र, मेरठ खंड शिक्षक से धर्मेंद्र कुमार, आगरा खंड शिक्षक से हेवेंद्र चौधरी हऊवा और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक से अवधेश को उम्मीदवार बनाया है।

बीजेपी के प्रत्याशी
भारतीय जनता पार्टी ने लखनऊ खंड स्नातक क्षेत्र से अवनीश कुमार सिंह, वाराणसी खंड स्नातक से केदार नाथ सिंह, आगरा खंड स्नातक से डॉक्टर मानवेंद्र प्रताप सिंह, मेरठ खंड स्नातक से दिनेश कुमार गोयल, इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक क्षेत्र से डॉक्टर यज्ञदत्त शर्मा तथा लखनऊ खंड शिक्षक क्षेत्र से उमेश द्विवेदी, आगरा खंड शिक्षक से डॉक्टर दिनेश चंद्र वशिष्ठ, मेरठ खंड शिक्षक से श्रीशचंद्र शर्मा और बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक क्षेत्र से डॉक्टर हरि सिंह ढिल्लो को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

कांग्रेस ने इन्हें उतारा मैदान में
कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक क्षेत्र से मेंहदी हसन, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक खंड से नागेंद्र दत्त त्रिपाठी, मेरठ स्नातक खंड से जितेंद्र कुमार गौड़, आगरा स्नातक खंड से राजेश कुमार द्विवेदी, लखनऊ खंड स्नातक से ब्रजेश कुमार सिंह, इलाहाबाद-झांसी स्नातक खंड से अजय कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा शिक्षक संगठनों और निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश मिशन 2022: बसपा ने लगाया नए जातीय समीकरण पर दांव

पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने के साथ ही कोआर्डिनेटर्स के साथ बनाई अलग टीम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यूपी विधानसभा उपचुनाव में सभी सात प्रत्याशियों की पराजय के बाद बहुजन समाज पार्टी 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बदले समीकरण के साथ उतरेगी। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने के साथ ही कोआर्डिनेटर्स के साथ अलग टीम लगा दी है।
बसपा मुखिया मायावती उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर बेहद गंभीर है। इसी को लेकर उन्होंने प्रदेश संगठन का कायाकल्प भी शुरू कर दिया है। अब बसपा मिशन 2022 पर नए जातीय समीकरण पर दांव लगाने की तैयारी में है। बसपा सुप्रीमो मायावती विधानसभा उप चुनाव में मिली हार और मिशन 2022 को देखते हुए संगठन को नए सिरे से दुरुस्त करने में जुट गई हैं। इस क्रम में उन्होंने पार्टी में दलितों के साथ पिछड़ों को जोडऩे की दिशा में काम शुरू कर दिया है। उन्होंने राजभर समाज के भीम राजभर को बसपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपकर यह साफ संकेत दे दिया है। उनके इस कदम से माना जा रहा है वह अब प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में इसी जातीय समीकरण के आधार पर मैदान में उतरेंगी।
बसपा सुप्रीमो ने इससे पहले एनआरसी और अनुच्छेद 370 के मामले में भारतीय जनता पार्टी की जोरदार खिलाफत की और मुनकाद अली को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। इसके साथ समशुद्दीन राइन और कुंवर दानिश अली को आगे बढ़ाया। मुनकाद अली को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर यह संदेश दिया गया कि बसपा ही मुस्लिम समाज की हितैषी है। इस दौरान दानिश अली को लोकसभा में नेता घोषित किया गया। विधानसभा की सात सीटों पर उप चुनाव में दो सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारा गया। इनके बाद भी मुस्लिम समाज अपेक्षाकृत रूप से बसपा के साथ नहीं जुड़ा। मायावती ने दिल्ली में उप चुनाव में मिली हार की समीक्षा कर ली है। इसके बाद ही बसपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर पिछड़े वर्ग के नेता भीम राजभर को बैठाया गया है।

https://www.youtube.com/watch?v=EUJhrPYSa5c

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