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मानसून की दस्तक और सरकार की तैयारी

मानसून की दस्तक और सरकार की तैयारी

sanjay sharma

सवाल यह है कि क्या कोरोना के साथ बाढ़ और मौसमी बीमारियां सरकार के लिए एक नयी चुनौती बनने जा रही हैं? क्या जरा सी लापरवाही कोरोना संक्रमण में और इजाफा नहीं कर देगा? क्या सरकार बाढ़ पीडि़तों के लिए बनाए जा रहे कैंपों में कोरोना से बचाव का पुख्ता इंतजाम कर पाएगी? क्या सामान्य से अधिक बारिश अर्थव्यवस्था को संजीवनी दे पाएगी?

देश के कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच देश में मानसून ने भी दस्तक दे दी है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में तीन-चार दिनों के भीतर भारी बारिश होने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। इसके अलावा इस बार बारिश सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है। बारिश के साथ बाढ़ और मौसमजनित बीमारियों का भी प्रकोप बढ़ेगा। सवाल यह है कि क्या कोरोना के साथ बाढ़ और मौसमी बीमारियां सरकार के लिए एक नयी चुनौती बनने जा रही हैं? क्या जरा सी लापरवाही कोरोना संक्रमण में और इजाफा नहीं कर देगा? क्या सरकार बाढ़ पीडि़तों के लिए बनाए जा रहे कैंपों में कोरोना से बचाव का पुख्ता इंतजाम कर पाएगी? क्या सामान्य से अधिक बारिश अर्थव्यवस्था को संजीवनी दे पाएगी? क्या मानसून को देखते हुए सरकार ने अभी तक कोई इंतजाम किया है? क्या बिना पुख्ता तैयारी के संभावित खतरे से निपटा जा सकेगा? बाढ़ के स्थायी समाधान का प्रयास कब किया जाएगा?
देश में मानसून के साथ कई समस्याएं हर साल आती है। इसमें सबसे बड़ी समस्या बाढ़ और बीमारियों की है। कोरोना काल में मानसून की दस्तक बड़ी चुनौती साबित होगी। बारिश के दौरान देश की तमाम नदियों में बाढ़ आती है। बाढ़ जान-माल का भारी-नुकसान करती है। देश में हर साल ऐसा होता रहा है। बावजूद इसके सरकारों ने इसका स्थायी हल निकालने की कोशिश कभी नहीं की। लिहाजा हर बार अरबों रुपये बाढ़ के प्रबंधन में खर्च हो जाते हैं। कोरोना काल में यदि बाढ़ ने विकराल रूप लिया तो स्थितियां बेहद खराब हो जाएंगी। इससे कोरोना के संक्रमण का खतरा और बढ़ जाएगा। वहीं मौसमी बीमारियां भी लोगों के लिए बड़ी समस्या पैदा करेंगी। हकीकत यह है कि अभी तक किसी भी राज्य ने बाढ़ को देखते हुए जमीन पर कोई काम नहीं किया है। राज्य सरकारें आदेश देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही हैं जबकि इस बार हालात दूसरे हैं। बाढ़ राहत कैंपों को यदि कोरोना से बचाव के तमाम संसाधनों से लैस नहीं किया गया तो संक्रमण तेजी से फैलेगा। मौसमी बीमारियां और कोरोना संक्रमण स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह चरमरा देगा। इससे बीमारी से होने वाली मौतों में इजाफा होगा। जाहिर है सरकार को अभी से जमीन पर तैयारियों को तेज करना होगा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। साथ ही अस्पतालों की व्यवस्था को भी दुरुस्त करना होगा। पर्याप्त दवाओं और जांच सुविधाओं को बढ़ाना होगा। इन सबके बीच एक उम्मीद यह है कि मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित होगी क्योंकि खाद्यान्न के बेहतर उत्पादन की आशा है।

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