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बढ़ता वायु प्रदूषण खतरे की चेतावनी

बढ़ता वायु प्रदूषण खतरे की चेतावनी

sanjay sharma

प्रदूषण का कहर भविष्य की पीढिय़ों के लिए तबाही का कारण बन रहा है। पिछले साल दुनिया में करीब पांच लाख नवजात शिशु इसी वजह से मौत के आगोश में सो गए। भारत में यह संख्या 1.16 लाख रही थी। प्रदूषण दुनिया में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण है। साल 2010 और 2019 के बीच के एक दशक की अवधि में भारत में पीएम 2.5 की मात्रा में 61 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ये तत्व हमारे देश में होने वाली आधे से अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।

राजधानी लखनऊ सहित पूरे भारत में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के मुताबिक 11 गुना अधिक है इस समय नवाबों के शहर लखनऊ में प्रदूषण। यहां की हवा जहरीली हो रही है। एक्यूआई लेवल (एयर क्वालिटी इंडेक्स ) 249 हो गया है। इस खतरे को भांपते हुए उत्तर प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन ने सतर्कता बरतना शुरू कर दिया है। जबकि मार्च-अप्रैल के महीने में इसकी मात्रा 40 पीएम तक थी। गौर करें अगर आप तो कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए भारत समेत विश्व के बड़े हिस्से में लॉकडाउन जैसे उपाय करने पड़े थे। इस दौरान कामकाज, उद्योग और यातायात ठप पड़ जाने से वायु प्रदूषण लगभग समाप्त हो गया था लेकिन अनलॉक के साथ हवा में फिर जहर घुलने लगा है। लखनऊ में प्रदूषण कोरोना से पहले के स्तर पर पहुंचने लगा है। लखनऊ, दिल्ली समेत उत्तर भारत के अनेक शहर दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में हैं। जाड़े के मौसम में कोहरे, पराली व अलाव जलाने तथा बिजली की अधिक खपत से प्रदूषण में तेज बढ़ोतरी की आशंका है। दुर्भाग्य की बात है कि इस समस्या पर अंकुश लगाने और इसके समाधान की कोशिशों के दावों के बावजूद इसके खतरे में कमी नहीं आ रही है। यह चुनौती कितनी भयावह है, इसका अंदाजा वैश्विक वायु स्थिति की ताजा रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। साल 2019 में वायु प्रदूषण के कारण हुई या गंभीर बीमारियों की वजह से पूरी दुनिया में 67 लाख मौतें हुई थीं, जिनमें से 16 लाख लोग भारत के थे।
प्रदूषण का कहर भविष्य की पीढिय़ों के लिए भी तबाही का कारण बन रहा है। पिछले साल दुनिया में करीब पांच लाख नवजात शिशु इसी वजह से मौत के आगोश में सो गए। भारत में यह संख्या 1.16 लाख रही थी। प्रदूषण जहां दुनिया में मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण है। वहीं हमारे देश में यह स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक घातक है। साल 2010 और 2019 के बीच के एक दशक की अवधि में भारत में पीएम 2.5 की मात्रा में 61 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ये तत्व हमारे देश में होनेवाली आधे से अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। उल्लेखनीय है कि नवजात शिशुओं में लगभग 64 फीसदी मौतें घर के भीतर की हवा में मौजूद जहर से हुई है। भारत जैसे उभरती अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी देश के भीतर और बाहर सौर ऊर्जा समेत स्वच्छ ऊर्जा के अन्य उपायों को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं। सौर ऊर्जा के उत्पादन में वृद्धि के लिए भारत और फ्रांस की अगुवाई में अंतरराष्टï्रीय समूह का गठन भी हुआ है। ऐसे उपायों को अमल में लाने की गति तेज की जानी चाहिए ताकि हम प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना ठीक से कर सकें। तभी इस इस वायु प्रदूषण से जंग जीत पाएंगे।

https://www.youtube.com/watch?v=r1oJbXq2ihc

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